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होमगार्ड भर्ती की दौड़ कैसे बन रही जानलेवा?

उत्तर प्रदेश में 41,424 पदों की भर्ती के दौरान 4.8 किमी दौड़ में पांच अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है. इसके चलते तैयारी, मेडिकल स्क्रीनिंग और परीक्षा के इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं

भर्ती बोर्ड ने सभी मौतों की जांच रिपोर्ट मांगी है (सांकेतिक तस्वीर)
अपडेटेड 21 सितंबर , 2026

शामली के लिसाढ़ गांव निवासी पूर्व सैनिक अंकुज मलिक ने करीब 17 साल भारतीय सेना में सेवा की थी. वर्ष 2022 में राजपूताना राइफल्स से सेवानिवृत्ति के बाद भी वर्दी से उनका लगाव कम नहीं हुआ. दो बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने होमगार्ड बनने का सपना देखा. 

अंकुज ने लिखित परीक्षा पास की और शारीरिक दक्षता परीक्षा देने मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचे. लेकिन 15 सितंबर को 4.8 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उसी शाम उनकी मौत हो गई.  जिस वर्दी को पहनने का सपना लेकर वह मैदान में उतरे थे, वही दौड़ उनके परिवार के लिए मातम की वजह बन गई.

अंकुज की मौत इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अकेली घटना नहीं है. मेरठ में शामली के सचिन कुमार और हापुड़ के तरुण कुमार की भी दौड़ के बाद मौत हो चुकी है. लखनऊ में सीतापुर के योगेंद्र सिंह और मुरादाबाद में बरेली के शिवम यादव की मौत ने सवाल और गंभीर कर दिए हैं. 

15 सितंबर से शुरू हुई होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान अब तक पांच अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है. कई अन्य अभ्यर्थियों को दौड़ के दौरान हालत बिगड़ने, गिरने या चोट लगने के बाद अस्पताल पहुंचाया गया है.

प्रदेश में 41,424 होमगार्ड पदों के लिए शुरू हुई इस भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में करीब एक लाख अभ्यर्थियों को शामिल होना है. परीक्षा में 4.8 किलोमीटर की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी है. अभ्यर्थियों को स्टेडियम के ट्रैक के 12 चक्कर लगाने पड़ते हैं. 

अभ्यर्थियों को 4.8 किमी की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी पड़ती है (सांकेतिक तस्वीर)
अभ्यर्थियों को 4.8 किमी की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी पड़ती है (सांकेतिक तस्वीर)

सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी वाली परीक्षा में आखिर ऐसी नौबत क्यों आ रही है? क्या वजह केवल अभ्यर्थियों की फिटनेस और तैयारी है या परीक्षा के इंतजाम और मौसम भी जोखिम बढ़ा रहे हैं?

नहीं थम रहीं मुश्किल

15 सितंबर को मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में शामली, बागपत और हापुड़ समेत विभिन्न जिलों के 1,017 अभ्यर्थियों ने शारीरिक दक्षता परीक्षा में हिस्सा लिया था. 4.8 किलोमीटर की दौड़ के दौरान 11 अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ी. सात को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई जबकि तीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया. 

इनमें शामली के पूर्व सैनिक अंकुज मलिक और हापुड़ के तरुण कुमार की मौत हो गई. गुर्जरपुर निवासी 22 वर्षीय सचिन कुमार भी इसी दौड़ के दौरान गंभीर रूप से बीमार पड़े थे. उन्हें पहले मेडिकल कॉलेज और फिर आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया. वेंटिलेटर पर रहे सचिन ने 20 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे दम तोड़ दिया.

सचिन चार भाइयों में सबसे बड़े थे. उनके पिता विनोद कुमार खेती करके परिवार चलाते हैं. सचिन लंबे समय से होमगार्ड भर्ती की तैयारी कर रहे थे. परिवार को उम्मीद थी कि इस बार नौकरी मिल जाएगी. लेकिन 4.8 किलोमीटर की दौड़ के बाद अस्पताल पहुंचा यह युवक वापस घर नहीं लौट सका.

