राजधानी दिल्ली के निकट भट्टा और पारसौल गांवों के बीचोबीच देश का सबसे विवादास्पद राख का ढेर सुलग रहा है. आग में झुलसी हुई घास और जले हुए प्लास्टिक की निगरानी पसीने से तरबतर उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान कर रहे हैं.
कुछ हड्डियों को फॉरेंसिक टीम जांच के लिए ले गई है. लेकिन न तो वे हड्डियां और न ही राख का ढेर सामूहिक हत्या की उस भयावह घटना की पुष्टि करता है, जिसकी तस्वीर इसके एक दिन पहले कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने पेश की थी.
गांववालों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करने के बाद राहुल ने पत्रकारों को बताया, ''वहां घोर जुल्म हुआ है. राख की 74 ढेरियां हैं, जिनमें शव जलकर राख हुए हैं. गांव में हर कोई यह जानता है. हम आपको तस्वीरें दे सकते हैं. महिलाओं से बलात्कार हुए, लोगों को पीटा गया. घर नेस्तनाबूद कर दिए गए.''
जमीन के मुआवजे को लेकर चार माह से चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन ने 7 मई को हिंसक रूप ले लिया. दो पुलिसवाले मारे गए और ग्रामीणों की ओर से कथित फायरिंग में जिला मजिस्टे्रट घायल हो गए. इसके बाद पुलिस की गोली से चार ग्रामीण मारे गए.
गांववालों का कहना है, पुलिस निरंकुश हो गई थी और उसने पूरी क्रूरता के साथ लाठियां बरसाईं और संपत्ति को आग के हवाले किया. एक हफ्ते बाद गांधी परिवार का यह वंशज पुलिस घेरेबंदी को धता बताकर मोटरसाइकिल से गांव में पहुंच गया.
दो साल पहले ग्रामीणों ने मथुरा होते हुए आगरा से नोएडा के बीच बनने वाले यमुना एक्सप्रेस हाइवे के लिए अपनी जमीन बेची थी. पर हाल ही में वे ज्यादा मुआवजे की मांग करने लगे. इससे जो आंदोलन शुरू हुआ, उसका अंत 7 मर्ई की दर्दनाक घटनाओं में हुआ.
सामूहिक हत्याकांड की अफवाहों से प्रेरित होकर राहुल के कार्यालय ने हिंसा और हड्डियों से युक्त राख के ढेर की तस्वीरें भेजीं. पर गांव में कोई ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बता सका, जिसे गोली लगी हो या जिससे बलात्कार हुआ हो. यहां तक कि जो लोग पुलिस के डर से गांव छोड़कर भाग गए थे, वे भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं.
हालांकि भट्टा-पारसौल नंदीग्राम नहीं है, फिर भी कांग्रेस को लगा कि यह मायावती सरकार पर हमला करने के लिए बेहतरीन अवसर है. इस पूरे घटनाक्रम पर से परदा उठने की आशंका से कांग्रेस 48 घंटों के भीतर ही नुकसान की भरपाई करने की मुद्रा में आ चुकी थी.
कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा, ''मैं राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. अगर वहां हड्डियां हैं तो आप उनकी गिनती करने के फेर में मत पड़िए. यह पता करिए कि वह किस तरह के हमले और लूटपाट की घटना थी.'' उन्होंने आगे कहा, ''वहां तकरीबन 70 फुट घेरे में राख का ढेर था.
मुझे नहीं पता कि 70 कैसे 74 हो गया और राख की जगह मृत शरीर कहां से आ गए.'' वह ढेर दरअसल 7 फुट चौड़ा है, लेकिन सियासी फायदों के लिए छिड़ी जंग में ये तथ्य बेमानी हो जाते हैं. उसे हमेशा एक ऐसी जगह के रूप में याद रखा जाएगा, जहां गांधी के वंशज ने उत्तर प्रदेश चुनावों में अपना हित साधने के लिए खुलेआम निशान साधा था, लेकिन अफसोस यह है कि वह उलटा पड़ गया.

