इधर कांग्रेस दिल्ली की गद्दी बचाने में जुटी रही, उधर आंध्र प्रदेश में उसकी जमीन खिसक गई. 15 जून को जब आंध्र विधानसभा की 18 और लोकसभा की एक सीट के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आए तो बागी राजकुमार जगन मोहन रेड्डी की वाइएसआर कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की. इन नतीजों ने यह भी दिखा दिया कि कांग्रेस दिल्ली की जिस गद्दी के मोहपाश में जकड़ी हुई है, उसका तख्त हैदराबाद में ढह चुका है और पार्टी न चेती तो दिल्ली का ताज उछलते देर नहीं लगेगी.
चुनाव नतीजों के बाद समर्थक जब हैदराबाद की सड़कों पर जश्न मना रहे थे, तब आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बैठे जगन भविष्य के जलसे की तस्वीर बना रहे थे. 2003 से 2011 के बीच आठ साल में अपनी संपत्ति को 36 लाख रु. से 356 करोड़ रु. यानी 1,000 गुना तक बढ़ाने वाले जगन सीबीआइ की नजर में संदिग्ध भ्रष्ट हैं, लेकिन जनता की नजर में वे ऐसे चहेते राजकुमार बन गए हैं, जिसका राजपाट पिता वाइ. एस. राजशेखर रेड्डी की अकाल मौत के बाद किसी साजिश के तहत छीन लिया गया हो.
जगन को इस साल 27 मर्ई को तब सीबीआइ ने गिरफ्तार कर लिया जब वे पूरी तरह चुनाव प्रचार में जुटे हुए थे. जगन की गैरमौजूदगी में उनकी मां वाइएस विजयम्मा और बहन शर्मिला ने प्रचार की कमान संभाली. दोनों महिलाओं ने चुनाव प्रचार में सबसे ऊपर यही मुद्दा रखा कि कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) जगन को निशाना बना रही हैं. जिस तरह से परिणाम सामने आए, उसमें उनकी रणनीति कारगर नजर आ रही है.
तय कार्यक्रम के मुताबिक आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2014 में होने हैं. लेकिन जिस तरह से उपचुनाव में जगन की पार्टी ने न सिर्फ कांग्रेस को बल्कि विपक्षी टीडीपी को करारा झ्टका दिया है, उसके चलते यह तारीख कुछ और करीब आ जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी. वैसे भी जगन के पक्ष में आने वाले कांग्रेस नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है.
जिन 18 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव कराना पड़ा उनमें से 16 सीटें इसलिए खाली हुई थी, क्योंकि इनके कांग्रेस विधायकों को जगन के खेमे में आने के कारण विधानसभा की सदस्यता खोनी पड़ी थी. यही नहीं जगन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद कांग्रेस के दो और विधायक इस्तीफा दे चुके हैं.
अब तक के घटनाक्रम से एक बात साफ है कि जगन अपनी जमीन बचाने में कामयाब रहे हैं, क्योंकि जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, वे पहले से ही उनके समर्थकों के कब्जे में थीं. जगन की असल परीक्षा तब होगी जब वे विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में कांग्रेस को चुनौती दे रहे होंगे. लेकिन पूत के पांव बता रहे हैं कि दक्षिण में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता का बेटा, पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा खतरा बन गया है.

