महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बड़े करीने से खुद को गरीबों के मसीहा के रूप में स्थापित कर लिया है. राज्य मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी को झुग्गी-झेपड़ी में रहने वाले ऐसे 40 लाख लोगों को मुफ्त में मकान देने का फैसला किया जो 1995 के पहले से मुंबई में रह रहे हैं. 65 वर्षीय मुख्यमंत्री ने उसी दिन ऐसी खाद्य-वितरण योजना की भी घोषणा की जिसके तहत सरकार राज्य के गरीबों के दरवाजे पर अनाज पहुंचाएगी.
अगले दिन उन्होंने एशिया की दूसरी सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी के लिए पुनर्विकास योजना को अंतिम रूप दिया. इस योजना के तहत वहां रह रहे 60,000 परिवारों में प्रत्येक को 300 वर्गफुट का मकान आवंटित किया जाएगा. चूंकि मुंबई की 55 फीसदी जनसंख्या झुग्गी-झोपड़ी में रहती है इसलिए जाहिर तौर पर चव्हाण को वोट बैंक नजर आ रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग ने 5 जनवरी को 27 जिला परिषदों और मुंबई सहित 10 नगर निगमों के चुनाव की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने धारावी के निवासियों को मुफ्त आवास की घोषणा चुनाव आयोग के फैसले से महज तीन घंटे पहले की.
परंपरागत रूप से कांग्रेस के समर्थक रहे शहरी मध्यवर्ग के हिस्से कुछ नहीं आया. महाराष्ट्र सरकार का रेडी रेकनर दर को 10-30 फीसदी बढ़ाने का फैसला मुंबई में मकान के दामों को बढ़ा देगा जहां जमीन-जायदाद की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं. मकान खरीदते समय लगे स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क पर आधारित यह दर बढ़ा दी गई है.
इंडियन मर्चेंट्स चैंबर की रियल एस्टेट कमेटी के 50 वर्षीय अध्यक्ष सुनील मंत्री इस मामले में चव्हाण के हस्तक्षेप की मांग करते हैं जबकि उपभोक्ता मंच अदालत जाने का इरादा बना रहे हैं. स्टैंप ड्यूटी ऐंड रजिस्ट्रेशन पेअर्स एसोसिएशन के 52 वर्षीय अध्यक्ष विनोद संपत का कहना है, ''हम सरकार से फरियाद करेंगे और सकारात्मक नतीजा न निकलने पर रिट याचिका दाखिल करेंगे.'' चव्हाण ने मुंबई में डेवलपमेंट कंट्रोल रूल्स (डीसीआर) को भी संशोधित कर दिया है और बिल्डरों पर नई पाबंदियां लगा दी हैं.
नए नियमों के मुताबिक, फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआइ) की गणना में अब बालकनी और टेरेस के क्षेत्र की भी गणना की जाएगी. एफएसआइ कुल भूखंड क्षेत्र और निर्मित क्षेत्र के बीच का अनुपात होता है. 38 वर्षीय आर्किटेक्ट आरिफ नूरानी कहते हैं, ''बिल्डर यह लागत ग्राहकों से वसूल करेंगे.'' चव्हाण का कहना है कि ये संशोधन पारदर्शिता लाएंगे. वे भरोसा दिलाते हैं कि ''यह संशोधन भ्रष्टाचार निवारण की दिशा में उठाया गया कदम है.''
भाजपा ने उनके प्रयासों की आलोचना की है. भाजपा के विनोद तावड़े का कहना है, ''ये फैसले कांग्रेस समर्थक बिल्डरों के दबाव में लिए गए हैं.'' मगर चव्हाण का कहना है कि हमने बिल्डरों से राय-मशविरे के बाद ही नियमों में बदलाव किए हैं. भाजपा के एक शीर्ष पदाधिकारी के अनुसार, उनकी पार्टी कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों में लंबे समय से सबसे बेदाग छवि वाले चव्हाण की छवि को नुकसान पहुंचाना चाहती है. क्या अपने मध्यवर्गीय समर्थकों की कीमत पर शहरी गरीबों को रिझाने की चव्हाण की चाल कामयाब हो पाएगी? इसका पता 17 फरवरी को चल पाएगा जब नगर निगमों के चुनावों के नतीजे आएंगे.

