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बढ़ते संक्रमण के बीच मरीजों के लिए बेड की कमी का खतरा

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे टेस्टिंग की संख्या बढ़ रही है संक्रमित मरीजों की संख्या में भी जबरदस्त वृद्धि तर्ज होने लगी है. लॉकडाउन खत्म होने तक मरीजों की संख्या यदि मौजूदा वृद्धि दर देका जाए तो बढ़कर 90 हजार के आसपास जा सकता है. छोटे शहरों में क्योंकि कोविड केयर सेंटर की कमी है इसलिए वहां इस तरह के सेंटर बनाने होंगे.

फोटो साभार-इंडिया टुडे
फोटो साभार-इंडिया टुडे
अपडेटेड 7 मई , 2020

कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. इसकी वजह से छोटे शहरों और कस्बों में कहीं कोविड सेंटर की कमी का खतरा महसूस होने लगा है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने रेलवे को अधिक से अधिक संख्या में ट्रेनों की बोगियों को कोविड केयर सेंटर में बदलने को कहा है.

गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. लॉक डाउन खत्म होने के बाद और बड़ी संख्या में मजदूरों की लौटने की उम्मीद है. ऐसे में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे राज्यों में कोविड केयर सेंटर की कमी का खतरा मंडराने लगा है.

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे टेस्टिंग की संख्या बढ़ रही है संक्रमित मरीजों की संख्या में भी जबरदस्त वृद्धि तर्ज होने लगी है. लॉकडाउन खत्म होने तक मरीजों की संख्या यदि मौजूदा वृद्धि दर देका जाए तो बढ़कर 90 हजार के आसपास जा सकता है. छोटे शहरों में चूंकि कोविड केयर सेंटर की कमी है इसलिए वहां इस तरह के सेंटर बनाने होंगे.

फिलहाल रेलवे ने इस तरह के 5231 रेलवे कोच को बदलकर कोविड केयर सेंटर के रूप में तब्दील कर लिया है. रेलवे के इस सेंटर को राज्यवार उन जगहों पर तैनात किया जा रहा है जहां मौजूदा अस्पतालों में कोविड केयर सेंटर कम संख्या में हैं.

बिहार में 15, उत्तर प्रदेश में 20, पश्चिम बंगाल में 9, ओडिशा में 7, झारखंड में 4 कोविड केयर ट्रेनों को तैनात किया जा चुका है. जिन राज्यों में अभी संक्रमित लोगों की संख्या ज्यादा है उनमें भी कोविड केयर ट्रेनों को तैनात किया है ताकि कोविड सेंटर और बेड की कमी होने पर रेलवे कोविड केयर ट्रेनों का उपयोग किया जा सके.

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