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कहां अटक गया नोएडा का फिल्म सिटी प्रोजेक्ट?

मानचित्र मंजूर, जमीन उपलब्ध, डेवलपर तय, लेकिन फाइनेंशियल क्लोजिंग में देरी से नहीं शुरू हो सका निर्माण. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी फिल्म सिटी परियोजना समयसीमा से पीछे खिसक रही है

नोएडा फिल्म सिटी की घोषणा 2020 में हुई थी
अपडेटेड 5 अगस्त , 2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2020 में नोएडा फिल्म सिटी के निर्माण की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि यह भारत में फिल्म निर्माण का सबसे बड़ा हब होगी और इस घोषणा ने तुरंत ही पूरे देश का ध्यान खींचा था. लेकिन योगी सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना आज छह साल के बाद भी कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रही है.

योजना के अनुसार यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-21 में लगभग एक हजार एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय फिल्म सिटी विकसित की जानी है. यह इलाका नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास है.

यीडा ने फिल्म सिटी के निर्माण के पहले चरण का मानचित्र एक वर्ष पहले ही स्वीकृत कर दिया था, जमीन की सभी बाधाएं भी समाप्त हो चुकी हैं, डेवलपर का सिलेक्शन भी हो चुका है लेकिन निर्माण शुरू होने की सबसे अहम शर्त यानी फाइनेंशियल क्लोजिंग पूरी न होने से परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है. 

यही वजह है कि जिस परियोजना को नोएडा एयरपोर्ट के साथ उत्तर भारत की नई पहचान माना जा रहा था, वह अब लगातार लेट-लतीफी का सामना कर रही है.

लगभग 1000 हजार एकड़ में बननी है फिल्म सिटी
लगभग 1000 हजार एकड़ में बननी है फिल्म सिटी

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस परियोजना को केवल एक फिल्म स्टूडियो के रूप में नहीं बल्कि रोजगार, पर्यटन, मनोरंजन और मीडिया उद्योग के बड़े इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की थी. 

अनुमान था कि इससे उत्तर भारत के कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को मुंबई का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और प्रदेश में ही फिल्म, वेब सीरीज, ओटीटी कंटेंट तथा डिजिटल मीडिया उद्योग का बड़ा आधार तैयार होगा. साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और दिल्ली-एनसीआर की निकटता इसे देश का सबसे आधुनिक मीडिया हब बना सकती थी. 

हालांकि शुरुआत से ही परियोजना आसान नहीं रही. लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली पूरी परियोजना के लिए पहले निवेशक सामने नहीं आए. लगातार दो वैश्विक निविदाएं जारी होने के बावजूद कोई डेवलपर आगे नहीं आया.

इसके बाद यीडा ने रणनीति बदलते हुए परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का निर्णय लिया. पहले चरण में 230 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी विकसित करने की योजना बनाई गई. तीसरे प्रयास में बोनी कपूर की साझेदारी वाली भूटानी समूह की कंपनी बेव्यू भूटानी इंटरनेशनल फिल्म सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने सबसे ऊंची बोली लगाकर परियोजना हासिल कर ली.

इसके बाद उम्मीद जगी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह ड्रीम प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा. जून 2025 में यीडा ने पहले चरण के विकास का मानचित्र भी स्वीकृत कर दिया. उस समय यह भी चर्चा रही कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों फिल्म सिटी का शिलान्यास कराया जाएगा. लेकिन यह केवल अटकल बनकर रह गया. 

फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर साझेदारी वाली भूटानी समूह की कंपनी फिल्म सिटी बना रही है
फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर साझेदारी वाली भूटानी समूह की कंपनी फिल्म सिटी बना रही है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाद में यीडा क्षेत्र में कई औद्योगिक परियोजनाओं का शिलान्यास करने पहुंचे मगर फिल्म सिटी का निर्माण शुरू नहीं हो सका. परियोजना की सबसे बड़ी बाधा अब फाइनेंशियल क्लोजिंग बन गई है. 

नियमों के अनुसार डेवलपर को यह प्रमाणित करना होता है कि परियोजना निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था पूरी हो चुकी है. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सकता. 

यीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, "फिल्म सिटी परियोजना का निर्माण शुरू होने से पहले फाइनेंशियल क्लोजिंग अनिवार्य शर्त है. कंपनी को यह बताना होगा कि परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन किस प्रकार जुटाए गए हैं. इसके बाद अन्य औपचारिकताएं पूरी होने पर ही निर्माण शुरू किया जा सकेगा. फिलहाल फाइनेंशियल क्लोजिंग पूरी नहीं हुई है." 

डेवलपर कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है. भूटानी समूह के अधिकारियों के अनुसार परियोजना की अनुमानित लागत 1510 करोड़ रुपए है लेकिन निर्माण पूरा होने तक लागत में स्वाभाविक वृद्धि होगी. इसी कारण विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर बातचीत चल रही थी. अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. एक सप्ताह के भीतर फाइनेंशियल क्लोजिंग पूरी हो जाएगी और अगस्त के अंत तक निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है."

हालांकि परियोजना की प्रगति को देखें तो समय पहले ही काफी निकल चुका है. पहले चरण को तीन वर्षों में पूरा किया जाना है, लेकिन लगभग तेरह महीने बीत जाने के बावजूद निर्माण की शुरुआत तक नहीं हो सकी है. इससे परियोजना की निर्धारित समयसीमा पर भी सवाल उठने लगे हैं. 

