कोरोना संकट ने सचमुच गरीबी का नया मानचित्र दिखाया है. इस मानचित्र में ऐसे गरीब ज्यादा हैं जो रोज न कमाएं तो उनके लिए पेट की भूख को शांत करना मुश्किल है. सरकारी स्तर पर बांटे जा रहे राशन और फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के आंकड़ों पर गौर करें तो ऐसे गरीबों की भी तादाद बड़ी है जो रोज न कमाएं तो उन्हें परिवार के साथ भूखे पेट ही सोना पड़ सकता है. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार लॉकडाउन में फंसे छह लाख प्रवासी मजदूरों की भूख मिटाने का काम कर रही है तो केंद्र सरकार के विशेष राहत पैकेज से भी लाखों गरीबों को राशन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसे तो एक सरकारी आंकड़ों में देखा जा सकता है. लेकिन हजारों ऐसे भी हाथ हैं जो मानवतावादी काम कर रहे हैं. इनके आंकड़े सरकारी आंकड़ों की तरह नहीं मिलते हैं. क्योंकि, ये तो बस नेकी कर दरिया में डाल की राह पर चलते हैं.
बेलापुर (नई मुंबई) स्थित प्रतिभा नलिन ग्रामीण महिला विकास चैरिटेबल ट्र्स्ट के कैप्टन नलिन पांडेय का कहना है, 'मैंने जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाने का काम किया है. मेरे सहयोगी जरूरतमंदों को राशन देते हैं और राशन के पैकेट पर ट्र्स्ट का नाम तक नहीं होता है. यह समाज सेवा है. इसलिए बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और साउथ के हर धर्म के लोगों को राशन देकर सहयोग किया गया है. इसके लिए पोस्टर या बैनर लगाकर प्रचार पाना सही नहीं है.'
कोरोना की वजह से लॉकडाउन के दौरान गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और किसानों पर मुसीबतों के पहाड़ टूटे हैं. केंद्र और राज्य सरकार ने इनका ख्याल जरूर रखा है. लेकिन इनके लिए जो राहत पैकेज तैयार किए गए हैं उसको लेकर पक्ष और विपक्ष की राजनीति भी चलती रहती है और वे अपने वोट बैंक के लिए फोटो खिंचाकर और अपने लोगों को खुश करके सबूत जमा करते हैं.
अब देखिए, राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने 17 दिनों (1 से 17 अप्रैल 2020) का जो आंकड़ा पेश किया है उसके मुताबिक 1 करोड़ 43 लाख 626 राशन कार्ड धारकों को 49 लाख 86 लाख 365 हजार क्विंटल अनाज बांटे गए हैं. राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत अंत्योदय और प्राथमिकता पारिवारिक लाभार्थियों के रूप में दोनों राशन कार्डों में पात्र लाभार्थियों की संख्या लगभग 7 करोड़ है. इन लाभार्थियों को 52 हजार 425 सस्ते अनाज की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ मिलता है. लेकिन अब भी ऐसे लोग हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं. उन्हें राशन कैसे मिलेगा यह बड़ा सवाल है.
यह तो सरकारी बात हो गई. अब राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा की बात जाए तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील के मुताबिक इस कोरोना संकट के दौरान पार्टी की ओर से राज्य के अब तक 50 लाख लोगों तक राहत पहुंचाया गया है. गरीबों और जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने में राज्य सरकार या भाजपा ही नहीं हैं बल्कि महा विकास आघाड़ी सरकार में शामिल शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस भी हैं.
इनके अलावा उद्योगपतियों, फिल्मवाले, गैरराजनीतिक संगठनों, रेलवे और एनजीओ की ओर से भी राहत कार्य चलाए जा रहे हैं. गुरूद्वारों की ओर से लंगर चल रहे हैं. कुछ आम हाथ भी हैं जो मानवता के नाम पर राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे हैं. इन सबके आंकड़े नहीं हैं जिससे गरीबों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के सही आंकड़े मिल जाएं. सहायता के लिए जो आम हाथ हैं उन्हें अपनी पब्लिसिटी की चिंता नहीं है. मुंबई के हॉटस्पॉट धारावी इलाके में अपने खर्च से राहत कार्य करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना संकट में फंसे और जरूरतमंदों की मदद करने से मन को शांति मिलती है. मानवीय कार्य करके पब्लिसिटी क्यों बटोरना.
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