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बाबा का करिश्मा तो फिर भी कायम है

उत्तर प्रदेश के शहरों से गुजर रही बाबा रामदेव की भारत स्वाभिमान यात्रा से आस लगाए हैं कई पार्टियां. कांग्रेस का पाप कांग्रेस को खत्म कर देगा. आजादी के बाद दूसरी बार पार्टी की विश्वसनीयता न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है

बाबा रामदेव
बाबा रामदेव
अपडेटेड 23 अक्टूबर , 2011

राष्ट्र की सत्ता कायर और बुजदिल लोगों के हाथ में आ गई है.'' इटावा के नुमाइश मैदान में बने ऊंचे मंच से बाबा रामदेव ने इस हुंकार के साथ अपनी बात शुरू की. वैसे तो बाबा यहां प्राणायाम और राष्ट्र निर्माण के गुर सिखा रहे थे, लेकिन इस दहाड़ से साबित हुआ कि रामलीला मैदान में रणछोड़ बने बाबा फिर महारथी बनकर कांग्रेस को उखाड़ने की लड़ाई लड़ने आए हैं.

मंच संभालते ही बाबा ने जनता से पूछा, ''आपको कमजोर प्रधानमंत्री चाहिए या मजबूत प्रधानमंत्री?'' जवाब आया 'मजबूत'. यहां उमड़े हुजूम की इस आवाज ने न सिर्फ यह दिखाया कि बाबा के आह््‌वान को सुनने वालों की तादाद कम नहीं हुई है, बल्कि बाबा को भी दिलासा दिया कि लोगों के दिल पर उनका करिश्मा अभी चुका नहीं है.

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सितंबर में झंसी से शुरू हुई बाबा की यात्रा को समाजवादी पार्टी के ध्वस्त गढ़ इटावा तक पहुंचने में करीब एक महीने का वक्त लगा. लेकिन जून में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए आंदोलन के तौर-तरीके और मौजूदा यात्रा के ढर्रे में युगांतरकारी बदलाव नजर आया है. भारत स्वाभिमान यात्रा के उस चरण में बाबा समर्थकों ने पूरे देश को झंडा, बैनर और होर्डिंग से पाट दिया था.

टीवी पर लगातार बाबा का हल्ला था. बाबा का लाव लश्कर बहुत बड़ा था और प्रचार पूरी तरह हाइटेक जबकि इस बार इटावा में चुनिंदा जगहों पर ही यात्रा की प्रचार सामग्री नजर आई. बाबा खुद एक कॉलेज के रेस्ट हाउस में ठहरे और उनका सफर चार्टर्ड विमानों के बजाए टाटा सफारी के सहारे है.

अगर कोई चीज एक समान है, तो वह है, जनता में उनकी अपील. ''मैंने कल रात 12 बजे तक ड्यूटी की उसके बावजूद  सुबह पांच बजे बाबा के प्राणायम शिविर में पहुंच गया था. मैं नियमित तौर से योग करता हूं और जब बाबा खुद शहर में आए तो मुझे पहुंचना ही था.'' इटावा में जिला पंचायत सभागार में दोपहर के वक्त बाबा के एक कार्यक्रम में ड्यूटी पर तैनात सिपाही राम कुमार सिंह ने यह बात कही.
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योग शिविर में भी दिखा की महिला पुलिस की कर्ई जवान ड्यूटी के साथ योग भी कर रही थीं. शायद बाबा को पहले खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनकी यात्रा को ऐसा समर्थन मिलने वाला है. इसीलिए पहले इटावा में सिर्फ सुबह ही योग शिविर का कार्यक्रम था. बाद में बाबा ने शाम का सत्र भी जोड़ दिया.

भारत स्वाभिमान यात्रा से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ता हरि शंकर पटेल ने कहा, ''लोगों को काले धन वाली बाबा की बात समझ आ रही है. लोग उनके साथ हैं. इटावा में तो कई होटल मालिकों ने यात्रा में बाहर से आए कार्यकर्ताओं के लिए होटल के कमरे मुफ्त या बिल्कुल कम दाम में मुहैया कराए हैं. कई लोगों ने कार्यकर्ताओं के भोजन का इंतजाम अपनी तरफ से कराया है. चंदा देने वालों की भी कमी नहीं रही.''

