हरभजन सिंह सरीखा दिखने वाला एक व्यक्ति एक विशालकाय बॉलबियरिंग पर दोनों तरफ पैर पसार कर बैठा है. वह संतुष्ट है, माहौल में अंधेरा है और बोझिलता है और वह अपने पिता की वर्कशॉप पर अपने पहले दिन को बयान करता है, ''आई मेड इट लार्ज.''
बात जैसी कही, वैसी ही है. बॉलबियरिंग ऐसा कि किसी कला प्रदर्शनी में लगाया जा सके. और उसकी संतुष्टि के भारी-भरकम एहसास के साथ इशारा कहीं और है. लेकिन प्यारे डैडी इससे जरा भी प्रभावित नहीं होते और उसे एक चांटा जड़ देते हैं. अब सीधे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पास जो ज्ञान देते हैं, 'डू इट डिफरेंटली, डोंट मेक इट लार्ज.'
धोनी को दिखाने वाला यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) का यह शराब का छद्म विज्ञापन उनके टीम साथी हरभजन सिंह के प्रतिद्वंद्वी रॉयल स्टैग के विज्ञापन का मजाक उड़ाता है. कंपनियों ने विज्ञापनों के प्रचार को आकर्षक बना दिया है.
धोनी एक विज्ञापन के लिए करीब छह करोड़ रु. लेते हैं और जब वे शराब के किसी ब्रांड का छद्म विज्ञापन कर रहे होते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त भुगतान किया जाता है. प्रति विज्ञापन करीब 2 करोड़ रु. लेने वाले हरभजन सिंह कई साल से सीग्राम के ब्रांडों का चेहरा बने हुए हैं. पर लोग हैरान हैं कि क्या क्रिकेटरों को शराब का प्रचार करना चाहिए.
हरभजन और धोनी न कव्वल एक टीम में हैं, बल्कि वे कारोबारी भागीदार भी हैं और मुंबई में संपत्ति के संयुक्त रूप से मालिक हैं. उनकी योजनाएं क्रिकेट की अकादमियां शुरू करने की हैं. लेकिन इन बातों से यूएसएल के लिए मुद्रा कम्युनिकव्शंस के विज्ञापन पर आपत्ति करने से हरभजन की मां अवतार कौर को नहीं रोका जा सका.
कौर ने यूएसएल को कानूनी नोटिस भेजकर विज्ञापन तुरंत रोकने की मांग की और 1 लाख रु. का हर्जाना मांगा. हरभजन के एजेंट संगीत शिरोडकर भी कहते हैं कि वे इस विज्ञापन को हटाए जाने पर जोर देंगे. वे कहते हैं, ''मजाक उड़ाने वाले विज्ञापन तभी चलते हैं, जब वे किरदारों की समानता का फायदा उठा सकें. क्या नौकरी.कॉम के हरि साडू विज्ञापन से पिज्जा हट ने फायदा नहीं उठाया ? लेकिन यह विज्ञापन तो साफ अपमान है.''
यूएसएल के अध्यक्ष विजय माल्या पहले ही कौर की मांग ठुकरा चुके हैं. अपने ट्विटर एकाउंट पर उन्होंने लिखा है, ''यह मजाक बनाने वाला विज्ञापन था, इसका आशय हरभजन पर निजी हमला नहीं था.''
इस महीने की शुरुआत में आए इस विज्ञापन के जारी होने का इससे बुरा समय भारतीय टीम के लिए और नहीं हो सकता था, जब 21 जुलाई से भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में अहम मैच शुरू होना था. इसने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी.
बीसीसीआइ के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रत्नाकर शेट्टी ने इंडिया टुडे से कहा,''यह क्रिकेट का समय है, अहंकारभरी लोकप्रियता पाने की उछलकूद का नहीं.'' ऐसी अफवाहें भी थीं कि हरभजन प्रथम टेस्ट के पहले होने वाले डिनर का बहिष्कार कर सकते हैं, टीम मैनेजर अनिरुद्ध चौधरी को इसका बाकायदा खंडन करना पड़ा.
ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब हरभजन को शराब के विज्ञापनों की वजह से मुश्किल पेश आई है. 2008 में उन्हें एक विज्ञापन में अपना सिर खुला रखने पर पंजाब में धार्मिक गुटों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी. उन्हें माफी मांगनी पड़ी और पगड़ी बांधनी पड़ी.
इस मामले ने विज्ञापन उद्योग की निगेहबान एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआइ) का भी ध्यान खींचा. एएससीआइ के महासचिव एलेन कोलाको कहते हैं, ''हम इस मामले पर गौर करेंगे.'' एएससीआइ अब भारत में छद्म विज्ञापनों और मजाक उड़ाने वाले विज्ञापनों के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रही है.
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