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सितंबर से जनवरी तक यूपी की ब्यूरोक्रेसी में दिख सकते हैं बड़े फेरबदल

सितंबर से जनवरी के बीच कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के रिटायरमेंट से अहम पद खाली होंगे. यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन कुर्सियों पर नई तैनातियां और तबादले प्रशासनिक टीम की तस्वीर बदल सकते हैं

यूपी में 46 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर
यूपी में 46 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर
अपडेटेड 15 सितंबर , 2026

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में अगले पांच महीनों के दौरान होने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के रिटायरमेंट प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल का आधार बन सकते हैं. सितंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच 1990 बैच की अर्चना अग्रवाल, 1990 बैच के दीपक कुमार, 1994 बैच के अमित कुमार घोष और 1989 बैच के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी सेवा से बाहर होंगे. 

केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात यूपी कैडर के वरिष्ठ अधिकारी कामरान रिजवी का भी अक्टूबर में कार्यकाल समाप्त होना है. इन अधिकारियों के पास राजस्व, परिवहन, कृषि, औद्योगिक विकास, वित्त, नागरिक उड्डयन और स्वास्थ्य जैसे सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां हैं. 

इसलिए मामला सिर्फ कुछ अधिकारियों की विदाई तक सीमित नहीं है. एक पद पर होने वाला बदलाव कई दूसरे विभागों में जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और उसके बाद तबादलों की पूरी श्रृंखला शुरू कर सकता है.

सितंबर में राजस्व परिषद की कुर्सी पर फैसला

सबसे पहला बड़ा बदलाव 30 सितंबर को अर्चना अग्रवाल के रिटायरमेंट के साथ होगा. 1990 बैच की अर्चना अग्रवाल फिलहाल राजस्व परिषद की चेयरमैन और अपर मुख्य सचिव परिवहन हैं. उनके पास एक साथ दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं. 

अर्चना अग्रवाल (फाइल फोटो)
अर्चना अग्रवाल (फाइल फोटो)

नौकरशाही में चर्चा है कि 1991 बैच के बीएल मीणा को राजस्व परिषद का चेयरमैन बनाया जा सकता है. उनके साथ अपर मुख्य सचिव परिवहन का दायित्व भी जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर से होना है.

राजस्व परिषद की कुर्सी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध प्रदेश के भूमि और राजस्व प्रशासन से है. ऐसे समय जब सरकार चुनाव से पहले राजस्व मामलों, जमीन से जुड़े विवादों और प्रशासनिक शिकायतों के निस्तारण पर जोर दे रही है इस पद पर तैनाती महज वरिष्ठता के आधार पर नहीं बल्कि प्रशासनिक अनुभव और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप होने की संभावना है.

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि अर्चना अग्रवाल के स्थान पर नियुक्ति पहला बदलाव होगा लेकिन इसका असर यहीं नहीं रुकेगा. यदि किसी मौजूदा वरिष्ठ अधिकारी को राजस्व परिषद की जिम्मेदारी दी जाती है तो उसके खाली होने वाले पद पर दूसरे अधिकारी की तैनाती करनी होगी. इस तरह एक नियुक्ति से तबादलों की श्रृंखला बन सकती है.

APC और IIDC कौन संभालेगा?

अक्टूबर का महीना यूपी की ब्यूरोक्रेसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा. 1990 बैच के दीपक कुमार 31 अक्टूबर को रिटायर होंगे. वे वरिष्ठता क्रम में मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल के बाद आते हैं और इस समय कई महत्वपूर्ण पद संभाल रहे हैं. 

दीपक कुमार कृषि उत्पादन आयुक्त यानी APC और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त यानी IIDC के अलावा वित्त, संस्थागत वित्त एवं बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के अपर मुख्य सचिव हैं. वे UPEIDA के चेयरमैन और नागरिक उड्डयन विभाग के अपर मुख्य सचिव भी हैं. UP DASP के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का अतिरिक्त दायित्व भी उनके पास है. यही वजह है कि उनका रिटायरमेंट सरकार के सामने सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती पैदा करेगा. 

दीपक कुमार कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ और दूसरी जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं (फाइल फोटो)
दीपक कुमार कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ और दूसरी जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं (फाइल फोटो)

इतने बड़े पोर्टफोलियो को किसी एक अधिकारी को सौंपना या अलग-अलग अधिकारियों में बांटना, दोनों ही स्थिति में कई स्तर पर बदलाव होंगे. जानकारी के मुताबिक APC के लिए 1992 बैच के अनुराग श्रीवास्तव का नाम प्रमुखता से चर्चा में है. 

वहीं IIDC के लिए 1993 बैच के आलोक कुमार को मजबूत दावेदार माना जा रहा है. यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो पहली बार लंबे समय से एक ही अधिकारी के पास केंद्रित कई अहम जिम्मेदारियां अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों में बांटी जा सकती हैं.

यह बदलाव सरकार की औद्योगिक निवेश नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा. सरकार निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और ग्राउंड-ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी कर रही है. ऐसे में IIDC और UPEIDA जैसे संस्थानों में प्रशासनिक निरंतरता महत्वपूर्ण होगी. यही कारण है कि सरकार के सामने अनुभव और निरंतरता बनाम नई टीम को आगे बढ़ाने का विकल्प होगा.

