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उत्तराखंड: दलित वोटों की जोड़-तोड़

अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उत्तराखंड में सियासी दलों की निगाह 16 प्रतिशत से अधिक दलित वोटों पर टिक गई है.

दलित वोट
दलित वोट
अपडेटेड 22 अक्टूबर , 2011

अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उत्तराखंड में सियासी दलों की निगाह 16 प्रतिशत से अधिक दलित वोटों पर टिक गई है. दलितों को रिझाने के लिए कांग्रेस ने गढ़वाल मंडल का दलित सम्मेलन कर डाला है, वहीं भाजपा भी दलित सम्मेलनों की तैयारी में जुटी है. दलितों को रिझाने का फायदा केवल 12 आरक्षित सीटों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्‍य की 70 विधानसभा सीटों में से 22 सीटों में दलित वोट किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं.

इसीलिए दलित वोटरों को रिझाने के लिए कांग्रेस ने भाजपा से पहले दलित सम्मेलन की शुरुआत की और अब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह ने यह तक कह दिया है कि अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो वह किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाएगी.

कांग्रेस महासचिव के इस ऐलान के बाद दलित कांग्रेस के प्रति उत्साहित नजर आ रहे हैं. वैसे भी दलित नेता यशपाल आर्य को लगातार दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर कांग्रेस ने दलितों के दिल में जगह बनाने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है. कांग्रेस के गढ़वाल मंडल के दलित स्वाभिमान सम्मेलन में हजारों दलित कार्यकर्ताओं के सामने राष्ट्रीय महासचिव ने सत्ता में आने पर दलित मुख्यमंत्री बनाने की बात कहकर दलितों का दिल जीत लिया.

कांग्रेस के लिए उत्साह की स्थिति यह भी है कि उसी परेड मैदान में 9 अक्तूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी अपने कार्यकर्ताओं में जान फूंकने पहुंचे, लेकिन भाजपा के सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की संख्या कांग्रेस की सभा से भी कम रही बताई जा रही है. दलित सम्मेलन से उत्साहित कांग्रेस ने 20 अक्तूबर को हल्द्वानी में भी कुमाऊं मंडल का शिल्पकार सम्मेलन करने का ऐलान कर दिया है. इतना ही नहीं कांग्रेस अब ऊपर से लेकर क्षेत्र पंचायत स्तर तक दलित सम्मेलन करने का मन बना रही है.

कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीतराम का कहना है कि भाजपा भले ही दलितों को रिझाने का वादा करे, लेकिन भाजपा शासन में दलितों के लिए आए अरबों रुपए केंद्र को वापस गए हैं. भाजपा प्रवक्ता सतीश लखेड़ा कहते हैं कि भाजपा सरकार ने दलितों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं. पार्टी जल्दी ही अनुसूचित जाति, महिला और सैनिक मोर्चे के सम्मेलन आयोजित करने जा रही है. कांग्रेस से अब दलितों का मोहभंग हो चुका है. यह बात पिछले चुनाव में भी प्रमाणित हुई.

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