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केरल के कार्डिनल या इटली के वफादार?

भारत के कैथलिक चर्च प्रमुख ने केरल के मछुआरों की हत्या का कथित समर्थन कर प्रतिष्ठा दांव पर लगाई.

कार्डिनल एलेनचेरी
कार्डिनल एलेनचेरी
अपडेटेड 26 फ़रवरी , 2012

अभी इसी 18 फरवरी को 66 वर्षीय मेजर आर्चबिशप जॉर्ज एलेनचेरी को वेटिकन में पोप बेनेडिक्ट 16वें ने एक सादे समारोह में कार्डिनल का दर्जा दिया था. इसी के साथ भारत के सबसे बड़े और सबसे ज्‍यादा पैसे वाले केरल के साइरो-मालाबार कैथलिक चर्च के प्रमुख एलेनचेरी 213 कार्डिनलों के उस विशिष्ट समूह का हिस्सा बन गए जिसे 84 वर्षीय पोप के उत्तराधिकारी का चुनाव करना है. लेकिन इसके तीन दिन बाद ही एलेनचेरी और 37 लाख सदस्यों वाले उनके चर्च पर गंभीर आरोप लग गए हैं. सवाल उठा है कि वे अपने देश और लोगों के प्रति ज्‍यादा वफादार हैं या इटली के?

वेटिकन की आधिकारिक समाचार एजेंसी एजेंजिया फिदेस को रोम में दिए एक इंटरव्यू में उनकी टिप्पणियों को लेकर बवाल उठा है. उन्होंने केरल के तटवर्ती इलाके में दो भारतीय मछुआरों को इतालवी तेल टैंकर पर सवार सुरक्षा बलों के कथित तौर पर गोली मारने के संबंध में बयान दिया था. घटना 16 फरवरी की थी और टैंकर का नाम था एनरिका लेक्सी. इंटरव्यू में एलेनचेरी ने कहा था, ‘मैं केरल के कैथलिक मंत्रियों के संपर्क में हूं और रहूंगा. उम्मीद करता हूं कि वे हालात सामान्य करने की कोशिश करेंगे. मुझे खासकर पर्यटन मंत्री कैथलिक के.वी. थॉमस पर भरोसा है, जिन्होंने पिछले दिनों रोम में हुई बैठक में हिस्सा लिया था. उन्होंने मुझे अधिकतम प्रयास का आश्वासन दिया है.’ एजेंसी ने एलेनचेरी के हवाले से बताया, ‘कैथलिक मछुआरों के मारे जाने की सूचना मुझे मिली. यह बेहद दुखद है. मैंने तुरंत केरल के कैथलिक मंत्रियों से संपर्क करके कहा कि सरकार जल्दबाजी में कोई कार्रवाई न करे. इस मामलें में हालांकि कुछ गलतियां भी हुईं. मछुआरों को समुद्री डकैत मान लिया गया था, लेकिन यहां मामला दूसरा है. लगता है कि विपक्षी दल इस स्थिति का फायदा उठाना चाहता है और 'पश्चिमी ताकतों' व 'अमेरिकी वर्चस्व' के नाम पर चुनावी उद्देश्यों के लिए इसका दोहन करना चाहता है.’

केरल की 3.3 करोड़ की आबादी में ईसाई 19 फीसदी हैं और यह काफी ताकतवर समुदाय है. लैटिन कैथलिक और साइरो-मालाबार चर्च कैथलिक पंथ के प्राचीन संस्थान हैं. केरल में सबसे ज्‍यादा संख्या में डायोसीज हैं, जहां 29 जिले एक बिशप की देखरेख में आते हैं. इनकी राजनैतिक ताकत भी अच्छी-खासी है. 37 लाख धर्मावलंबियों के साथ साइरो-मालाबार चर्च राज्‍य की सबसे अमीर धार्मिक संस्था है. यह सबसे ज्‍यादा विदेशी अनुदान पाने वाली संस्था भी है जिसकी परिसंपत्तियों का मूल्य 1,000 करोड़ रु. से भी ज्‍यादा है. इसका आर्थिक साम्राज्‍य इसके चलाए जा रहे 5,000 से ज्‍यादा स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों के बल पर खड़ा है.

आर्चबिशप के कथित बयानों पर इसलिए बवाल मचा है क्योंकि केरल के ज्‍यादातर मछुआरे-इनमें दो मारे गए मछुआरे शामिल- लैटिन कैथलिक चर्च का हिस्सा हैं. केरल इन हत्याओं से सकते में है. राज्‍य की पुलिस ने हत्या के आरोप में दोनों नाविकों को गिरफ्तार कर जहाज भी जब्त कर लिया है. इटली के अधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि आरोपियों पर मुकदमा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ही चलाया जा सकता है. न सिर्फ नेताओं बल्कि मछुआरों के संगठनों और यहां तक कि लैटिन कैथलिक चर्च के सदस्यों ने भी कार्डिनल के कथित बयानों पर निराशा जताई है.

