
त्योहारों में मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ उनकी शुद्धता का सवाल भी गहरा जाता है. दूध, खोया, घी और दूसरे खाद्य पदार्थों से बनने वाली मिठाइयों में मिलावट की आशंका के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार ग्राहकों को उत्पाद की उपयोग अवधि बताने की व्यवस्था की है. 15 अक्टूबर से प्रदेश की मिठाई की दुकानों पर बिक्री के लिए रखे सभी उत्पादों की ‘यूज बाय डेट’ यानी इस्तेमाल की अंतिम तारीख प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा.
यह नियम काउंटर और ट्रे में रखी खुली मिठाइयों के साथ बिक्री के लिए स्टोर किए गए उत्पादों पर भी लागू होगा. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 24 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी किया था. विभागीय निरीक्षणों में खुली मिठाइयों की उपयोग अवधि की जानकारी नहीं मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है.
इसका मकसद ग्राहकों को दुकानदार पर निर्भर रहने के बजाय खुद यह जांचने का अवसर देना है कि मिठाई कब तक खाने योग्य बताई गई है. हालांकि मिठाई पर तारीख लिखने से उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती. यह व्यवस्था उत्पाद की उपयोग अवधि के बारे में जानकारी दे सकती है लेकिन उसमें इस्तेमाल सामग्री मिलावट रहित है या नहीं, यह जानने के लिए जांच जरूरी है.
शुद्धता की कितनी गारंटी
अब तक पैकेट बंद मिठाइयों पर एक्सपायरी या ‘यूज बाय डेट’ की जानकारी दी जाती थी लेकिन खुली मिठाइयों के मामले में ऐसी व्यवस्था नहीं थी. डॉ. रोशन जैकब ने इस पहल को विभाग के ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान का हिस्सा बताया है. उन्होंने कहा, “यह नियम-कानून लागू करने अभियान नहीं है बल्कि एक खाद्य सुरक्षा अभियान है. हम इस पर पहले से ही काम कर रहे हैं लेकिन हमारा ध्यान पहले निर्माण पक्ष, जैसे दूध, मसाले, पानी और अन्य उत्पादों पर अधिक था. साल के इस समय खपत सबसे ज्यादा होती है, इसलिए हम एक-एक करके अलग-अलग क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं. त्योहारों के करीब आने के कारण, अब हमारा फोकस मिठाइयों पर है.”

जैकब के मुताबिक 15 अक्टूबर से मिठाई की दुकानों के खिलाफ कोई व्यापक या एकतरफा कार्रवाई शुरू नहीं होगी. निरीक्षकों की चेकलिस्ट में अब ‘यूज बाय डेट’ भी शामिल होगी. नियमों का उल्लंघन करने पर मामले की गंभीरता के अनुसार जुर्माना लगाने या लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान है.
सरकार ने सभी मिठाइयों के लिए एक समान शेल्फ लाइफ तय नहीं की है. उत्पाद की सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भंडारण की परिस्थितियों के आधार पर इसकी अवधि तय करनी होगी. अलग-अलग उत्पादों के लिए यह अवधि एक से 30 दिन तक हो सकती है.
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मिठाई 30 दिन तक सुरक्षित रहेगी. खाद्य कारोबार संचालकों की जिम्मेदारी होगी कि घोषित अवधि के दौरान मिठाई निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे. मसलन, किसी उत्पाद की उपयोग अवधि पांच दिन घोषित की गई है तो उचित भंडारण की स्थिति में उन पांच दिनों तक उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना दुकानदार की जिम्मेदारी होगी.
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18(1)(a) में मानव जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा पर जोर दिया गया है. वहीं, धारा 30(2)(d) खाद्य सुरक्षा मानकों और संबंधित आवश्यकताओं के प्रभावी तथा एक समान क्रियान्वयन से जुड़ी है. विभाग ने इन्हीं उद्देश्यों के तहत उपयोग अवधि की जानकारी को उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता से जोड़ा है.
