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सीमा पार से भी गर्मजोशी से चुनाव प्रचार

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पड़ोसी मुल्क नेपाल भी शामिल हो गया है. दरअसल, वहां के एफएम रेडियो के जरिए सीमावर्ती इलाकों के प्रत्याशियों का प्रचार किया जा रहा है.

एफएम रेडियो के जरिए प्रचार
एफएम रेडियो के जरिए प्रचार
अपडेटेड 6 फ़रवरी , 2012

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पड़ोसी मुल्क नेपाल भी शामिल हो गया है. दरअसल, वहां के एफएम रेडियो के जरिए सीमावर्ती इलाकों के प्रत्याशियों का प्रचार किया जा रहा है.

नेपाल सीमा के साथ बसे भारतीय जिलों लखीमपुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर आदि में नेपाली एफएम सेवा के रेडियो स्टेशनों की फ्रीक्वेंसी आसानी से पकड़ में आ जाती है. श्रावस्ती जनपद की नेपाल सीमा से लगे जमुनहा कस्बे के एक व्यक्ति का कहना है, ‘नेपाल के एफएम चैनलों में हिंदी गानों के कार्यक्रमों के साथ ही अवधी भाषा में समाचार और कुछ मनोरंजक कार्यक्रम भी आते हैं.’ इलाके में अवधी बोली-समझी जाती है.

सीमावर्ती इलाकों के प्रत्याशी नेपाली एफएम सेवा की लोकप्रियता का फायदा उठा रहे हैं. लेकिन प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद जवाब तलब किया जा रहा है. नेपाल के सीमावर्ती जिले बहराइच की जिलाधिकारी पिंकी जोवेल ने इस बारे में 29 जनवरी की भारत नेपाल इंडो-नेपाल बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में नेपाल के जिले बांके और बर्दिया के अधिकारियों से प्रचार के लिए किए गए भुगतान का ब्यौरा मांगा.

नेपाल के एक बड़े एफएम चैनल मेरी आवाज की न्यूज चीफ सर्जना आचार्य बताती हैं, ‘हर चैनल 400 रु. से 1,000 रु. प्रति मिनट के हिसाब से विज्ञापन शुल्क लेता है. कई बार प्रसारण पर 50 फीसदी की छूट भी मिलती है.’ श्रावस्ती की जिलाधिकारी कंचन वर्मा अपने जिले में इस तरह के प्रचार से इनकार करती हैं. चुनाव प्रचार का यह नायाब तरीका है जिस पर नजर रखना चुनाव आयोग के लिए भी आसान नहीं है.

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