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सुपारी हत्या: जान की कीमत सिर्फ 3 लाख रु.

किसी शहला या किसी जे. डे को सस्ते में मौत के घाट उतारा जा सकता है. शूटरों की भरमार से हत्या करने की सुपारी सस्ती हुई.

अपडेटेड 2 अप्रैल , 2012

मुबारक हो, घर के सामने काम हो गया. बिल्डर साकिब अली ने 16 अगस्त, 2011 को भोपाल की आरटीआइ कार्यकर्ता शहला मसूद की हत्या होने के बाद यही कहा था. हत्या को अंजाम देने के लिए बिचौलिए साकिब को उत्तर प्रदेश के तीन पक्के निशानेबाजों, एक बाइक और .32 बोर की पिस्तौलों की व्यवस्था करनी पड़ी थी. हत्या की लागतः महज 3 लाख रु. जिसका भुगतान मुख्य षड्यंत्रकारी कही जाने वाली 36 वर्षीया जाहिदा परवेज ने किया था.

रामगोपाल वर्मा ने मुंबई के अपराध जगत पर कंपनी फिल्म बनाई थी जो 2002 में रिलीज हुई थी. इसमें नृशंस हत्या के लिए सुपारी लेने-देने को फिल्मी अंदाज में दिखाया गया था. अब वह ट्रेंड बड़े परदे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी आ गया है. दाऊद इब्राहिम ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और इर्दगिर्द के इलाकों से युवकों को नियुक्त किया था.

वे मुंबई पहुंचकर बड़ी सफाई से हत्या करके लापता हो जाते थे. लेकिन सुपारी पर होने वाली हत्या के मामलों में भारी बढ़ोतरी से शार्पशूटरों की आउटसोर्सिंग के नए ठिकाने सामने आए हैं. मसलन, कानपुर, जहां से साकिब के शार्पशूटर आए थे, और बिहार के मधेपुरा में झिटकिया, जहां से पश्चिम बंगाल के कपड़ा व्यापारी हीरा अंसारी के हत्यारे राजू देबशर्मा को पकड़ा गया था. कुछ स्थानीय रंगरूट भी होते हैं, जैसे चेन्नै के आरटीआइ कार्यकर्ता एस. भुवनेश्वरन की 2011 में हुई हत्या के मामले में संदेह है.

देशभर की राज्य पुलिस सुपारी किलर्स की अलग फाइल नहीं बनाती, जिससे सुपारी की कीमतों में होने वाले बदलाव, हत्या के तौर-तरीकों और इस्तेमालशुदा हथियारों के बारे में पता लगाना मुश्किल हो जाता है. संभावित सुपारी किलर्स प्रायः हिस्ट्रीशीटर होते हैं. मसूद के मामले में पकड़े गए शार्पशूटर इरफान के खिलाफ कानपुर और इर्दगिर्द के थानों में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. कानपुर स्थित मूलगंज के एक कपड़ा व्यवसायी का बेटा इरफान हेरोइन का सप्लायर भी था.

सुपारी किलर्स अकसर गरीब होते हैं. छोटा राजन गिरोह के लिए मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे को खत्म करने वाले सतीश कालिया को पैसों की जरूरत थी क्योंकि स्लम रिहेबिलिटेशन अथॉरिटी ने सांताक्रूज (ईस्ट) में गोलीबार स्थित उसके अवैध मकान को तोड़ दिया था. कालिया ने अपना सामान बांधा और केरल में अपने गृहनगर तिरुअनंतपुरम के लिए रवाना हो गया. लेकिन राजन ने अपने 'टॉरगेट' को खत्म करने के लिए कथित रूप से उसे कॉल किया और वापस मुंबई बुला लिया.

अब 'रिटायर' हो चुका पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक सुपारी किलर अपराध जगत में इस तरह की हत्या के सौदों की अंदरूनी जानकारी देता हैः ‘गैंगस्टर हथियार चलाने में माहिर लोगों को लाने के लिए बिचौलिए भेजते हैं. फिर वे लोग दूसरे शार्पशूटरों को लाते हैं जिसके लिए उन्हें कमीशन मिलता है. बिचौलियों को हत्या में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की व्यवस्था करनी पड़ती है. वे हथियारों की व्यवस्था अमूमन बिहार के मुंगेर से करते हैं जो अवैध हथियारों के लिए कुख्यात है. सारी योजना, यहां तक कि कितने राउंड गोली चलानी है, इस पर भी पहले ही बात कर ली जाती है. भाड़े का हत्यारा पूर्व योजना के मुताबिक हत्या को अंजाम देता है.’

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की सुमिता सरकार और अरविंद तिवारी ने 2000 में 'कॉम्बैटिंग ऑर्गेनाइज्ड क्राइमः अ केस स्टडी ऑफ मुंबई सिटी' नामक अध्ययन किया था. इसके मुताबिक, लगभग 60 फीसदी शार्पशूटर 35 वर्ष से कम उम्र के होते हैं और उनमें से 96 फीसदी ने 12वीं से ज्यादा की पढ़ाई नहीं की होती है. अध्ययन में कहा गया है, ‘शार्पशूटिंग में दीक्षा के लिए कोई अनुष्ठान नहीं किया जाता. शार्पशूटर बनने का इच्छुक व्यक्ति अपनी मानसिक क्षमता को जांचने के लिए किसी अपराध में शामिल हो जाता है.’