कार्डिनल ने केंद्रीय कृषि और खाद्य राज्‍यमंत्री के.वी. थॉमस को भी विवाद में खींच लिया है. एलेनचेरी को वेटिकन में कार्डिनल की पदवी दिए जाते वक्त वे भी वहां मौजूद थे. मंत्री ने हालांकि इस मसले पर कार्डिनल से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है, ‘हम दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं.’

इटली के विदेश उपमंत्री स्टिफान डी. मिस्तुरा 22 फरवरी को नई दिल्ली आए और उन्होंने विदेश राज्‍यमंत्री प्रणीत कौर से इस घटना के लिए खेद भी जताया. मंत्री ने कहा कि वे केरल जाकर मारे गए मछुआरों के परिजनों से भी खेद जताएंगे. बैठक में मौजूद एक अधिकारी के मुताबिक, मिस्तुरा ने कहा कि दोनों आरोपियों पर इटली के या अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. कौर ने इसके जवाब में उनसे कहा कि दोनों पर भारतीय कानून के तहत मुकदमा चलेगा. कौर ने मीडिया को बताया, ‘कानून के मामले में उनकी अपनी व्याख्याएं हैं और हमारी अपनी.’ इसके बाद मिस्तुरा तिरुअनंतपुरम चले गए, जहां मुख्यमंत्री उमेन चांडी ने भी उनसे यही बात कही कि कानून अपने हिसाब से काम करेगा.

तटरक्षक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कानून बिल्कुल साफ है. सीआरपीसी की धारा 188ए भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (तट से 200 समुद्री मील तक) पर लागू होती है. एलेनचेरी के बयान पर मचे हो-हल्ले के बाद कैथलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआइ) और साइरो-मालाबार चर्च ने जल्दबाजी में एक बयान जारी कर कहा कि कार्डिनल की बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. साइरो-मालाबार चर्च के प्रवक्ता फादर पॉल थेलाकट ने तफसील से बताया, ‘कार्डिनल ने सिर्फ इतना कहा था कि भारत और इटली के परस्पर संबंधों को बिगाड़े बगैर इस मामले को सुलझा लिया जाना चाहिए. आखिर वे ऐसा कैसे कह सकते हैं जब मारे गए गरीब मछुआरे भी कैथलिक थे?’ लेकिन नुकसान तो हो चुका है.

थेलाकट के मुताबिक कार्डिनल शांतिपूर्ण तरीके से इसका निबटारा चाहते थे क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इस घटना का असर इटली में रहने और काम करने वाले भारतीयों पर कैसा पड़ेगा. उन्होंने बताया, ‘कार्डिनल ने मुझसे कहा था कि उन्होंने इस मसले पर किसी मंत्री से बात नहीं की, न ही वे कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़ंगा डालने की मंशा रखते थे.’ केरल के मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि इस मसले पर उनका कोई भी मंत्री मध्यस्थता में शामिल नहीं था. चांडी ने कहा, ‘इतालवी जहाज दल की रखी गई तमाम दलीलें हमें मंजूर नहीं हैं. हम उन लोगों को सजा दिलवाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे जिन्होंने हमारे नागरिकों को मौत के घाट उतारा है. मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता. चूंकि साइरो-मालाबार चर्च ने खुद कहा है कि कार्डिनल की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, लिहाजा कोई भी टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है.’ कार्डिनल की टिप्पणी के खिलाफ सरकार के भीतर किसी ने चूं तक नहीं की. विपक्ष के नेता वी.एस. अच्युतानंदन ने कहा कि अगर कार्डिनल का बयान सही है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है. ‘उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए थे.’

कार्डिनल के कथित बयानों ने लैटिन कैथलिक चर्च को भी नाराज कर डाला है. इसके खिलाफ कोल्लम डायोसीज के सदस्यों ने प्रदर्शन भी किया. कैथलिक समुदाय में विभाजन के डर से लैटिन कैथलिक चर्च के मुख्य आर्चबिशप डॉ. सूसईपक्यम ने तुरंत दखल देते हुए कहा कि कार्डिनल ऐसा राष्ट्रविरोधी बयान दे ही नहीं सकते. ‘निश्चित तौर पर उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया है. यह निराशा की बात है कि कुछ लोग इस विवाद में पोप और वेटिकन को अनावश्यक तौर पर खींच रहे हैं जिनके अपने हित हैं.’

उधर केरल फिशरमेन फेडरेशन ने एक बयान में कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद केरल के लोग इटली के उन लोगों का बचाव कर रहे हैं जिन्होंने अपने ही लोगों को गोली मारी है.’ भाजपा ने भी इस विवाद में चांडी से सफाई मांगी है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी. मुरलीधरन ने कहा, ‘उनके मंत्री जनता के सेवक हैं या चर्च के?’ कुछ नाराज मछुआरों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इतालवी मूल की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया है कि राज्‍य और केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारें इतालवी जहाज के खिलाफ कार्रवाई का साहस ही नहीं जुटा सकतीं.

जैसे-जैसे इतालवी सुरक्षाबलों की सुनवाई आगे बढ़ेगी, एलेनचेरी के बयानों पर खड़ा हुआ विवाद चर्च पर एक साये की तरह मंडराता रहेगा.

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