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महिला वोट के लिए नकद का सहारा, बीजेपी-सपा में मची होड़

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला वोटरों को साधने की कोशिश तेज, BJP की संभावित 50 हजार रुपए की सहायता योजना के जवाब में अखिलेश यादव ने सालाना 40 हजार रुपए देने का वादा किया

CM Yogi Adityanath and Akhilesh Yadav (File Photo: PTI)
योगी सरकार ने फिलहाल महिलाओं के लिए योजना की घोषणा नहीं की है लेकिन अखिलेश यादव पहले ही वादा कर चुके हैं
अपडेटेड 14 अगस्त , 2026

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं लेकिन महिला वोटरों को साधने की होड़ अभी से तेज हो गई है. सियासत में अब यह सवाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि महिलाओं को कौन कितना सीधा आर्थिक लाभ देने का वादा करता है. 

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार महिलाओं के लिए एक ऐसी वित्तीय सहायता योजना पर विचार कर रही है जिसके तहत पात्र महिलाओं को कुल 50 हजार रुपए तक दिए जाने की संभावना है. वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही सत्ता में आने पर गरीब महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए देने और हर साल इसमें बढ़ोतरी का वादा कर चुके हैं. 

यानी 2027 की लड़ाई में महिला वोटर अब केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं बल्कि एक अलग और निर्णायक राजनीतिक वर्ग के तौर पर उभर रही हैं.

6 करोड़ से ज्यादा महिला वोटरों पर नजर

उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में महिलाओं का महत्व लगातार बढ़ा है. 10 अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में प्रदेश में कुल 13.39 करोड़ मतदाता हैं. इनमें 6.09 करोड़ महिलाएं हैं, जो कुल मतदाताओं का 45.46 प्रतिशत हैं. पुरुष मतदाताओं की संख्या 7.30 करोड़ यानी 54.54 प्रतिशत है.

ऐसे में महिला वोटरों के रुख में मामूली बदलाव भी विधानसभा की 403 सीटों के नतीजों पर असर डाल सकता है. यही वजह है कि BJP और सपा दोनों महिलाओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी हैं. 

यूपी के कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या करीब 45 फीसदी है
यूपी के कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या करीब 45 फीसदी है

BJP सरकार की संभावित योजना के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सीधे तौर पर नकद सहायता योजना की पुष्टि नहीं की लेकिन महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताया. उन्होंने कहा कि अगर महिला संगठनों की ओर से ऐसी मांग आती है तो सरकार निश्चित रूप से उस पर विचार करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी. 

खन्ना के मुताबिक BJP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी. उन्होंने सरकार की मौजूदा योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, महिला स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया जा रहा है. 

सरकार के मुताबिक, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत करीब 28 लाख लाभार्थियों को छह किस्तों में 25 हजार रुपए दिए जा चुके हैं. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में भी महिलाओं को एक लाख रुपए तक की सहायता दी जा रही है. 

खन्ना का तर्क है कि महिला सशक्तिकरण BJP के लिए चुनावी मुद्दा भर नहीं है. उन्होंने समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि 2012 से 2017 के बीच सत्ता में रहते हुए सपा ने महिलाओं के लिए ऐसा कोई प्रभावी काम नहीं किया. लेकिन BJP की संभावित नई योजना को लेकर राजनीतिक संदेश मौजूदा योजनाओं से अलग है. 

जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव पर अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन इसमें महिलाओं के खाते में कुल 50 हजार रुपए तक पहुंचाने का विचार है. प्रस्तावित मॉडल में चुनाव के बाद सत्ता में लौटने पर 20 हजार रुपए की शुरुआती किस्त और इसके बाद 10-10 हजार रुपए की तीन किस्तों का विकल्प बताया जा रहा है. 

योजना का संभावित लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों की महिलाएं हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता देने पर विचार है. 

अखिलेश यादव ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए दिए जाएंगे
अखिलेश यादव ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए दिए जाएंगे

आय सीमा को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन 8 से 12 लाख रुपए सालाना से कम आय वाले परिवारों को संभावित लाभार्थियों में शामिल किए जाने की चर्चा है. यानी BJP की रणनीति केवल महिला मतदाताओं की संख्या को देखते हुए उन्हें साधने की नहीं है. 

कोशिश यह भी है कि सरकार और महिला लाभार्थी के बीच सीधा आर्थिक रिश्ता बनाया जाए. जिस महिला के बैंक खाते में सीधे पैसा पहुंचता है, उसके लिए सरकार की कल्याणकारी नीति का अनुभव अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत हो जाता है.

अखिलेश ने बढ़ाई वादे की रकम

BJP की संभावित योजना की खबरों के बीच अखिलेश यादव ने राजनीतिक चुनौती को तुरंत आर्थिक सहायता की रकम के सवाल पर ला खड़ा किया है. उन्होंने दोहराया है कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए देगी और इस राशि में हर वर्ष बढ़ोतरी की जाएगी. 

दिसंबर 2025 में अखिलेश ने पहली बार गरीब महिलाओं के लिए इस सालाना सहायता की घोषणा की थी. अखिलेश ने BJP की संभावित 20 हजार रुपए की शुरुआती किस्त को लेकर भी निशाना साधा. उनका तर्क है कि BJP सरकार पिछले दस वर्षों में ऐसी आर्थिक सहायता दे सकती थी लेकिन उसने प्रचार-प्रसार पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए. 

