
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान लंबे समय तक एक सख्त प्रशासक, भगवा चोले वाले फायरब्रांड नेता और कानून-व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस की नीति वाले मुख्यमंत्री के तौर पर रही है.
हालांकि अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी की राजनीतिक शैली में एक दिलचस्प बदलाव नजर आ रहा है. अब मुख्यमंत्री सिर्फ मंच से भाषण देते, अधिकारियों को निर्देश देते या योजनाओं का लोकार्पण करते ही नहीं दिख रहे, बल्कि युवाओं और महिलाओं के बीच जाकर उनके साथ सेल्फी लेते भी नजर आ रहे हैं.
तो अब सवाल है कि क्या सेल्फी योगी के नए राजनीतिक कनेक्ट और 2027 की चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुकी है? अगस्त के आखिरी सप्ताह में लगातार सामने आई तस्वीरों ने इस सवाल को और धार दे दी है.
21 अगस्त को जापान के यामानाशी प्रांत से आए छात्रों के साथ मुख्यमंत्री की सेल्फी चर्चा में रही. 25 अगस्त को नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं ने मुख्यमंत्री से सेल्फी की मांग की तो योगी खुद उनके बीच पहुंच गए. और 26 अगस्त को महिलाओं के लिए शुरू की गई विशेष बस सेवा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस में बैठी महिलाओं के साथ सेल्फी लेकर एक और राजनीतिक संदेश दिया.
यानी तीन दिन में तीन अलग-अलग सामाजिक समूहों के साथ तस्वीरें. युवा, विदेशी छात्र और महिलाएं. इन तीनों तस्वीरों को अगर योगी सरकार की हालिया घोषणाओं के साथ जोड़कर देखा जाए तो इसके पीछे एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति दिखाई देती है.
सेल्फी में बन रहा नया 'कनेक्ट'
26 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ का शुभारंभ किया और विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. बारिश के बीच बसों में बैठी महिलाओं ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया तो योगी ने भी हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया.

इसके बाद मुख्यमंत्री बस में पहुंचे और महिलाओं के साथ सेल्फी ली. सरकारी योजना के शुभारंभ की यह तस्वीर सामान्य सरकारी कार्यक्रम की तस्वीरों से अलग थी. यहां मुख्यमंत्री लाभार्थियों से दूरी बनाकर खड़े नहीं थे बल्कि खुद उनके बीच जाकर कैमरे के फ्रेम में दिखाई दिए. यही योगी की बदलती राजनीतिक शैली का अहम पहलू है.
पहले मुख्यमंत्री की तस्वीर अक्सर मंच, अधिकारियों और सरकारी योजनाओं के उद्घाटन के साथ जुड़ी होती थी. अब तस्वीर में लाभार्थी भी उसी फ्रेम का हिस्सा है. राजनीति की भाषा में इसे सत्ता और लाभार्थी के बीच दूरी घटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है.
लखनऊ में अवध गर्ल्स डिग्री कालेज की प्राचार्य बीना राय कहती हैं, “महिलाओं के साथ ली गई सेल्फी का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उत्तर प्रदेश में महिला मतदाता चुनावी राजनीति का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री का खुद महिलाओं के बीच जाकर तस्वीर खिंचवाना सिर्फ व्यक्तिगत सहजता का प्रदर्शन नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की महिला लाभार्थी को सीधे सरकार के चेहरे से जोड़ने का प्रयास भी माना जा सकता है.”
योगी सरकार ने इसी कार्यक्रम में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य परिवहन की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा का ऐलान किया. साथ ही अक्टूबर-नवंबर में 50 हजार स्नातक छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा की गई.
यानी एक ही मंच से बुजुर्ग महिलाओं और युवा छात्राओं, दोनों को साधने की कोशिश दिखाई दी. एक तरफ मुफ्त यात्रा, दूसरी तरफ स्कूटी. और दोनों योजनाओं के बीच मुख्यमंत्री की सेल्फी.

यहां तस्वीर और योजना का राजनीतिक मेल महत्वपूर्ण है. योजना सरकार की उपलब्धि बताती है, लेकिन सेल्फी उसे व्यक्तिगत अनुभव में बदल देती है. जिस महिला के साथ मुख्यमंत्री की तस्वीर है, उसके लिए योजना अब केवल सरकारी घोषणा नहीं रहती. वह मुख्यमंत्री के साथ जुड़ी एक व्यक्तिगत स्मृति भी बन जाती है.