हत्या की साजिश अकसर लंबी-चौड़ी होती है. इसके तहत, टॉरगेट के कार्यस्थल, घर और उसकी गतिविधियों पर कई दिनों तक नजर रखी जाती है. बिचौलिया साकिब, भाड़े का हत्यारा इरफान और उसके दो सहयोगी शानू तथा सलीम भोपाल में मसूद की हत्या करने से पहले तीन दिनों तक उनके कोह-ए-फि.जा घर के इर्दगिर्द टोह लेते रहे.

रायगंज में अंसारी की सुपारी पर हुई हत्या के बिचौलिए राजू चौधरी ने हत्यारे देबशर्मा की मदद के लिए 25,000 रु. में तीन स्थानीय युवकों की सेवा ली थी. कालिया जून, 2011 के शुरू में राजन के एक सहयोगी से स्लोवाकिया निर्मित रिवॉल्वर लेने के लिए नैनीताल गया था. मुंबई वापस आकर उसने डे के दफ्तर और घर की अच्छी तरह टोह ली. राजन के सहायक विनोद असरानी ने 10 जून को मुलुंड के एक बार में डे की शिनाख्त करने में कालिया की मदद की थी. अगले दिन कालिया ने डे के पवई स्थित घर के बाहर ही उनके शरीर में तीन गोलियां उतार दीं.

काम हो जाने पर भाड़े का हत्यारा बिचौलिये  से मिलता है, अपना पैसा लेता है और भूमिगत हो जाता है. कालिया और उसके छह सहयोगी हत्या के बाद महाराष्ट्र में शिरडी, शोलापुर तथा सांगली, गुजरात में पावागढ़, कर्नाटक में बीजापुर और तमिलनाडु में मदुरै तथा रामेश्वरम की 'तीर्थयात्रा' पर निकल गए थे.

भाड़े पर हत्या की कीमत पर अकसर दोबारा समझैता होता है, खास तौर पर उस समय जब नई जानकारी सामने आती है. कालिया जब डे के बारे में नहीं जानता था तो वह उनकी हत्या के लिए 2 लाख रु. पर तैयार हो गया था. लेकिन जब उसने टीवी पर देखा कि उसका शिकार जाना-माना पत्रकार है तो उसने कीमत बढ़ाकर 5 लाख रु. कर दी.

मद्रास हाइकोर्ट के फौजदारी वकील वी. बालू भी संकेत करते हैं कि आधुनिक उपकरणों के आने से सौदे भी अलग तरीके से होने लगे हैं. वे कहते हैं, ‘भाड़े के हत्यारे को बिचौलिए के साथ समझैते के लिए सामने मौजूद रहने की जरूरत नहीं है. इसके लिए 3जी फोन पर्याप्त है. पैसे को किसी बैंक में जमा करवा दिया जाता है या हवाला चैनलों के जरिए हत्यारे को भिजवा दिया जाता है.’

कीमत शहर और जोखिम के अनुसार बदलती रहती है. उत्तर प्रदेश में एक जान की कीमत मात्र  50,000 रु. और 5 लाख रु. के बीच है जबकि तमिलनाडु में न्यूनतम कीमत 10,000 रु. है. पश्चिम बंगाल में 14 दिसंबर, 2010 को हुई अंसारी की हत्या के लिए  देबशर्मा को मात्र 50,000 रु. दिए गए थे.

बहरहाल, उत्तर प्रदेश और बिहार शार्पशूटरों के गढ़ हैं. मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) देवेन भारती कहते हैं, ‘गैंगस्टरों के लिए स्थानीय शूटरों से भाड़े पर काम लेना मुश्किल हो गया है, इसलिए वे इन राज्यों से शूटर बुलाते हैं.’ उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक के.एल. गुप्त कहते हैं, ‘खासकर पूर्वी जिलों में युवकों की बेरोजगारी प्रमुख कारक है.’

मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के शार्पशूटरों को दिल्ली में हत्या के लिए 5,000 रु. मिलते हैं जबकि मुंबई में उन्हें 15,000 रु. मिलते हैं. जिंदगी की कीमत घटती जा रही है. उसी अधिकारी का कहना है, ‘मुंबई के गैंगस्टर एक हत्या के लिए 25 लाख रु. तक मांगा करते थे. लेकिन अब बेहतर हथियारों के कारण किसी शूटर को टॉरगेट के बहुत करीब तक जाने की जरूरत नहीं रह गई है. इसलिए पकड़े या जवाबी हमले में मारे जाने का जोखिम कम हो गया है. अब वे 1 लाख रु. में भी हत्या करने के लिए तैयार हो जाते हैं.’

-साथ में किरण तारे, आशीष मिश्र, अनूप दत्ता, पार्थ दासगुप्त, सुरेंद्र तिवारी और आर. रामसुब्रमण्यम

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