सपा नेता ने यह सवाल भी उठाया कि अगर दस साल तक सालाना 50 हजार रुपए दिए जाते तो पांच लाख रुपए होते और प्रस्तावित 20 हजार रुपए उस रकम का महज चार प्रतिशत हैं. अखिलेश ने BJP पर चुनाव जीतने के लिए पैसे के इस्तेमाल पर निर्भर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं ऐसे वादों के झांसे में नहीं आएंगी. 

अखिलेश ने BJP पर निशाना साधते हुए दूसरे राज्यों में नकद सहायता योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई देरी और भुगतान संबंधी समस्याओं का भी जिक्र किया. लेकिन सपा के लिए इस रणनीति का महत्व सिर्फ BJP को जवाब देने तक सीमित नहीं है. 

2022 के विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ाने और 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' जैसे नारों के बावजूद कांग्रेस को बड़ा चुनावी लाभ नहीं मिला था. वहीं BJP ने अपेक्षाकृत कम महिला उम्मीदवार उतारकर भी महिला विजेताओं की सबसे बड़ी संख्या हासिल की थी. 

कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को लुभाने के लिए 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान चलाया था
कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को लुभाने के लिए 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान चलाया था

इससे राजनीतिक दलों को एक संदेश मिला कि महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व के मुद्दे से नहीं, बल्कि उनके रोजमर्रा के आर्थिक हितों से जोड़ना ज्यादा प्रभावी हो सकता है.

अखिलेश की सालाना 40 हजार रुपए की घोषणा इसी बदले हुए राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है. वे महिला मतदाता से यह पूछने की कोशिश कर रहे हैं कि उसे सरकार से केवल योजना का लाभ चाहिए या नियमित और निश्चित आर्थिक सहायता. 

दूसरी तरफ BJP के सामने चुनौती यह है कि अगर उसकी प्रस्तावित राशि सपा के वादे से कम रहती है तो विपक्ष उसे कम बताकर मुद्दा बना सकता है. और अगर BJP रकम बढ़ाती है तो चुनावी राजनीति सीधे-सीधे कल्याणकारी योजनाओं की बोली में बदल सकती है.

दूसरे राज्यों से यूपी ने क्या सीखा?

महिलाओं को सीधे नकद सहायता देने की राजनीति अब देश के कई राज्यों में चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है. मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना, बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और हरियाणा की दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना जैसे उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी असर डाल रहे हैं. 

महाराष्ट्र में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए देने वाली लाडकी बहिन योजना 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति के प्रमुख चुनावी मुद्दों में रही. मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना के जरिए महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता दी गई. बिहार में भी महिला केंद्रित आर्थिक सहायता को चुनावी राजनीति में प्रमुखता मिली. 

इन राज्यों के चुनाव नतीजों ने दूसरे राज्यों के दलों को यह सोचने के लिए मजबूर किया कि महिला वोट को केवल पारंपरिक जातीय या पारिवारिक राजनीतिक समीकरणों के जरिए नहीं समझा जा सकता. 

कर्नाटक में कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले गृह लक्ष्मी योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने दो हजार रुपए देने का वादा किया था. पश्चिम बंगाल में भी लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई. 

इन योजनाओं का दूसरा पहलू भी है. सीधे नकद भुगतान जितना राजनीतिक रूप से आकर्षक है, उसका प्रशासनिक क्रियान्वयन उतना ही चुनौतीपूर्ण है. कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के शुरुआती दौर में पंजीकरण, आधार लिंकिंग, राशन कार्ड और बैंक खातों से जुड़ी समस्याएं सामने आईं. कई लाभार्थियों को भुगतान में देरी की शिकायत रही. 

महाराष्ट्र में ई-केवाईसी, आधार और बैंक खाते के सत्यापन तथा लाभार्थी डेटा में गड़बड़ी के कारण भुगतान में अड़चनें आईं. यूपी सरकार के सामने भी यही चुनौती होगी. अगर ऐसी योजना लागू होती है तो करोड़ों संभावित लाभार्थियों की पहचान, आय सीमा तय करना, आधार और बैंक खातों का सत्यापन तथा समय पर भुगतान आसान काम नहीं होगा. 

राजनीतिक विश्लेषक सुशील पांडेय कहते हैं, “BJP उत्तर प्रदेश में संभावित सत्ता विरोधी रुझान को रोकने के लिए महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का दांव खेल रही है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में महिलाओं को आर्थिक मदद वाली योजनाओं का चुनावी असर BJP के लिए महत्वपूर्ण रहा है और उत्तर प्रदेश में भी पार्टी इसी मॉडल से लाभ लेने की उम्मीद कर सकती है.” 

उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में फिलहाल एक नया सवाल आकार ले रहा है: महिला वोट किसके साथ जाएगा? BJP के पास मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं और संभावित नई नकद सहायता का भरोसा है, जबकि अखिलेश यादव रकम और नियमित आर्थिक सहायता के वादे के जरिए मुकाबला करना चाहते हैं. 

6.09 करोड़ महिला मतदाताओं वाला उत्तर प्रदेश अब इस राजनीतिक मुकाबले का सबसे बड़ा मैदान है. 2027 में फैसला सिर्फ जातीय समीकरणों और पारंपरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय हो सकता है कि किस पार्टी का 'खाते में पैसा' वाला वादा महिला वोटर को ज्यादा भरोसेमंद लगता है.

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