कपड़ा हमारा कैनवस है. इसके साथ खेलना और ऐसा कुछ रचना जिसकी पूरी दुनिया तारीफ करे, किसी डिजाइनर के करियर का सबसे गौरवशाली क्षण होता है.'' यह कहना है शाही एक्सपोर्ट्स में फैशन डिजाइनर 25 वर्षीया अंजुरी नागलिया का. नागलिया निफ्ट के उन पांच विद्यार्थियों में से हैं जिन्हें रोम के एल्टारोमा फैशन वीक, 2010 में अपने डिजाइन प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह से संस्थान के खर्चे पर भेजा गया था.
इंडिया टुडे-नीलसन के सर्वे में भारत में फैशन डिजाइन का शीर्ष संस्थान का दर्जा हासिल करने वाला निफ्ट डिजाइन, मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी में चार साल के बैचलर और दो साल के मास्टर्स कोर्स का संचालन करता है. 2011-12 में भारत का कपड़ा और परिधान एक्सपोर्ट के बढ़कर 32 अरब डॉलर (करीब 1,65,000 करोड़ रु.) तक पहुंच जाने की उम्मीद है जिसकी वजह से बाजार में कुशल रूप से प्रशिक्षित पेशेवरों की भारी मांग है.
निफ्ट में पढ़ने के बहुत सारे फायदे हैं. यह सिर्फ लंदन, मिलान, रोम या न्यूयॉर्क फैशन वीक का दौरा करने तक ही सीमित नहीं हैं. ज्यूलरी मेकिंग से लेकर लेदर डिजाइन तक, यहां छात्रों को 15 विभिन्न तरह के कोर्स चुनने के विकल्प उपलब्ध हैं. उन्हें देश का सर्वोत्तम बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध होता है, जिनमें पर्सनल टेक्सटाइल मशीनों से लेकर भारत में फैशन एवं डिजाइन की पुस्तकों का सबसे बड़ा संग्रह शामिल है.
निफ्ट, दिल्ली की डायरेक्टर अर्चना शर्मा अवस्थी बताती हैं, ''शीर्ष फैकल्टी और बुनियादी ढांचे के अलावा निफ्ट के प्रशिक्षण में जो खास अनूठी बात है, वह है इसका क्राफ्ट क्लस्टर कार्यक्रम. इसे कपड़ा मंत्रालय के साथ तालमेल बनाकर संचालित किया जाता है. इसके तहत हमारे छात्रों को दो हफ्तों के लिए स्थानीय डिजाइनरों के पास प्रशिक्षण लेने, सीखने और उनके साथ काम करने के लिए भेजा जाता है.
हम अपने दिल्ली स्थित छात्रों को पटियाला में फु लकरी, टिल्ला जूती और परांदा कला सीखने, होशियारपुर में दरी बुनाई और लकड़ी पर रोगन सीखने और उदयपुर में गुटका छपाई, अस्थि शिल्प और मोतियों के आभूषण बनाना सीखने के लिए भेजते हैं. इससे हमारे छात्रों को बुनियादी स्तर के उद्योगों को समझने में मदद मिलती है. वे यहां कई और भी कौशल सीखते हैं, जैसे कि रंगों का सम्मिश्रण और हथकरघा बुनाई, जो उनके पूरे करियर में फायदेमंद होगा.''
पिछले अकादमिक साल में निफ्ट ने न्यूयॉर्क के फैशन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ एक रणनीतिक गठजोड़ किया है. इस संस्थान के साथ हुए समझौते के मुताबिक, निफ्ट के छात्र अब तीन साल भारत में और एक साल न्यूयॉर्क में पढ़ाई कर सकेंगे और उन्हें दोनों संस्थानों की दोहरी डिग्री दी जाएगी.