मजे की बात है कि यहां 12 अक्तूबर को टीम अण्णा भी आने वाली थी और इस बारे में पर्चे भी छप गए थे, लेकिन टीम अण्णा हिसार चुनाव में कूद पड़ी और यहां का दौरा रद्द हो गया.

इटावा में बहुत से ऐसे लोग मिले जो बाबा और अण्णा दोनों के आंदोलन के कार्यकर्ता बनने को तैयार हैं. सूत्रों की मानें तो दोनों पक्षों ने एक ही व्यक्ति के घर में कार्यालय बनाने की पहल भी की थी. दोनों ही पक्षों को गैर-कांग्रेसी दलों का भी अब तक ठीक-ठाक सहयोग मिला. एक-सा जनाधार होने के बावजूद दोनों पक्ष अपना-अपना श्रेय चाहते हैं.

पिछली बार आंदोलन के आयोजन में पैसे के इस्तेमाल में पारदर्शिता के सवाल से घिरे बाबा ने इस बार बड़ी सीधी रणनीति अपनाई है. 5,000 रु. से अधिक का चंदा देने वाले सभी दानदाताओं के नाम मोटे-मोटे अक्षरों में मंच पर लिखवा दिए और शाम को अपने मंच पर आशीर्वाद देने के बहाने दानदाताओं की परेड करा दी.

शायद इसी खुली रणनीति से आकर्षित होकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इटावा में बाबा से नजदीकी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और दान देने में सबसे आगे रहे. भाजपा के भी कुछ स्थानीय नेता बाबा के नजदीक दिखाई दिए. लेकिन बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की तरफ से कोई यहां नहीं फटका.

बसपा के सवाल पर बाबा ने कहा, ''नहीं, ऐसी बात नहीं बसपा के लोग भी कई जगहों पर हमारे कार्यक्रमों में आए हैं. कांग्रेस के अलावा सभी पार्टियां हमारा समर्थन चाहती हैं.'' पिछले विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा में ही बसपा के हाथों बुरी पराजय झेल चुकी सपा को बाबा के करिश्मे से कितनी उम्मीद है, इसे इसी बात से समझ सकते हैं कि पार्टी के संसदीय दल के नेता रामगोपाल यादव ने गेस्ट हाउस पहुंचकर बाबा से बंद कमरे में काफी देर तक मंत्रणा की. इससे पहले अखिलेश यादव भी बाबा से एकांत चर्चा कर चुके हैं.

कार्यक्रम में शामिल होने आए नीरज यादव ने यहां आने की वजह पूछने पर कहा, ''अब तक टीवी पर देखते थे, अब जब साक्षात शहर में आए हैं तो ऐसा मौका कौन गंवाएगा.'' और मौका रामदेव भी गंवाना नहीं चाहते. इसीलिए इस बार उनके मंच से भी सुरीले और जोशीले गीत सुनार्ई दे रहे हैं.

अण्णा के आंदोलन में लोगों के झूमने की एक वजह वहां का लाजवाब गीत और संगीत भी था. बाबा के मंच से राजनीतिक अर्थों से भरा गीत बजा, ''हमको पता ना था सूरज बचकानी भाषा बोलेगा.'' और इसी गीत में बीच में एक पंक्ति आई 'संविधान को नेता के घर पॉलिश करते देखा है.'

खास बात यह है कि बाबा योग शिविर में ऐसी बात करते हैं जैसे चुनावी राजनीति को प्रभावित करना उनके व्यापक राष्ट्र निर्माण के एजेंडे का छोटा-सा हिस्सा हो, लेकिन जब प्रेस को संबोधित करते हैं तो सीधे राजनैतिक संदेश देने में गुरेज नहीं करते. यात्रा के हासिल के सवाल पर बाबा ने कहा, ''हमने जनता को साफ बता दिया है कि जो बाबा के मुद्दों को समर्थन दे उसी को वोट दो.

कांग्रेस आंदोलन के खिलाफ है, इसलिए कांग्रेस का विरोध करो.'' लेकिन सवाल यह है कि रामदेव के आंदोलन का असर लोगों के दिल पर ही हो रहा है, या चुनाव में उनकी उंगली पर भी होगा.  

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