दरअसल यह पहली बार नहीं है जब फिल्म सिटी किसी बाधा में फंसी हो. पिछले वर्ष तक सबसे बड़ी समस्या जमीन अधिग्रहण थी. करीब 120 बीघा भूमि के एक बड़े काश्तकार के साथ सहमति नहीं बनने से यीडा आवश्यक जमीन नहीं खरीद पा रहा था. यही कारण था कि निर्माण शुरू नहीं हो सका. 

बाद में कई दौर की बैठकों के बाद किसान और प्राधिकरण के बीच सहमति बनी. किसान ने प्राधिकरण की निर्धारित दर पर भुगतान कर भूखंड लेने का विकल्प स्वीकार किया और समझौते के बाद जमीन खरीद की प्रक्रिया पूरी हुई. इसके बाद निर्माण का रास्ता साफ माना जाने लगा था. यीडा के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं समय-समय पर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते रहे हैं. 

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के दौरान भी उन्होंने फिल्म सिटी की प्रगति की जानकारी ली थी. फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू किया जाएगा. लेकिन जमीन की समस्या समाप्त होने के बाद अब वित्तीय प्रक्रिया नई बाधा बन गई है.

फिल्म सिटी का पहला चरण भी सामान्य रियल एस्टेट परियोजना जैसा नहीं है. यीडा ने स्पष्ट शर्त रखी है कि शुरुआती चरण में मुख्य रूप से फिल्म निर्माण से जुड़ा बुनियादी ढांचा ही विकसित किया जाएगा. पहले चरण की 230 एकड़ भूमि में लगभग 155 एकड़ क्षेत्र में फिल्म उद्योग से जुड़ी सुविधाएं और 75 एकड़ में व्यावसायिक विकास किया जाएगा. 

शुरुआत में फिल्म स्टूडियो, साउंड स्टेज, पोस्ट-प्रोडक्शन यूनिट, फिल्म इंस्टीट्यूट और शूटिंग से जुड़े तकनीकी ढांचे तैयार किए जाएंगे. बाद के चरणों में मॉल, होटल, विला और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित होंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में कमर्शियल रिटर्न सीमित होने के कारण निवेश जुटाने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है. 

यीडा ने पहले चरण में लगभग 80 एकड़ का नक्शा पहले ही स्वीकृत कर दिया है. इसमें 26 एकड़ ग्रीन बेल्ट और 54 एकड़ क्षेत्र में फिल्म निर्माण से जुड़ी सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है. इसके बाद शेष लगभग 150 एकड़ क्षेत्र का विकास दूसरे और तीसरे चरण में होगा. 

पूरी फिल्म सिटी में आधुनिक स्टूडियो, साउंड स्टेज, पोस्ट-प्रोडक्शन सेंटर, फिल्म प्रशिक्षण संस्थान, रनवे, हेलीपैड और विभिन्न थीम आधारित स्थायी सेट विकसित किए जाने हैं. संसद भवन, समुद्र, चारधाम और सौर ऊर्जा आधारित विशाल सेट भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे ताकि विभिन्न प्रकार की फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग एक ही परिसर में संभव हो सके. 

परियोजना को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए यीडा समानांतर रूप से बुनियादी ढांचे का विकास भी कर रहा है. फिल्म सिटी को 130 मीटर, 100 मीटर और 75 मीटर चौड़ी सड़कों से जोड़ा जा रहा है. निर्माणाधीन इंटरचेंज के माध्यम से इसे सीधे यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना है. इस लिहाज से बुनियादी ढांचे की तैयारी तेजी से आगे बढ़ चुकी है लेकिन मुख्य परियोजना अभी भी प्रारंभिक चरण में अटकी हुई है.

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि इतनी बड़ी मीडिया परियोजना में फाइनेंशियल क्लोजिंग सामान्य प्रक्रिया से कहीं अधिक जटिल होती है. एक वरिष्ठ इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ के अनुसार, "ऐसी परियोजनाओं में केवल निर्माण लागत नहीं बल्कि भविष्य के संचालन, तकनीकी उपकरण, स्टूडियो इन्फ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक व्यावसायिक मॉडल के लिए भी निवेश सुनिश्चित करना पड़ता है. यदि शुरुआत मजबूत वित्तीय आधार पर नहीं होगी तो परियोजना बीच में अटकने का खतरा बना रहेगा." 

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय से उत्तर प्रदेश को फिल्म निर्माण का वैकल्पिक केंद्र बनाने की बात करते रहे हैं. राज्य सरकार पहले ही फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए नई फिल्म नीति लागू कर चुकी है, विभिन्न सब्सिडी योजनाएं शुरू की गई हैं और प्रदेश के अनेक शहरों में फिल्मों की शूटिंग बढ़ी भी है. 

फिल्म सिटी उस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जा रही है. अब सबकी नजर अगस्त महीने पर टिकी है. यदि डेवलपर कंपनी अपने दावे के अनुसार फाइनेंशियल क्लोजिंग पूरी कर लेती है और निर्माण कार्य शुरू हो जाता है तो लंबे समय से अटकी परियोजना आखिरकार जमीन पर दिखाई देने लगेगी. लेकिन यदि इसमें फिर देरी हुई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह ड्रीम प्रोजेक्ट एक बार फिर समयसीमा से और पीछे खिसक जाएगा. 

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