20 सितंबर को भी मेरठ में परीक्षा के दौरान अलीगढ़ के दो अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ी. सन्नी कुमार के पैर में फ्रैक्चर हुआ जबकि कार्तिक कुमार की तबीयत खराब हो गई. दोनों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया. बताया गया कि सन्नी के पैर में पहले भी फ्रैक्चर हो चुका था.

इससे पहले 15 सितंबर को लखनऊ में सीतापुर निवासी योगेंद्र सिंह की मौत हुई. 16 सितंबर को मेरठ में हापुड़ के तरुण कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ा. 18 सितंबर को मुरादाबाद में बरेली निवासी बीटेक पास शिवम यादव की दौड़ के बाद तबीयत बिगड़ने से मौत हुई. 

विशेषज्ञों के मुताबिक कई अभ्यर्थी पर्याप्त फिटनेस के बिना दौड़ में भाग लेते हैं (सांकेतिक फोटो)
विशेषज्ञों के मुताबिक कई अभ्यर्थी पर्याप्त फिटनेस के बिना दौड़ में भाग लेते हैं (सांकेतिक फोटो)

इस तरह अलग-अलग केंद्रों पर हुई मौतों ने भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी, मेडिकल स्क्रीनिंग, मौसम और मैदान पर उपलब्ध आपात चिकित्सा व्यवस्था, सभी को सवालों के घेरे में ला दिया है.

हालांकि इन मौतों का अंतिम चिकित्सकीय कारण हर मामले में अलग-अलग जांच का विषय है. केवल दौड़ या गर्मी को ही सभी मौतों का कारण मान लेना अभी जल्दबाजी होगी. लेकिन एक ही भर्ती प्रक्रिया के दौरान लगातार गंभीर घटनाओं ने जोखिम प्रबंधन पर सवाल जरूर खड़े किए हैं.

दौड़ के लिए शरीर कितना तैयार?

होमगार्ड भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा का मानक स्पष्ट है. अभ्यर्थी को 4.8 किलोमीटर की दूरी 28 मिनट में पूरी करनी है. यानी करीब 5 मिनट 50 सेकंड प्रति किलोमीटर की औसत गति बनाए रखनी होती है. मैदान पर अभ्यर्थियों को 12 चक्कर पूरे करने पड़ते हैं.

मेरठ जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव गौरव त्यागी के मुताबिक भर्ती के लिए आयोजित दौड़ों और सामान्य एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में बड़ा अंतर होता है. उनका कहना है कि कई अभ्यर्थी लंबे समय तक नियमित अभ्यास नहीं करते और परीक्षा के दिन अचानक अपनी क्षमता से अधिक गति से दौड़ने की कोशिश करते हैं.

ऐसी स्थिति में शरीर पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ सकता है. उनके अनुसार क्षमता से अधिक तेज दौड़ने पर हृदय की धड़कन अनियंत्रित होने का खतरा रहता है और यह गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भर्ती परीक्षा में एक तय समय सीमा के भीतर दूरी पूरी करनी होती है. अभ्यर्थी के सामने सिर्फ दौड़ पूरी करने की चुनौती नहीं होती बल्कि निर्धारित समय के भीतर उसे पूरा करने का दबाव भी होता है. लंबे समय तक तैयारी नहीं करने वाला व्यक्ति परीक्षा के दिन अपनी क्षमता से अधिक जोर लगा सकता है.

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. राजेंद्र गुप्ता ने दौड़ से पहले स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जरूरी जांच कराने की सलाह दी है. उनके मुताबिक ईसीजी, ब्लड प्रेशर और बेसिक हीमोग्लोबिन जैसी जांच से किसी संभावित स्वास्थ्य समस्या का पता लगाने में मदद मिल सकती है. दौड़ से 24 से 48 घंटे पहले पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है. सादा पानी के साथ नारियल पानी, नींबू पानी या ओआरएस लिया जा सकता है.