वरिष्ठ अधिकारियों को मिलेगा एक्सटेंशन?

सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि क्या सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद भी जिम्मेदारी में बनाए रखना चाहेगी. खासतौर पर दीपक कुमार और मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल के मामले में यह चर्चा महत्वपूर्ण है. 

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अतीत में मुख्य सचिव के अलावा अन्य अधिकारियों को सेवा विस्तार देने की परंपरा सीमित रही है. हालांकि सरकार किसी अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर सकती है. दीपक कुमार के मामले में भी ऐसी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है. 

विश्लेषकों के मुताबिक सरकार के लिए यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि समय और प्राथमिकताओं से भी जुड़ा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अगले कुछ महीनों में तेज होंगी. ऐसे में सरकार उन अधिकारियों को प्राथमिकता दे सकती है जिन्हें मौजूदा नीतियों, निवेश परियोजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की गहरी जानकारी है. 

मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल का मामला इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. 1989 बैच के गोयल जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. उन्हें जुलाई 2025 में मुख्य सचिव बनाया गया था और उनका निर्धारित कार्यकाल जनवरी 2027 तक है. अगर सरकार उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रशासनिक नेतृत्व में निरंतरता बनी रह सकती है. 

अगर ऐसा नहीं होता तो नए मुख्य सचिव के चयन के साथ नौकरशाही में वरिष्ठता क्रम और शीर्ष पदों का पूरा समीकरण बदल सकता है. 

माना जा रहा है कि गोयल की सेवानिवृत्त‍ि के दौरान राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी होगी. ऐसे में कार्यकाल बढ़ाने या नई तैनाती में चुनाव आयोग की भूमिका भी अहम हो जाएगी. 

ACS से लेकर जिलों तक दिखेगा असर

शीर्ष स्तर के रिटायरमेंट का असर अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. जब किसी वरिष्ठ अधिकारी को APC, IIDC, वित्त या परिवहन जैसे विभाग मिलेंगे तो संबंधित विभागों में तैनात अधिकारियों के कार्यक्षेत्र भी बदल सकते हैं. 

इसी क्रम में लंबे समय से एक ही विभाग में तैनात अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों को भी इधर से उधर किए जाने की चर्चा है. सरकार की कोशिश यह हो सकती है कि रिटायर हो रहे अधिकारियों की जगह नए चेहरों को जिम्मेदारी देने के साथ कुछ पुराने अधिकारियों का विभाग भी बदला जाए.

जिलों में भी बदलाव की संभावना इसी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है. लंबे समय से एक ही जिले में तैनात जिलाधिकारियों को हटाकर 2012, 2013 और 2014 बैच के अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों में मौका दिया जा सकता है. 

कुछ 2017 बैच के अधिकारियों को भी जिलाधिकारी पद पर तैनाती मिल सकती है. दरअसल जुलाई और अगस्त में भी सरकार ने आईएएस स्तर पर कई तबादले किए हैं. सितंबर में भी जालौन और बहराइच समेत कई जिलों के जिलाधिकारी बदले गए हैं. इससे संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव से पहले फील्ड प्रशासन की टीम को भी धीरे-धीरे पुनर्गठित कर रही है.

चुनाव से पहले नई प्रशासनिक टीम का आधार?

इस पूरे फेरबदल को केवल रिटायरमेंट से पैदा हुई रिक्तियों के तौर पर देखना अधूरा होगा. अगले कुछ महीनों में यूपी सरकार को एक साथ तीन मोर्चों पर काम करना है: बड़े निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना, प्रशासनिक मशीनरी को चुनावी मोड में तैयार करना और कानून-व्यवस्था से लेकर विकास योजनाओं तक जिलों में सरकार की प्राथमिकताओं को तेजी से लागू करना. इसीलिए सितंबर से जनवरी के बीच होने वाली नियुक्तियां 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक टीम की तस्वीर काफी हद तक तय कर सकती हैं.

लखनऊ में अवध गर्ल्स डिग्री कालेज की प्राचार्य बीना राय के मुताबिक के मुताबिक इस फेरबदल में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण होंगी. पहली, सरकार वरिष्ठता के बजाय प्रदर्शन और विशेषज्ञता के आधार पर APC और IIDC जैसे पदों पर नियुक्ति करती है या नहीं. 

दूसरी, क्या लंबे समय से एक ही विभाग संभाल रहे अधिकारियों को बदला जाता है. तीसरी और सबसे अहम, मुख्य सचिव और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा विस्तार या सेवानिवृत्ति के बाद नई जिम्मेदारी देकर प्रशासन में निरंतरता बनाए रखने का विकल्प चुना जाता है या नहीं. 

यानी अगले पांच महीने यूपी की ब्यूरोक्रेसी के लिए सिर्फ रिटायरमेंट का दौर नहीं होंगे. यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कौन अधिकारी किस कुर्सी पर होगा और किसके हाथ में सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों की कमान होगी इसका खाका तैयार करने का समय भी होगा.

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