शनिवार को इंडिया गठबंधन की जूम मीटिंग में जब बड़ी विनम्रता से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने संयोजक का पद अस्वीकार कर दिया तो ज्यादातर लोगों के लिए यह एक हैरतभरी बात थी. क्योंकि जून, 2023 में पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक से ही यह कयास लगते रहे थे कि उन्हें इस गठबंधन का संयोजक बनाया जायेगा.
अब तक हुई चार बैठकों में से हर बैठक से पहले यह कहा जाता था कि इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री को संयोजक बनाने की घोषणा होगी और हर बार यह मसला टल जाता और नीतीश के नाराज होने की खबरें मीडिया में चलने लगतीं. मगर इस बार जब पहली दफा इस मसले पर गंभीर प्रस्ताव आया तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि इसकी कोई जरूरत नहीं.
हालांकि बिहार की राजनीति को नजदीक से समझने वाले जानते थे कि चौथी बैठक के बाद से ही नीतीश का सब्र टूट गया है और अब वे शायद ही इस पद को स्वीकार करें. इस बात का आभास जदयू के वरिष्ठ प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार के पांच जनवरी के उस तीखे बयान से समझ आता है, जब उन्होंने कहा था, “नीतीश कुमार ने संयोजक पद के लिए आवेदन दिया है क्या? वे इंडिया गठबंधन के सृजनकर्ता हैं, वे किसी पद के उम्मीदवार नहीं हैं.”
उसी रोज नीतीश के करीबी माने जाने वाले बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा, “हमें तो अपनी 16 सिटिंग लोकसभा सीटें चाहिए ही, कांग्रेस को कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है, वह वे राजद से ही बात करके तय करेंगे.” जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी तो हाल में भाजपा और एनडीए की दूसरी पार्टी की तर्ज पर इंडिया गठबंधन को इंडी गठबंधन बोल बैठे थे. जाहिर है, इस बैठक से पहले ही जदयू और कांग्रेस के बीच के रिश्ते काफी कटु हो चुके थे.
शनिवार की इंडिया गठबंधन की जूम मीटिंग में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को छोड़कर ज्यादातर सहयोगी दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए. इस बैठक के बाद एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि बैठक में नीतीश कुमार को संयोजक बनाने का प्रस्ताव आया, जिसे उन्होंने विनम्रता पूर्वक ठुकरा दिया. नीतीश ने कहा, "चूंकि सभी विपक्षी दलों के अध्यक्षों का समूह है ही इसलिए किसी संयोजक की जरूरत नहीं." यही बात जदयू नेता संजय झा ने भी मीडिया से कही.
इस बीच यह खबर भी आई कि किसी ने लालू प्रसाद यादव का नाम संयोजक के तौर पर पेश किया, जिस पर नीतीश ने कहा कि उन्हें ही बना दिया जाये.
इंडिया टुडे से बातचीत में जदयू के मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, “पहले मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम इंडिया गठबंधन के नेता के तौर पर आया, जिस पर सभी सहमत थे. नीतीश जी का नाम संयोजक के तौर पर भी सर्वसम्मति से आया, मगर नीतीश जी ने मना कर दिया. उनका कहना था कि सीट शेयरिंग के काम में तेजी लायी जाये. हम लोग अभी कर्पूरी ठाकुर के शताब्दी वर्ष के बड़े आयोजन की तैयारी में जुटे हैं, जो पटना में होना है.”
एक बड़े जदयू नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि नीतीश जी का असल कंसर्न इंडिया गठबंधन की सुस्त रफ्तार को लेकर है. भाजपा और एनडीए चुनाव की तैयारी में तेजी से जुटे हैं, जबकि कांग्रेस जैसे इसकी कोई फिक्र ही नहीं है. उन्हें यह बात भी नहीं कचोटती कि दो टर्म से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली पड़ा है. नीतीश जी इसी वजह से सितंबर, 2022 से ही विपक्षी दलों को एकजुट करने के अभियान में जुट गये थे, मगर कांग्रेस कभी इस यात्रा तो कभी उस चुनाव में जुटी रही.
हालांकि नीतीश के इनकार की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि उन्हें संयोजक बनाने के साथ-साथ मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का चेयरपर्सन बनाने की भी बातें चल रही थीं. नीतीश किसी भी दोयम दर्जे के पद को स्वीकार नहीं करना चाह रहे थे. उनके इनकार के बाद राज्य भाजपा की ओर से उन पर तंज भरी टिप्पणियां की जा रही हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी कहते हैं, “बिहार की जनता को बड़ी उम्मीदें थीं कि किसी बिहारी व्यक्ति को इंडी गठबंधन का कन्वीनर बनाया जायेगा. मगर ऐसा नहीं हुआ.” वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा, “पीएम उम्मीदवार तो दूर की बात, नीतीश को संयोजक बनाने के लिए भी कोई तैयार नहीं. उनका विरोध ममता दीदी ही कर रही थीं, तभी वे बैठक में नहीं आयीं.”
हालांकि बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “सीट शेयरिंग पर बातचीत सकारात्मक रही. मैंने और राहुल जी ने कांग्रेस की न्याय यात्रा में सभी को शामिल होने का निमंत्रण दिया है. वे अपनी सुविधा के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं.” शरद पवार ने कहा, “उम्मीद है अब सीट शेयरिंग का मामला जल्द सुलझ जायेगा.”
हालांकि बिहार में उलझन सीट शेयरिंग की नहीं है. जो गांठ कांग्रेस और जदयू के बीच उलझती जा रही है, उसका नतीजा आने वाले दिनों में क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी.