विशेषज्ञों ने खाली पेट दौड़ने से भी बचने की सलाह दी है. दौड़ से करीब डेढ़ से दो घंटे पहले केला या दलिया जैसे हल्के कार्बोहाइड्रेट लिए जा सकते हैं. बिना चिकित्सकीय सलाह के फैट बर्नर, प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेने से बचने को भी कहा गया है. परीक्षा से पहले पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी बताया गया है क्योंकि थकान से चोट और मांसपेशियों पर दबाव का खतरा बढ़ सकता है.

यानी परीक्षा की तैयारी सिर्फ मैदान में कुछ दिन दौड़ लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए. नियमित अभ्यास, अपनी क्षमता के अनुसार गति, पर्याप्त आराम और स्वास्थ्य की जानकारी भी इसका हिस्सा है. लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि परीक्षा आयोजकों की जिम्मेदारी केवल मानक तय करने तक खत्म नहीं होती. इतने बड़े स्तर की शारीरिक परीक्षा में अभ्यर्थियों की सुरक्षा के इंतजाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

मौसम और इंतजाम पर सवाल

मेरठ में 15 सितंबर की परीक्षा को लेकर सबसे बड़ा सवाल मौसम और दौड़ के समय को लेकर उठ रहा है. अभ्यर्थियों का कहना है कि गर्मी और उमस के बीच दौड़ कराई गई. एक अभ्यर्थी के मुताबिक मैदान में ग्लूकोज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और आपात स्थिति के लिए चिकित्सकों की टीम भी मौजूद नहीं थी. सुबह करीब 4:30 बजे एक एंबुलेंस खड़ी होने की बात कही गई, लेकिन अभ्यर्थी का दावा है कि मौके पर डॉक्टरों की टीम नहीं थी.

अभ्यर्थियों के अनुसार दौड़ करीब 9:40 बजे शुरू कराई गई. परिवार के लोगों ने भी गर्मी में दौड़ कराने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पहले की कुछ भर्तियों में गर्मी और उमस से बचने के लिए दौड़ सुबह नौ बजे से पहले पूरी करा ली जाती थी.

हालांकि भर्ती अधिकारियों की ओर से परीक्षा के सभी सुरक्षा इंतजामों में कमी को मौतों का कारण बताया नहीं गया है. परीक्षा के नोडल अधिकारी एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि अंकुज मलिक, सचिन कुमार और तरुण के मामलों में भर्ती बोर्ड ने रिपोर्ट मांगी है. 

बोर्ड ने अभ्यर्थियों की मौत का कारण और शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान किए गए इंतजामों की जानकारी मांगी है. उनके मुताबिक पूरे मामले की रिपोर्ट भर्ती बोर्ड को भेजी जा रही है.

यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दौड़ रहे हैं. ऐसे में एंबुलेंस, डॉक्टर, प्राथमिक उपचार, पानी, ओआरएस और तत्काल चिकित्सा सहायता की उपलब्धता महज सुविधा नहीं बल्कि आपात स्थिति में जीवन बचाने वाली व्यवस्था बन जाती है.

बाद की परीक्षाओं में प्रशासन ने दौड़ के समय में बदलाव किया है. दोपहर में दौड़ कराने की व्यवस्था बंद कर दी गई है. अब अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र पर दिए समय से करीब 90 मिनट पहले बुलाकर दोपहर से पहले दौड़ पूरी कराने की कोशिश की जा रही है. 

बावजूद इसके 20 सितंबर को भी दो अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ गई. इससे संकेत मिलता है कि केवल समय बदलने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो रही और तैयारी, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा व्यवस्था तीनों स्तरों पर ध्यान देने की जरूरत है.

41,424 पदों की यह भर्ती लाखों युवाओं के रोजगार के सपने से जुड़ी है. ऐसे में परीक्षा का पैमाना जितना बड़ा है, सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है. 

अब भर्ती बोर्ड की रिपोर्ट और प्रत्येक मौत की चिकित्सकीय जांच यह बताएगी कि इन घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं में बदलाव की जरूरत है.

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