केरल में 26 जून की एक घटना अब भी चर्चा में है. उस दिन एक मुस्लिम महिला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व कार्यकर्ता का अंतिम संस्कार किया था. वे कैंसर से पीड़ित थे और परिवार ने उनकी देखभाल छोड़ दी थी.
34 वर्षीय इरफाना इकबाल उप्पाला, कासरगोड जिला पंचायत की सदस्य हैं. उन्होंने नारायणन थोट्टाथोडी का अंतिम संस्कार किया. थोट्टाथोडी की 26 जून को कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज में मुंह के कैंसर से मौत हो गई थी. उनका अंतिम संस्कार मंजेश्वरम विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले उनके पैतृक गांव चिग्रुपडावु में किया गया.
64 वर्षीय थोट्टाथोडी करीब एक महीने से बीमार थे. वे गांव की एक दुकान के बाहर बेहोश मिले थे. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. IUML की स्थानीय नेता इरफाना अस्पताल में उनसे मिलीं. उन्होंने अपने NGO शेख जायद फाउंडेशन के जरिए उनकी मदद की पेशकश की. यह संस्था वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वृद्धाश्रम भी चलाती है.
इरफाना बताती हैं, "थोट्टाथोडी की बहन कमला ने उनकी देखभाल करने में असमर्थता जताई थी. उनकी पत्नी और बच्चे भी उन्हें अपने घर में नहीं रखना चाहते थे. जिला कलेक्टर की मदद से हमने उन्हें कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया क्योंकि उन्हें पैलिएटिव केयर की जरूरत थी."
थोट्टाथोडी की मौत के बाद उनके परिवार और बहन ने कथित तौर पर इरफाना से कहा कि उनके पास अंतिम संस्कार कराने के साधन नहीं हैं. इरफाना ने कहा, "मेरे सार्वजनिक जीवन में यह एक असामान्य स्थिति थी. लेकिन मुझे यह तय करने में बिल्कुल समय नहीं लगा कि मुझे क्या करना चाहिए. हमें हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना था. मैंने 26 जून की दोपहर चिग्रुपडावु गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया."
इस मानवीय कदम के बाद विवाद भी शुरू हो गया. 29 जून को कासरगोड के BJP नेताओं ने इरफाना के दावे को चुनौती दी. कासरगोड जिला BJP अध्यक्ष एम.एल. अश्विनी ने दावा किया कि थोट्टाथोडी का अंतिम संस्कार RSS से जुड़े संगठन सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने किया था. अश्विनी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "इरफाना इकबाल उप्पाला इस घटना का राजनीतिक फायदा उठा रही हैं. हमारे लोगों, सेवा भारती ने अंतिम संस्कार किया था."
मंजेश्वरम लंबे समय से BJP के लिए एक राजनीतिक मुकाबले का क्षेत्र रहा है. इस विधानसभा सीट से 2011 से लगातार IUML के उम्मीदवार जीतते आ रहे हैं.
इरफाना अपने कदम पर कायम हैं. उन्होंने कहा, "मैंने जो किया, उसके गवाह लोग हैं. अंतिम संस्कार करते समय मैंने मृतक के धर्म या राजनीतिक संबद्धता पर विचार नहीं किया. मेरा मानना है कि गरीब और परित्यक्त लोगों को भी सम्मानजनक विदाई मिलनी चाहिए."

