भ्रष्टाचार को उजागर करने का हथियार बने आरटीआइ कानून के जरिए उज्जैन में सरकारी कोचिंग क्लासेज में हुए सनसनीखेज घोटाले को उजागर किया गया है. अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए नेट और स्लेट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने और मार्गदर्शन के लिए यूजीसी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रेमेडियल कोचिंग शुरू की थी. उज्जैन के माधव कला, वाणिज्य एवं विधि कॉलेज ने कोचिंग के लिए यूजीसी से मिलने वाला लाखों रु. का अनुदान तो ले लिया लेकिन क्लासेज लगी ही नहीं. जो क्लास लगी ही नहीं, उस पर शिक्षकों को मानदेय भी दे दिया गया.
8 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
कोचिंग घोटाला तब सामने आया जब कॉलेज के छात्र अजीत यादव ने आरटीआइ के तहत 2008-09 के दौरान रेमेडियल कोचिंग के लाभार्थी छात्रों की सूची और क्लास का टाइम टेबल मांगा. इस पर कॉलेज ने कोचिंग में राज्य सेवा परीक्षा (पीएससी) और एडीपीओ (सहायक जिला लोक अभियोजक) की तैयारी कर रहे छात्रों के नाम पर नियमित छात्रों की सूची दे दी. मामले ने तूल तब पकड़ा जब कई छात्रों ने शपथ पत्र देकर कोचिंग में मौजूदगी से इनकार कर दिया. छात्र जितेंद्र बंशीवाल कहते हैं, ‘मैं कॉलेज का छात्र ही नहीं था.
1 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
क्लास में जाने का सवाल ही नहीं उठता.’ एलएलबी की छात्रा मंजु फतरोड़ ने भी शपथ पत्र देकर क्लास में उपस्थिति से इनकार किया. छात्र नेता बबलू खिची कहते हैं, ‘क्लासेज कागजों पर ही लग गईं. कभी-कभी नियमित क्लास को ही विशेष क्लास घोषित कर दिया जाता है जबकि नियमानुसार विशेष क्लास नियमित क्लास से पहले या बाद में ही लग सकती है.’
25 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
दरअसल, कॉलेज में सुबह 8 से 3 बजे तक नियमित क्लास लगती हैं. लेकिन आरटीआइ में दी गई जानकारी में कोचिंग क्लास का टाइम सुबह 10 से 12 बजे का बताया गया है. इसके लिए 24 प्रोफेसरों को मानदेय देने की जानकारी भी दी गई जबकि उस समय वे नियमित क्लास के लिए वेतन ले रहे थे. कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एल.एन. वर्मा कहते हैं, ‘नियमित क्लास के समय कोचिंग क्लास नहीं होती.’ लेकिन यह बताने पर कि आरटीआइ में मिली जानकारी के मुताबिक ये क्लास नियमित क्लास के समय ही चल रही थीं तो उन्होंने कहा, ‘प्रोफेसर्स के उपलब्ध होने पर क्लास लगा दी गई होगी.’ दरअसल, रेमेडियल कोचिंग योजना के तहत नियमित क्लास से पहले या बाद में अतिरिक्त क्लास लगाई जा सकती हैं. इनके लिए प्रोफेसरों को एक पीरियड के 250-300 रु. और स्कॉलर्स को 150-200 रु. मिलते हैं.
18 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखिए इंडिया टुडे
क्लास का समय ही नहीं, दिन भी कई सवाल खड़े करते हैं. दस्तावेजों के मुताबिक, 11 मार्च, 2009 को होली के दिन शोधार्थी सीमा जैन और प्रो. बी.एल. शर्मा ने क्लास ली. 14 अप्रैल, 2009 को अंबेडकर जयंती पर अरुणा सेठी, बी.एल. शर्मा, विशाल शर्मा और सीमा जैन ने क्लास ली. यही नहीं, 14-18 अप्रैल, 2009 को एक ही कमरा नंबर 19 में दो प्रोफेसरों विशाल शर्मा और बी.एल. शर्मा ने एक ही समय क्लास ली. कॉलेज की मानें तो यूनिवर्सिटी की परीक्षा के समय भी यहां कोचिंग हुई. 24 मार्च, 2009 को जिस कमरे में क्लास होना दिखाया गया वहां एमए और एमकॉम की परीक्षा चल रही थी.
11 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
16 मार्च, 2009 को डॉ. अमिता शाह 11 से 12 बजे तक एडीपीओ की क्लास ले रही थीं जबकि उस समय उनकी ड्यूटी परीक्षा में लगी थी. 15 और 17 दिसंबर, 2008 को जिस समय बीकॉम फर्स्ट ईयर की सेमेस्टर परीक्षा चल रही थी तब प्रिंसिपल खुद पीएससी की क्लास ले रहे थे. छात्र नेता आशीष ठाकुर कहते हैं, ‘लगता है, आरटीआइ आवेदन मिलने पर ताबड़तोड़ जानकारी बनाई गई.’ दस्तावेज बताते हैं कि कोचिंग के संयोजक प्रो. एस.एन. शर्मा को नियत मानदेय से दोगुना पैसा दिया गया. इस तरह एसएसी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों का 7,25,000 रु. का अनुदान हजम कर लिया गया.