छोटे कारोबारियों की मुश्किल
मिठाई कारोबारियों ने सरकारी निर्देश का पालन करने की बात कही है लेकिन ट्रे पर तारीख लगाने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने को अतिरिक्त काम बताया है. लखनऊ में कैंट इलाके के एक मिष्ठान भंडार के मालिक प्रमोद कुमार ने कहा, “सरकार ने हमें ऐसा करने का निर्देश दिया है इसलिए हम इसका पालन करेंगे और ट्रे पर स्टिकर लगाएंगे. यहां लागत कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि स्टिकर बहुत सस्ते होते हैं. बस चिंता इस बात की है कि किसी को इन्हें लगाने और हटाने का अतिरिक्त काम करना पड़ेगा.”
कैसरबाग के मिठाई कारोबारी आशीष गुप्ता ने बताया कि कई बड़ी दुकानें पहले से ही मिठाई के डिब्बों पर स्टिकर लगाती हैं. इनमें उत्पाद के अनुसार उसे 24 घंटे या तीन दिन के भीतर खा लेने की सलाह दी जाती है. लेकिन अब खुली मिठाइयों की ट्रे पर भी तारीख प्रदर्शित करनी होगी. उन्होंने कहा, “हालांकि ज्यादातर बड़ी मिठाई की दुकानों के मालिक पहले से ही अपने डिब्बों पर ऐसे स्टिकर लगा रहे हैं, जिन पर लिखा होता है कि मिठाई को 24 घंटे या तीन दिन के भीतर खा लेना चाहिए, लेकिन नए आदेश के तहत हमें ट्रे पर भी स्टिकर लगाने होंगे. हम तो ऐसा कर लेंगे, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए यह मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनके पास इतना बड़ा स्टाफ नहीं होता.”
कारोबारियों की यह चिंता केवल स्टिकर लगाने तक सीमित नहीं है. नई खेप आने, ट्रे में रखी मिठाई बदलने और अलग-अलग उत्पादों की उपयोग अवधि दर्ज करने के लिए नियमित निगरानी करनी होगी. छोटी दुकानों में सीमित कर्मचारियों के कारण यह काम चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
हालांकि कारोबार का आकार कुछ भी हो खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी से छूट नहीं मिल सकती. इस व्यवस्था की एक और अहम कसौटी यह होगी कि दुकानदार उपयोग अवधि किस आधार पर तय करते हैं. यदि तारीख केवल औपचारिकता बनकर रह गई और उत्पाद की प्रकृति तथा भंडारण के अनुरूप तय नहीं हुई तो उपभोक्ता संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. इसलिए निरीक्षण के दौरान तारीख की मौजूदगी के साथ उसकी विश्वसनीयता और उत्पाद की वास्तविक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है.
जांच और कार्रवाई निर्णायक
‘यूज बाय डेट’ का नियम ग्राहकों को बेहतर जानकारी देने की दिशा में कदम है लेकिन मिलावट पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सामग्री और तैयार उत्पादों की जांच भी उतनी ही जरूरी है. तारीख देखकर ग्राहक यह जान सकते हैं कि दुकानदार ने मिठाई के इस्तेमाल की अंतिम सीमा क्या घोषित की है. इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि मिठाई में इस्तेमाल हुआ दूध, खोया, घी या रंग निर्धारित मानकों के अनुरूप है.
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की बढ़ती खपत को देखते हुए विभाग के सामने चुनौती होगी कि वह दुकानों पर तारीख प्रदर्शित करने की व्यवस्था के साथ निर्माण और भंडारण की परिस्थितियों पर भी नजर रखे. खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, साफ-सफाई, उचित तापमान पर भंडारण और खराब उत्पादों को बिक्री से हटाने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई भी जरूरी है.
डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान उपयोग की अंतिम तारीख की जांच की जाएगी और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना या लाइसेंस संबंधी कार्रवाई हो सकती है. अब विभागीय निगरानी की प्रभावशीलता इस बात से आंकी जाएगी कि नियमों का पालन कितना कराया जाता है और खाद्य सुरक्षा से जुड़े उल्लंघनों पर कितनी सख्ती दिखाई जाती है.
ग्राहकों की भी इसमें भूमिका है. मिठाई खरीदते समय उन्हें प्रदर्शित तारीख देखनी चाहिए. जानकारी न मिलने या अस्पष्ट होने पर दुकानदार से पूछना चाहिए. साथ ही, केवल तारीख के आधार पर मिठाई को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए. उसकी ताजगी, गंध, रंग और रखरखाव पर भी ध्यान देना जरूरी है.

