लॉकडाउन भले ही आने वाले कुछ दिनों में खत्म हो जाए लेकिन कोरोना की इस विभीषिका की वजह से जीवन शैली और व्यवहार में भारी बदलाव के आसार हैं. परंपरागत रूप से आचार और व्यवहार में भारी बदलाव की संभावना को देखते हुए भाजपा चुनाव अभियान की वैकल्पिक रूपरेखा तैयार करने में जुट गई है.
पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी राजनीतिक रैली, जनसभा, आंदोलन, चुनाव प्रचार और वोट मांगने के तरीकों में सामाजिक दूरी का ध्यान रखना होगा. क्योंकि परंपरागत रूप से इन गतिविधियों में सामाजिक दूरी का पालन कठिन है.ऐसे में भाजपा टेक्नोलॉजी आधारित प्रचार और जनसभा की तैयारी करने में लगी है.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी जून तक अपनी सभी गतिविधियों को बंद कर दिया है और मौजूदा स्थितियों को देखते हुए शादी, समारोह, अंत्येष्ठि, पूजा-अर्चणा में सिमित संख्या में लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है इसलिए चुनावी गतिविधियों में भी यही स्थिति रहने की संभावना है. बिहार में अक्तूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं. भाजपा अमूमन चुनाव से तीन महीने पहले ही अभियान शुरू करती है इस लिहाज से अगस्त से पार्टी बिहार में चुनाव को लेकर सक्रिय होगी.
भाजपा सूत्रों का कहना है कि, वर्चुअल आधार पर चुनाव अभियान की तरफ भाजपा बढ़ रही है. इसके लिए रैली मैदान में करने की जगह सभागारों में किया जा सकता है, सभागारों के अंदर सामाजिक दूरी का पालन आसान है.
इसके अलावा मोबाइल पर भी पीएम और भाजपा के अन्य नेताओं के चुनाव अभियान को दिखाया जा सकता है. असली मकसद अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाना है और इसे सीधे संवाद की जगह वर्चुअल माध्यम से किया जा सकता है. हालांकि, शुरुआत में यह प्रयोग थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक जीवन में यही व्यवस्था घुलमिल जाएगी.
दूसरी पार्टियों भी इन उपायों को आजमाएगी. लॉक डाउन खत्म होने के बाद भाजपा, चुनाव आयोग से भी इस बारे में चर्चा करेगी और कानूनी प्रावधानों के तहत वर्चुअल चुनाव प्रचार के कुछ अन्य विकल्पों की तलाश भी होगी. भाजपा नेता परोक्ष रूप से यह स्वीकार कर रहे हैं कि, बिहार विधानसभा का चुनाव अभियान इस बार 80 फीसदी वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर ही होगा.
***