निफ्ट का शिक्षण चक्र इंटर्नशिप, मेंटरशिप, वर्कशॉप, फैशन समारोह और 32 ग्लोबल संस्थानों के साथ छात्रों के आवाजाही (एक्सचेंज) कार्यक्रम के साथ पूरा होता है. यह संस्थान हर साल प्रति छात्र को 30 से 40 प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करता है.
निफ्ट की मुख्य सतर्कता अधिकारी नीलम शामी राव कहती हैं, ''प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल कार्य निफ्ट में पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा हैं. संस्थान के अंदर प्रोजेक्ट कराने के अलावा हमें अकसर विभिन्न सरकारी निकायों का सहयोग करने के लिए भी कहा जाता है. हमने अब तक केंद्रीय विद्यालयों, महाराष्ट्र्र के वन विभाग और एयर इंडिया के लिए वर्दियां तैयार की हैं. इन सबके लिए जरूरी विश्लेषण, फील्ड वर्क और अनुसंधान से छात्रों को अपने ज्ञान क्षितिज के विस्तार में मदद मिली है.''
निफ्ट उद्योग जगत के साथ तालमेल बनाकर चलता है. फैशन हाउस, निर्यात फर्म और डिजाइन मीडिया अब तकनीक पर ज्यादा निर्भर हो गई है, इसलिए निफ्ट अपने छात्रों को 20 विभिन्न तरह के डिजाइन सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का प्रशिक्षण देता है. इनमें एडोबी, सीएडी, 2डी एवं 3डी पैटर्न निर्माण और परिधान निर्माण शामिल हैं.
निफ्ट, दिल्ली के सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख प्रबीर जैन कहते हैं, ''हम अपने छात्रों को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र के अलावा बुनियादी सॉफ्टवेयर पढ़ाकर उन्हें एक ऐसी दुनिया के लिए तैयार करते हैं जो निरंतर तकनीक पर निर्भर होती जा रही है. कोई डिजाइनर, तकनीक की मदद से अपना कीमती समय, ऊर्जा और संसाधन बचा सकता है.''
एक्सपोर्ट फ र्मों से लेकर ई-कॉमर्स साइट तक, निफ्ट के छात्र व्यापक रोजगार परिक्षेत्र में अपना रास्ता तलाश रहे हैं. फिलहाल इस संस्थान में प्लेसमेंट की दर 80 फीसदी तक है.
किसी छात्र का भविष्य कुछ भी हो, वह अपने इस मातृ संस्थान से जुड़ाव बनाए रखता है. निफ्ट (मुख्यालय) के डायरेक्टर जनरल प्रेम कु मार गेरा बताते हैं, ''हमारे पूर्व छात्रों में मनीष अरोड़ा, रितु बेरी और रोहित बल जैसे मशहूर लोगों की पूरी सूची है. वे अकसर यहां पढ़ाने के लिए आते हैं और प्रवेश एवं ग्रेडिंग के लिए बनी जूरी में भी शामिल होते हैं. हमने हाल में हर बैच के लिए रजत जयंती समारोह शुरू किया है ताकि पूर्व छात्र अपने क्लासरूम में लौटकर आएं.''
निफ्ट, दिल्ली के बाद अपनी जगह पर पकड़ बनाए रखने वाला संस्थान दिल्ली का ही पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन है, जो दूसरे रैंक पर है. यहां के छात्रों को व्यापक अंतरराष्ट्रीय संपर्क हासिल है. पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन के सीओओ शरद मेहरा बताते हैं, ''हमने इटली, जर्मनी, ब्रिटेन और एशिया के कई विश्वविद्यालयों के साथ छात्रों के एक्सचेंज कार्यक्रम तैयार किए हैं. न केवल हमारे छात्र इन संस्थानों में जाते हैं, बल्कि हम भी नियमित रूप से उनके छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को बुलाते हैं. इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ डिजाइनरों, स्टाइलिस्टों और फैशन दिग्गजों के साथ संपर्क बनाने का मौका मिलता है.''

