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सरदार सरोवर परियोजना : गुजरात के साथ समझौते पर मध्य प्रदेश में छिड़ा विवाद

सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े समझौते पर मध्य प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि मोहन यादव सरकार गुजरात के सामने झुक गई

सरदार सरोवर परियोजना समझौते के दौरान चारों राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे
अपडेटेड 10 जुलाई , 2026

7 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के अपने समकक्षों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिस्सा लिया. इस बैठक का उद्देश्य नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करना था.

पुनर्वास और राज्यों के बीच पानी के बंटवारे समेत करीब 30 मुद्दे लंबे समय से लंबित थे.

मध्य प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस ने BJP सरकार पर गुजरात के दबाव में झुकने और राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया. दूसरी ओर मोहन यादव ने कहा कि सौहार्दपूर्ण बातचीत के चलते गुजरात को पुनर्वास से जुड़ी देय राशि में मध्य प्रदेश का हिस्सा काफी कम हो गया है. उनके मुताबिक इससे राज्य को करीब 1,270 करोड़ रुपए की बचत होगी.

यादव ने कहा कि फरवरी में अटॉर्नी जनरल की राय के अनुसार पुनर्वास खर्च में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत, यानी करीब 1,500 करोड़ रुपए थी. लेकिन 7 जुलाई की बैठक के बाद यह घटकर 16.17 प्रतिशत रह गई है. इसका मतलब है कि अब राज्य को गुजरात को 231.8 करोड़ रुपए देने होंगे.

यादव ने कहा कि गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत हो गई है जबकि महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटकर 7.66 प्रतिशत रह गई है. पुनर्वास में हिस्सेदारी के तौर पर गुजरात को अन्य राज्यों से 553.4 करोड़ रुपए मिलेंगे.

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के तहत कुल बिजली उत्पादन का 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलता है. इसके अलावा उज्जैन, धार, इंदौर और पीथमपुर में सिंचाई और जलापूर्ति का भी लाभ राज्य को मिल रहा है.

हालांकि कांग्रेस ने पूरी तरह अलग आंकड़े पेश किए. पार्टी के प्रदेश सचिव कुणाल चौधरी ने कहा कि परियोजना जंगलों, गांवों और कृषि भूमि डूबने से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश को हुआ है. उनका दावा है कि गुजरात को मध्य प्रदेश को मुआवजे के तौर पर 7,669 करोड़ रुपए देने थे लेकिन इसके बजाय मध्य प्रदेश ने ही गुजरात को 550 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई.

चौधरी ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध किया था. लेकिन 2014 में केंद्र में BJP सरकार आने के बाद बांध की ऊंचाई 138 मीटर से बढ़ाकर 192 मीटर कर दी गई. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को आवंटित 18.25 एमएएफ (मिलियन एकड़ फुट) पानी का कभी पूरा उपयोग नहीं हो सका. राज्य अधिकतम 12 एमएएफ पानी ही इस्तेमाल कर पाता है.

BJP के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने कांग्रेस पर भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "राज्यों के बीच 30 वर्षों से लंबित मुद्दों का समाधान कर लिया गया है."

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