कर्नाटक में पिछड़े वर्गों का आरक्षण लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहा है और अब यह एक अहम मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. 2015 में कर्नाटक देश का पहला राज्य बना जिसने नई OBC आरक्षण नीति बनाने के मकसद से ‘जाति जनगणना’ कराई थी लेकिन सर्वे रिपोर्ट आने में करीब 10 साल लग गए. आखिरकार यह प्रक्रिया बेनतीजा ही रही.
रिपोर्ट के आंकड़ों को पुराना माना गया. इसके बाद 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरामैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने दोबारा सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक सर्वे कराने का आदेश दिया. इस साल मई में नई रिपोर्ट तैयार हुई और सरकार को सौंप दी गई. यह रिपोर्ट सिद्धरामैया की जगह डी.के. शिवकुमार के कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने से कुछ दिन पहले सरकार को सौंपी गई थी.
जाति जनगणना की रिपोर्ट लागू करना 2023 के कांग्रेस चुनावी घोषणापत्र का वादा था और पार्टी नेता राहुल गांधी के प्रमुख मुद्दों में भी शामिल था लेकिन कर्नाटक के कुछ प्रभावशाली जाति समूह इसका विरोध करते रहे हैं, इसलिए यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर काफी संवेदनशील है.
29 सितंबर को कोच्चि में 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ' में कर्नाटक के श्रम और रोजगार मंत्री संतोष एस. लाड ने कहा, "जहां तक (जाति) जनगणना की बात है, हम अब इसके आखिरी दौर में हैं. आने वाले कुछ महीनों में यह जनगणना निश्चित तौर पर सामने आ जाएगी."
इस कॉन्क्लेव के सत्र 'काउंटेड बाई कास्ट : शुड पॉप्यूलेशन साइज डिक्टेट सोशल जस्टिस आर्किटेक्चर?' में भाग लेने के दौरान उन्होंने यह भी कहा "जब आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे तब उनके आधार पर पूरे देश में बहस होनी चाहिए. इस देश में 60 फीसदी OBC लोगों की आवाज (विधानसभा) और संसद में नहीं है."
इसी सत्र के दूसरे प्रतिभागी कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के उपनेता और BJP नेता अरविंद बेलाड ने OBC आरक्षण का जोरदार समर्थन किया. उन्होंने कहा, "हमें OBC के लिए आरक्षण चाहिए, इसमें कोई शक नहीं है. शिक्षा, अर्थव्यवस्था और कारोबार के क्षेत्र में हमने जो हासिल किया है उसका बार-बार अध्ययन करना और उसे फिर से देखना जरूरी है."
बेलाड ने मंडल आयोग के समय से ही OBC आरक्षण के मामले में कांग्रेस पर काम न करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, "बात करना एक चीज है. हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री OBC हैं. क्या कांग्रेस कह सकती है कि उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार राहुल गांधी नहीं होंगे और कोई OBC नेता होगा?"
इसके जवाब में लाड का कहना था कि देश में OBC की 3,743 से ज्यादा छोटे-छोटे समुदाय हैं और उन्हें प्रतिनिधित्व की जरूरत है. उन्होंने बताया, "इसीलिए आरक्षण अधिकार है. यह प्रतिनिधित्व है, कोई खैरात नहीं."
सत्र की मुख्य बातें
संतोष एस. लाड
"अगर किसी व्यक्ति को रेस के लिए फरारी दी जाए और किसी दूसरे को साइकिल तो मुकाबला नहीं हो सकता. इस देश में अगर कोई लड़का या लड़की ऐसे बहुत गरीब परिवार में पैदा होता है, जहां कोई सुविधा नहीं है तो क्या वह सुविधाभोगी वर्ग तक पहुंच पाएगा? इसी वजह से आरक्षण अधिकार है. यह प्रतिनिधित्व है, कोई खैरात नहीं."
"कर्नाटक में सामाजिक-आर्थिक अध्ययन किया गया है. जब आंकड़े उपलब्ध होंगे, तब पूरे देश में बहस होनी चाहिए. इस देश में 60 फीसदी OBC लोगों की आवाज विधानसभा और संसद में नहीं है."
"अगर आप भारत में OBC को देखें तो आज उनकी आबादी करीब 55-60 फीसदी है लेकिन विधानसभा और संसद में उनका प्रतिनिधित्व एक बड़ी चुनौती है. इसकी वजह है कि वे पैसे और जाति के मामले में मुकाबला नहीं कर पाते. सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पास न तो जमीन है और न ही कारोबार."
अरविंद बेलाड
"किसी भी तरह का आरक्षण लोगों को सशक्त बनाने का एक जरिया है. BJP ने एक OBC प्रधानमंत्री दिया है. सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नरेंद्र मोदी OBC हैं."
"आरक्षण जरूरी है लेकिन हमारा संवैधानिक पक्ष है कि इसे आबादी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए."
"जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की. हमारी सरकार ने जनता दल के साथ मिलकर इसे लागू किया था. कर्नाटक में भी हाल में OBC आयोग ने एक रिपोर्ट दी है. उन्होंने उसे भी स्वीकार नहीं किया है. बात करना अलग बात है. हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री OBC हैं. क्या कांग्रेस कह सकती है कि उसका अगला प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार राहुल गांधी नहीं, कोई OBC नेता होगा?"

