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किताबें/पत्रकारिता: टीवी रिपोर्टिंग के उम्दा सूत्र

अब वैसे तो टीवी चैनलों में हजारों रिपोर्टर्स होते हैं लेकिन उनमें से चंद नाम ही ऐसे हैं, जो लोगों के दिलों में अपनी गहरी पैठ बना पाए हैं. जबरदस्त प्रतियोगिता के दौर में आज टीवी रिपोर्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह सबसे पहले अपने चैनल में न्यूज ब्रेक करे जो पूरी तरह से विश्वसनीय हो.

अपडेटेड 2 अप्रैल , 2012

स्मार्ट रिपोर्टर
शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन
वाणी प्रकाशन,
दरियागंज,
दिल्ली-2,
कीमतः 295 रु.

अब वैसे तो टीवी चैनलों में हजारों रिपोर्टर्स होते हैं लेकिन उनमें से चंद नाम ही ऐसे हैं, जो लोगों के दिलों में अपनी गहरी पैठ बना पाए हैं. जबरदस्त प्रतियोगिता के दौर में आज टीवी रिपोर्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह सबसे पहले अपने चैनल में न्यूज ब्रेक करे जो पूरी तरह से विश्वसनीय हो. हर रिपोर्टर की यही ख्वाहिश रहती है कि उसे भीड़ से अलग पहचान मिले लेकिन हर कोई सितारा नहीं बन पाता.

वजहः अनुभव और ट्रेनिंग का अभाव. वैसे देश भर में हजारों की तादाद में मीडिया स्कूल खुल गए हैं लेकिन कई स्कूल विद्यार्थियों को प्रायः दिशाहीन बनाकर केवल भ्रमित कर रहे हैं. चौबीसों घंटे के चैनल में संपादकों के पास इतना टाइम नहीं है कि हर खबर पर रिपोर्टर से सलाह-मशविरा कर दिशा-निर्देश कर सकें.

इस दिशा में एक सार्थक पहल की है वरिष्ठ पत्रकार शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन ने स्मार्ट रिपोर्टर किताब लिखकर. किताब में न्यूज से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर रौशनी डाली गई है. इसका सबसे बड़ा फायदा उन युवाओं को होगा जो किसी न किसी मीडिया इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई तो कर रहे हैं लेकिन चैनल की व्यावहारिक कार्यप्रणाली से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं क्योंकि इन संस्थानों में पढ़ा रहे शिक्षकों में कुछ ही ऐसे हैं जिन्होंने खुद किसी न्यूज चैनल में काम किया है या कर रहे हैं.

प्रायः देखने में आता है कि इंटर्नशिप के लिए आने वाले विद्यार्थी न्यूज रूम में आने के बाद अवाक्‌ रह जाते हैं क्योंकि उन्होंने संस्थान में जो पढ़ा और चैनल में जो देख रहे हैं, उसमें वे कोई तालमेल नहीं बिठा पाते.

इन्हीं सब सवालों के जवाब स्मार्ट रिपोर्टर में न केवल मीडिया के विद्यार्थियों बल्कि इस क्षेत्र से जुड़े पत्रकारों को भी मिलेंगे. लेखक शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन वर्षों से न्यूज चैनल में हैं. इसीलिए किताब के कलेवर में इन्होंने अपने समग्र अनुभवों को समेटा है.

सत्रह खंडों की इस किताब में खबर को रिपोर्ट का रूप देने के तमाम चरणों का विस्तारपूर्वक वर्णन है. छोटी-से-छोटी बात भी किसी रिपोर्ट को दर्शकों तक पहुंचाने में कितनी मददगार साबित होती है, खबर कवर करने के लिए दफ्तर से निकलने से लेकर टीवी पर दिखाए जाने तक की प्रक्रिया का महत्व यह किताब दर्शाती है.

खबर का स्त्रोत क्या है, उसकी विश्वसनीयता कैसे जानी जाए, दमदार स्क्रिप्ट कैसे लिखी जाए, पीटीसी क्या है और खबर को स्टोरी बनाकर कैसे संपादित किया जाए, रिपोर्टिंग करते हुए कैमरे का प्रयोग प्रभावशाली ढंग से कैसे हो, ये सभी जानकारियां रिपोर्टर को इस किताब से मिलेंगी.

तकनीकी तौर पर इस किताब का फायदा न्यूज चैनल्स में काम कर रहे रिपोर्टर्स को भी मिलेगा. रिपोर्टिंग की वे बेसिक बातें जो अरसे तक काम करने के बाद भी पता नहीं चल पातीं, रिपोर्टिंग के वे अति आवश्यक तत्व जो रिपोर्ट का हिस्सा नहीं बन पाते, यह किताब बताती है. किताब में एक अच्छे रिपोर्टर को होमवर्क की महत्ता से अवगत कराया गया है. रिपोर्टिंग की विस्तृत जानकारी के अलावा किताब में टीवी न्यूज में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को एक अलग खंड में शामिल किया गया है.

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