अकादमिक प्रतिष्ठा की बजाए छात्रों के बीच हिंसक झड़पों के लिए कुख्यात अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अब बदल रहा है. इंडिया टुडे-नीलसन के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में यह इस साल पांचवें स्थान पर है, जो 2011 की सूची के मुकाबले छह पायदान ऊपर है. 12 मई को रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह की यहां के कुलपति के पद पर नियुक्ति ने आश्वस्त किया है कि 27,000 छात्रों के इस कैंपस को आखिरकार अब अनुशासन की वह खुराक मिल सकेगी जिसकी इसे लंबे समय से दरकार थी.
2008 में उप-सेनाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए 63 वर्षीय शाह कहते हैं, ''मेरी कोशिश होगी कि विश्वविद्यालय की खोई हुई प्रतिष्ठा को बहाल किया जा सके और उस विद्वता को भी, जो इसने 30 साल पहले पीछे छोड़ दी थी.'' इसमें कोई शक नहीं कि उनका काम चुनौतीपूर्ण होगा.
शाह को विरासत में बड़े बदलाव मिले हैं जो 17 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए 65 वर्षीय कुलपति पी.के. अब्दुल अजीज ने यहां किए थे. अगस्त 2007 में तत्कालीन कुलपति के घर पर कुछ छात्रों ने हमला किया था. इसके बाद अजीज ने कड़ा कदम उठाया और 1,200 बाहरी लोगों को परिसर से बाहर कर दिया जो गैर कानूनी तरीके से छात्रावासों में रह रहे थे तथा छात्रावासों के खाली कमरे आवंटित करने के लिए एक केंद्रीय आवंटन कमेटी गठित कर डाली जिसमें आठ वरिष्ठ प्राध्यापकों को शामिल किया गया. पहली बार परिसर में मौजूद सभी छात्रों को पहचान पत्र दिए गए.
पिछले पांच साल से एएमयू के रजिस्ट्रार 62 वर्षीय वी.के. अब्दुल जलील कहते हैं, ''हमारा सारा जोर इस विश्वविद्यालय में शोध की पुरानी परंपरा को बहाल करना था, इसीलिए हमने अकादमिक कार्यों और शोध पर खास ध्यान देना शुरू किया.''
2008 में अध्यापकों से पीएचडी के लंबित मामलों को निबटाने के लिए कहा गया, इसके बाद एक साल के भीतर पीएचडी डिग्रियों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई. 2008 में 220 पीएचडी डिग्रियां दी गई थीं, जो 2009 में बढ़कर 500 तक पहुंच गईं.
जलील कहते हैं, ''हमने यह भी तय किया कि कम से कम 500 शिक्षक विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को अपने शोध कार्य जमा कराएं. इसके अलावा विश्वविद्यालय में हरेक शिक्षक से कहा गया कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के किसी जर्नल में साल में कम-से-कम एक शोधपत्र जरूर प्रकाशित करवाए.''
विश्वविद्यालय ने 2009 में विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहमति पत्रों (एमओयू) पर दस्तखत करने की भी एक परंपरा शुरू की, जिसके तहत विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी, क्लीवलैंड यूनिवर्सिटी, अटलांटा यूनिवर्सिटी, जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए. जलील ने बताया, ''एएमयू इंग्लिश एक्सेस माइक्रोस्कॉलरशिप प्रोग्राम पर नई दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर के साथ मिलकर काम कर रहा है. हर साल इस कार्यक्रम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तबकों से आने वाले 100 छात्रों को उनकी अंग्रेजी दुरुस्त करने में मदद दी जाती है.''
मार्च में एएमयू के मुर्शिदाबाद परिसर में एमबीए और लॉ छात्रों का पहला बैच पहुंचा, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रु. आवंटित किए हैं. यूनिवर्सिटी का एक और सेंटर केरल के मलप्पुरम में स्थित है जबकि दो अन्य सेंटर बिहार के किशनगढ़ और महाराष्ट्र के औरंगाबाद में प्रस्तावित हैं. विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक यूनानी मेडिकल कॉलेज, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, एक इंजीनियरिंग कॉलेज और दो पॉलीटेक्निक समेत 12 फैकल्टी मौजूद हैं और यह विस्तार की राह पर लगातार आगे बढ़ रही है.
पिछले साल इसने उर्दू और अरबी में उच्च अध्ययन केंद्र स्थापित किए और तीन नए हॉस्टल बनवाए. इसके अलावा मौलाना आजाद लाइब्रेरी को अत्याधुनिक बनाए जाने पर चार करोड़ रु. खर्च किए गए. पत्रकारिता में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे 21 वर्षीय मोहम्मद मलिक ने बताया, ''पिछले कुछ साल में यूनिवर्सिटी में काफी बदलाव हुए हैं. अध्यापक अब छात्रों को पढ़ाने में दिलचस्पी लेने लगे हैं, जो पहले नहीं था. पिछले कुछ साल में पहली बार छात्रों और अध्यापकों के बीच कक्षाओं में परस्पर संवाद हुए हैं.''
अच्छे छात्रों को प्रवेश देने के उद्देश्य से 2008 में अपने इतिहास में पहली बार यूनिवर्सिटी ने चार सेंटरों-भोपाल, कोलकाता, कोझ्किोड और पुणे-पर प्रवेश परीक्षाएं करवाने का फैसला किया. इस सूची में 2010 में लखनऊ और हैदराबाद को भी जोड़ लिया गया. इसी साल विश्वविद्यालय ने कुछ बेहद नए और अत्याधुनिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जिनमें नैनो-टेक्नोलॉजी में एमटेक, बायोडाइवर्सिटी मैनेजमेंट और संरक्षण में पीजी डिप्लोमा, वन्यजीव पारिस्थितिकी और प्रबंधन में सर्टिफिकेट कोर्स, सर्जिकल एंडोस्कोप तकनीक में सर्टिफिकेट कोर्स और डेंटल सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री शामिल है.
इसके अलावा सेंटर फॉर प्रोफेशनल कोर्सेज ने पर्यावरणीय रसायन विज्ञान, खाद्य विश्लेषण और बायोलॉजिकल प्रयोगशाला तकनीक में डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत की है. इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी विभाग में एक नया अनुसंधान और विकास विभाग बनाया गया है. यह 30,000 से ज्यादा छात्रों और 300 से ज्यादा शिक्षकों को ई-रिसोर्स प्रणाली के माध्यम से मदद करता है जिसमें शोध अनुदानों के लिए आलेख और ऑनसाइट डाटाबेस सहयोग शामिल है.
एएमयू को 1920 में पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा मिला था. इसके कैंपस में कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं. जनवरी 2009 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दिल्ली सर्कल के निदेशक के.के. मोहम्मद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था, जिसका काम परिसर के ऐतिहासिक ढांचे को संजोए रखना था. कमेटी की सिफारिश पर कैंपस की विशाल मस्जिद के ढांचे के संरक्षण का काम शुरू हो चुका है.
जड़ता, भाई-भतीजावाद और सिलसिलेवार सियासी विवाद के रोगों से ग्रस्त एएमयू ने अजीज के कार्यकाल में चमत्कारिक बदलाव देखे हैं. अब लेफ्टिनेंट-जनरल अनुशासन के साथ विद्वता का पाठ पढ़ाएंगे.

