11 सितंबर की दोपहर कांग्रेस कैंपेन कमेटी की बैठक समापन की ओर बढ़ रही थी. तभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बैठक में मौजूद अशोक चांदना से कहा, "आपको धरने पर बैठने की क्या आवश्यकता थी, आप मंत्री होकर सरकार के खिलाफ धरने देते हैं." इस पर अशोक चांदना ने उल्टा सीएम से ही सवाल कर लिया, "जब धरने-प्रदर्शन के बिना काम ही नहीं होते तो ओर क्या करें? चांदना के इस जवाब पर नाराजगी जताते हुए गहलोत बोले, "अगर काम नहीं होते तो आप मुझे कहते." चांदना ने कहा, "एक ट्रांसफर के लिए भी अगर सीएम से कहना पड़े तो ऐसे मंत्री होने का क्या फायदा? आप रख लो अपना मंत्री पद." बैठक में मौजूद किसी भी नेता को चांदना के ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी. अशोक गहलोत ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से कहा, "सरकार के खिलाफ इस तरह धरना देने वाले को नोटिस देना चाहिए.
यह सारी बातचीत राजस्थान के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अशोक चांदना के 8 सितंबर को बिजली विभाग के खिलाफ बूंदी में दिए गए धरने को लेकर हो रही थी. चांदना ने धरने से चार दिन पहले ट्वीट कर 6 सितंबर को धरना दिए जाने की जानकारी दी. देर रात उन्होंने एक दूसरा ट्वीट कर कहा, "ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि बूंदी, नैनवां, हिंडौली के बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान 2-3 दिन में कर दिया जाएगा, इसलिए 8 सितंबर तक के लिए धरना स्थगित किया जाता है. इसके बाद 8 सितंबर को दोपहर अशोक चांदना अपने समर्थकों के साथ बूंदी जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए. उसी दिन बूंदी जिले के बिजली विभाग के एक आला अधिकारी का तबादला कर दिया.
यह पहला मौका नहीं था जब चांदना ने अपनी सरकार के खिलाफ इस तरह का कदम उठाया. 26 मई 2022 को भी चांदना ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम एक ट्वीट कर कहा, "मुख्यमंत्री जी मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि मुझे इस जलालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज आपके प्रमुख सचिव कुलदीप रांका को दे दिया जाए क्योंकि वैसे भी रांका ही सभी विभागों के मंत्री हैं." तीन साल पहले बिजली विभाग के एक कर्मचारी के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने के मामले में भी मंत्री अशोक चांदना काफी चर्चा में रहे थे. राजस्थान में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले अशोक चांदना अकेले मंत्री और विधायक नहीं हैं. चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के कई ओर विधायक भी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और बयानबाजी जैसी मुखालफत कर रहे हैं.
12 सितंबर को कोटा में चंबल रिवर फ्रंट के उद्घाटन से ठीक पहले कोटा के सांगोद से विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने काले कपड़े पहनकर अपना सिर मुंडन करवाया और बाल मुख्यमंत्री को भेजने का दावा किया. इस दौरान भरत सिंह ने गृहमंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए अपने समर्थकों के साथ कोटा के गुमानपुरा से एक रैली भी निकाली और भ्रष्टाचार के पुतले का दहन किया. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में भरतसिंह ने कहा, "मुख्यमंत्री गांधीवादी नेता माने जाते हैं और वे गांधीवाद की बात भी करते हैं. गांधीजी का पूरा जीवन सत्य पर आधारित था. मुख्यमंत्री भ्रष्ट लोगों को संरक्षण दे रहे हैं, इसलिए मैंने उनसे कहा है कि आपका ईमान मर चुका है. मुझे मुख्यमंत्री का ईमान मरता हुआ दिखा, इसलिए मैंने अपना मुंडन कराया है और अपने केश उनको भिजवा रहा हूं." काबिलेगौर है कि पिछले तीन साल भरत सिंह खान मंत्री प्रमोद जैन भाया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं. सिंह अब तक करीब दो दर्जन पत्र मुख्यमंत्री को भेज चुके हें.
कांग्रेस के विधायक और गौसेवा आयोग के अध्यक्ष के साथ मंत्री का दर्जा पाने वाले मेवाराम जैन ने पानी व बिजली के मुद्दे को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ 15 सितंबर को बाड़मेर में धरना देने की घोषणा की है. सरकार की ओर से मेवाराम जैन को मनाने की कोशिश की जा रही हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने धरना रद्द किए जाने का फैसला नहीं किया है. मेवाराम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा, "मैं पानी को लेकर तीन महीने से परेशान हूं. अधिकारियों के साथ में कई बैठकें की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. लिहाजा मैं अब 15 तारीख से बाड़मेर के कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठूंगा."
11 अप्रैल 2023 को पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के कार्यकाल में हएु भ्रष्टाचार की जांच को लेकर जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दिया था. इसके एक महीने बाद आरपीएससी में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग को लेकर उन्होंने 11 से 15 मई तक अजमेर से जयपुर तक की पदयात्रा निकाली. ओबीसी आरक्षण की विसंगतियों को लेकर 30 सितंबर 2022 को पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ जयपुर में धरना दिया. हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ट्वीट कर कहा, "मुख्यमंत्री जी मैं स्तब्ध हूं, आखिर आप चाहते क्या हैं? ओबीसी आरक्षण मामले में जो भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, मैं लड़ूंगा."
इससे पूर्व डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक और आदिवासी नेता गणेश घोघरा भी जमीन विवाद को लेकर सरकार और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामनारायण मीणा भी भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर सीधा हमला कर चुके हैं. मीणा ने कहा था कि मंत्री भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं, अब यह मुख्यमंत्री की कमजोरी या मजबूरी है कि वे ऐसे मंत्रियों को नहीं हटा पा रहे हैं. कांग्रेस की ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा भी विभिन्न मुददों पर सरकार पर निशाना साधती रही हैं. पिछले दिनों शिव से कांग्रेस के वयोवृद्ध विधायक अमिन खान भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कांग्रेस ने मुझे टिकट नहीं दिया तो यहां से कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं जितेगा. अगर मेरे अतिरिक्त कोई अन्य मुसलमान शिव विधानसभा सीट से जीतकर दिखाए तो मैं उसे एक लाख रूपये इनाम दूंगा.

