राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और परिवहन विभाग के मुखिया प्रेमचंद बैरवा के नाबालिग बेटे का वायरल वीडियो इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है. इसमें उपमुख्यमंत्री बैरवा का स्कूल में पढ़ने वाला बेटा बड़े-बड़े टायर वाली खुली जीप को हाथ छोड़कर जयपुर की सड़कों पर दौड़ा रहा है और पुलिस की गाड़ी उसे एस्कॉर्ट कर रही है. दिलचस्प बात है कि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद खेद जताने के बजाय अपने बेटे आशु बैरवा की इस हरकत पर उसका बचाव करते ही नजर आए. 27 सितंबर को बैरवा ने कहा, ‘‘मेरे बेटे ने कोई नियम नहीं तोड़ा है, उसका कोई दोष नहीं है. अब मेरे बेटे को भी पैसे वालों की गाड़ी में बैठने का मौका मिल रहा है. उसकी सुरक्षा के लिए मेरी गाड़ी उसके पीछे चल रही थी, इसमें बुरा क्या है.’’
इधर, कांग्रेस प्रवक्ता जसवंत गुर्जर का कहना है, ‘‘लगता है डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त परिवहन मंत्री को नियम-कायदों की जानकारी नहीं है. अगर उन्हें कानून की थोड़ी सी भी जानकारी होती तो वे 17 साल की उम्र में गाड़ी चलाने वाले अपने बेटे की हरकतों पर स्पष्टीकरण देने की जगह माफी मांगते.’’
इस प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिस जीप को उपमुख्यमंत्री का 17 वर्षीय बेटा दौड़ा रहा है वह सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे पुष्पेंद्र भारद्वाज की थी और उपमुख्यमंत्री के बेटे के साथ रील बनाते समय भारद्वाज का बेटा कार्तिकेय भी मौजूद था. पुष्पेंद्र कांग्रेस के वही नेता हैं जिन्हें इस विधानसभा चुनाव में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सांगानेर से हराया था. इस वीडियो की बात करें तो जीप में आगे की सीट पर सवार कार्तिकेय और आशु ने बेल्ट भी नहीं लगा रखी थी. पुष्पेंद्र भारद्वाज भी अपने बेटे की इस हरकत पर उसका बचाव करते ही नजर आए. भारद्वाज ने कहा, ‘‘कार्तिकेय और आशु दोनों दोस्त हैं और अगर वो गाड़ी चलाते हुए रील बना रहे हैं तो इसमें क्या गलत है.’’
कांग्रेस और भाजपा, दोनों के नेताओं को भले ही अपने बेटों की हरकत में कुछ गलत न दिखता हो लेकिन कानून की नजर में ऐसा नहीं है. राजस्थान हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु यदुवंशी बताते हैं, ‘‘मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 ए के तहत अगर 18 वर्ष से कम आयु का कोई नाबालिग दुपहिया या चौपहिया वाहन चलाता है तो उसके परिजनों पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है और तीन साल की सजा से दंडित किया जा सकता है. सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1000 रुपए अलग से जुर्माने का प्रावधान है. इसके साथ ही ऐसे वाहन के पंजीकरण को 12 माह के लिए रद्द भी किया जा सकता है.’’
राजस्थान में किसी मंत्री के बेटे का इस तरह सरेआम नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई मंत्री पुत्र इसी तरह के आरोपों में घिर चुके हैं. राजस्थान में मंत्री पुत्रों के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देशित करने, डराने और धमकाने के मामले भी गाहे-बगाहे सामने आते रहे हैं.
पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी के खिलाफ दुष्कर्म और मारपीट का मामला चल रहा है. बीते 26 सितंबर को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहित जोशी के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग ठुकराते हुए उसे नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने उसे राहत देने से इंकार करते हुए जांच जारी रखने के निर्देश दिए. युवती ने रोहित के खिलाफ पिता महेश जोशी के नाम की धौंस दिखाकर जान से मारने की धमकी और ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए हैं.
भाजपा के पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया के बेटे सिद्धार्थ महरिया जयपुर में हिट एंड रन के मामले में आरोपी रहे हैं. 1 जुलाई 2016 को सिद्धार्थ महरिया ने जयपुर के जनपथ मार्ग पर तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार से दो पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों को कुचल दिया था जिसमें एक ऑटो में सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. सिद्धार्थ महरिया उस वक्त नशे में था. सिद्धार्थ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ और कुछ समय बाद ही वह जमानत पर बाहर आ गया. 12 अगस्त 2023 को इस मामले में अदालत के फैसले में सिद्धार्थ महरिया और वाहन के मालिक को मृतक आश्रितों को 58 लाख रुपए की राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए.
इसी तरह दिसंबर 2008 में जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य और पूर्व सांसद गायत्री देवी के पोते विजित सिंह ने शराब के नशे में कार चलाते हुए गांधी नगर इलाके में सड़क पार कर रही छात्राओं को टक्कर मार दी थी जिसमें एक छात्रा की मौत हो गई.
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री और लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन करने वाले महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बेटे प्रेम प्रताप भी कई बार आरोपों में घिर चुके हैं. यूथ कांग्रेस के चुनाव में प्रेम प्रताप का बांसवाड़ा के युवा नेता पृथ्वी राज मालवीय के हाथ पैर तोड़ देने और जान से मारने की धमकी का वीडियो वायरल हुआ था. महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बेटे चंद्रवीर सिंह की शादी में बंदूकों से फायरिंग का मामला काफी सुर्खियों में रहा था. प्रेम प्रताप अपने जन्म दिन पर खुलेआम फायरिंग करते रहे हैं.
अब यह देखना दिलचस्प रहेगी कि राजस्थान की भजनलाल सरकार और भाजपा संगठन उपमुख्यमंत्री के बेटे की इन हरकतों से कितना सबक लेती हैं. क्या भविष्य में भी मंत्री पुत्रों की इस तरह की कारस्तानियां सामने आती रहेंगी या सरकार उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी.