Gen-Z तक पहुंचने का फार्मूला
महिलाओं से पहले योगी की सेल्फी राजनीति का सबसे स्पष्ट निशाना युवा नजर आया. 25 अगस्त को लखनऊ में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 3,446 तकनीकी सहायकों और 126 मंडी सचिवों यानी कुल 3,572 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए.
कार्यक्रम के बाद युवाओं ने मुख्यमंत्री से सेल्फी की मांग की. योगी मंच से उतरकर उनके बीच पहुंचे और उनके साथ तस्वीर खिंचवाई. यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई जब मुख्यमंत्री ने अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया.
उन्होंने भर्ती आयोगों और बोर्डों को भर्ती प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए हैं. सरकार की कोशिश है कि अगले कुछ महीनों में अलग-अलग चरणों में नियुक्ति पत्र बांटे जाएं. यही नहीं, सरकार ने ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना’ के तहत 25 लाख युवाओं को टैबलेट देने की तैयारी की है.
इस पूरी रणनीति को 2027 के चुनाव के संदर्भ में देखें तो BJP के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है. युवा मतदाता सिर्फ हिंदुत्व या कानून-व्यवस्था के आधार पर मतदान नहीं करता. उसके लिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, तकनीक, शिक्षा और करियर के अवसर महत्वपूर्ण हैं. खासकर Gen-Z के बीच सरकार के साथ संवाद का तरीका भी पारंपरिक राजनीति से अलग है.
यहीं सेल्फी उपयोगी राजनीतिक उपकरण बनती है. मुख्यमंत्री के साथ ली गई तस्वीर कुछ ही मिनटों में इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स या वॉट्सएप पर पहुंच सकती है. यानी एक सरकारी कार्यक्रम की तस्वीर लाभार्थी के निजी सोशल नेटवर्क के जरिए सरकार के संदेश को आगे ले जा सकती है.
'योगी की पाती' से सेल्फी तक की रणनीति
योगी की सेल्फी राजनीति को समझने के लिए उनके संवाद के पिछले प्रयोगों को भी देखना जरूरी है. मुख्यमंत्री ने जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ‘योगी की पाती’ का इस्तेमाल किया. खुले पत्रों के जरिए उन्होंने युवाओं, महिलाओं, बच्चों और आम लोगों से सीधे संवाद करने की कोशिश की.
इसमें सरकार की योजनाओं, सामाजिक मुद्दों, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, कौशल और नई तकनीक जैसे विषय शामिल रहे. लेकिन पत्र और सेल्फी के बीच एक बुनियादी अंतर है. पत्र में मुख्यमंत्री जनता को संबोधित करते हैं.
सेल्फी में जनता मुख्यमंत्री के साथ दिखाई देती है. पत्र एकतरफा संवाद है जबकि सेल्फी को दोतरफा दृश्य संवाद की तरह पेश किया जा सकता है. 21 अगस्त को जापानी छात्रों के साथ मुख्यमंत्री की तस्वीर इसी बदलाव का उदाहरण बनी.
मुख्यमंत्री आवास पर ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ कार्यक्रम में जापान के यामानाशी प्रांत से आए 13 छात्र और लखनऊ के स्कूली बच्चे मौजूद थे. एक जापानी छात्र मुख्यमंत्री के पास पहुंचा, सेल्फी ली, विक्ट्री साइन बनाया और सहज अंदाज में योगी के कंधे पर हाथ रखा. मुख्यमंत्री भी खुलकर हंस पड़े.
तस्वीर में मुख्यमंत्री की वह छवि दिखाई दी जो आम तौर पर उनके सख्त प्रशासनिक अंदाज से अलग है. इसके चार दिन बाद भारतीय युवाओं के साथ वही दृश्य सामने आया. अगले दिन महिलाओं के साथ बस में सेल्फी. यानी तस्वीरों की यह श्रृंखला अपने आप में एक कहानी कह रही है.
योगी की राजनीति में यह नया 'पर्सनल टच' इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 की लड़ाई में BJP को सरकार की योजनाओं को मतदाता के निजी अनुभव से जोड़ना होगा. सेल्फी यह दिखाने की कोशिश करती है कि सरकार किसके साथ खड़ी है.

