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कांग्रेस का सबक सीखने से इनकार

अगले साल पांच राज्‍यों में चुनाव के मद्देनजर हाल के उपचुनावों में चारों सीटों पर कांग्रेस की पराजय उसके लिए बुरी खबर है

कुलदीप बिश्नोई
कुलदीप बिश्नोई
अपडेटेड 23 अक्टूबर , 2011

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि हिसार लोकसभा उपचुनाव के मतों की गिनती हरियाणा के एक स्थानीय बॉक्सिंग हॉल में हुई. कांग्रेस अभी अपनी नाक से बहते खून को रोक नहीं पाई है. देश में हुए उपचुनाव में उसके खिलाफ 4-0 का नतीजा सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक कठोर संदेश है.
लेकिन वह अभी भी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है, उसका कहना है कि उपचुनाव से पहले उनमें से कोई सीट उसके पास नहीं थी. आत्ममंथन की कोई कोशिश नहीं हुई. नुक्सान का आकलन करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की कोई बैठक नहीं बुलाई गई, न ही विश्लेषण करने के लिए पार्टी के शीर्ष समूह की बैठक हुई.
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कांग्रेस महासचिव बी.के. हरिप्रसाद का कहना है कि हार ''अप्रत्याशित नहीं थी.'' उसके उम्मीदवार जयप्रकाश की हिसार में जमानत जब्त हो गई. अन्य जगहों पर भी यही कहानी दोहराई गई (देखें बॉक्स). राकांपा प्रमुख शरद पवार ने यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2जी घोटाले ने कलंकित कर दिया. उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में एक मजबूत केंद्र सरकार का होना जरूरी है. लेकिन ऐसा नहीं लग रहा है.''
कांग्रेस के लिए आगे काफी कठिन चुनावी जंग है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं. गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सत्ता में है. खनन घोटाले में फंसे गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामत सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेता स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की कोशिश के बावजूद   हद से हद वहां 60 सीटें मिल सकती हैं. पंजाब में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (बादल)-भाजपा गठबंधन कड़ी चुनौती दे रहा है. उत्तराखंड में पार्टी को अभी तक नारायणदत्त तिवारी के स्थान पर कोई नेता नहीं मिला है.
हिसार की जीत से उत्साहित, टीम अण्णा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ  प्रचार शुरू कर चुकी है. टीम के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल का कहना है, ''हिसार का नतीजा जन लोकपाल विधेयक पर एक जनमत संग्रह है.
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कांग्रेस को हार से सबक लेना चाहिए.'' विजयी उम्मीदवार हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के नेता कुलदीप बिश्नोई इसे श्रेय देने को तैयार नहीं है. उन्होंने साफ कहा, ''मैं अपने पिता की विरासत की वजह से जीता हूं.''
हालांकि व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस नेता इस बात से सहमत हैं कि टीम अण्णा ने बिश्नोई को चुनाव नहीं जिताया है लेकिन उन्होंने कांग्रेस की हार तय कर दी थी. चुनाव में महंगाई और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दे थे. एक प्रमुख नारा था 'पेट्रोल महंगा, डीजल महंगा लेकिन भ्रष्टाचार सस्ता'.
पार्टी के एक महासचिव स्वीकार करते हैं, ''जो थोड़े से वोट कांग्रेस को मिले वे मुख्यमंत्री की साख के कारण मिले. हिसार में वीरान पड़े कांग्रेस भवन में 'क्के की गुड़गुड़ाहट गूंज रही थी.'' कांग्रेस नेता कैलाश जांगड़ा का कहना है, ''अण्णा ने जब प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया तब हम उनके खिलाफ दलील नहीं दे सके.''
कांग्रेस अण्णा के असर को कमतर आंकने की कोशिश कर रही है. केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने आरटीआइ कार्यकर्ता अखिल के तरुण गोगोई सरकार के खिलाफ  प्रचार का जिक्र करते हुए कहा, ''पिछले वर्ष असम चुनाव के दौरान क्या हुआ जब अखिल गोगोई अण्णा हजारे के साथ यहां-वहां घूम रहे थे? वे समझ रहे थे कि उन्होंने हमें पूरी तरह हरा दिया है. लेकिन कुछ और ही हुआ.''
मनमोहन सिंह सरकार मुसीबतों से जूझ रही है और कांग्रेस पार्टी दिशाहीन दिखाई दे रही है. ऐसे में बचे रहने के लिए कोई मजबूत रणनीति नहीं दिखाई दे रही है.
-प्रिया सहगल, शफी रहमान, अमिताभ श्रीवास्तव और अमरनाथ के. मेनन

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