मुंबई के वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर को नया और आकर्षक रूप देने की योजना के तहत यहां वॉक-थ्रू एक्वेरियम बनाया जाएगा, जिसमें ऐक्रेलिक सुरंगें होंगी. इन सुरंगों से गुजरते समय पर्यटकों को ऐसा महसूस होगा मानो वे पानी के नीचे चल रहे हों.
इसके साथ ही, हम्बोल्ट पेंगुइन के लिए भी जगह बढ़ाई जाएगी. ये पेंगुइन चिड़ियाघर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं. भायखला चिड़ियाघर या रानी बाग के नाम से मशहूर इस जगह पर शहर का पहला सीलिंग एक्वेरियम (छत पर बना एक्वेरियम) भी बनाया जाएगा.
भायखला चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ. संजय त्रिपाठी ने बताया कि एक्वेरियम में 14 मीटर और 36 मीटर लंबी दो ऐक्रेलिक सुरंगें होंगी. इसके जनवरी-फरवरी 2027 तक शुरू होने की संभावना है. इसमें बेलनाकार, पॉप-अप, सीलिंग और चौकोर आकार के टैंक भी होंगे. 550 वर्ग मीटर में फैले इस एक्वेरियम में समुद्री मछलियों की करीब 60 प्रजातियां रखी जाएंगी. इनमें भारतीय जलक्षेत्र में पाई जाने वाली मछलियों पर खास ध्यान दिया जाएगा. इस परियोजना पर 60 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है.
नगर निगम के इस चिड़ियाघर में आम दिनों में लगभग 5,000 से 6,000 लोग आते हैं, जबकि वीकेंड पर यह संख्या बढ़कर 15,000 से 25,000 तक पहुंच जाती है.
मुंबई आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों की घूमने की योजना में चिड़ियाघर और वनस्पति उद्यान जरूर शामिल होते हैं. एक्वेरियम शुरू होने के बाद यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है लेकिन इसके लिए अलग से एंट्री फीस लेने की कोई योजना नहीं है.
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि इस परियोजना के तहत बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) हम्बोल्ट पेंगुइन के बाड़े की क्षमता भी बढ़ा रहा है ताकि वहां 40 पेंगुइन रखे जा सकें. साल 2016 में दक्षिण कोरिया से लाए गए हम्बोल्ट पेंगुइन की संख्या आठ (तीन नर और पांच मादा) से बढ़कर अब 25 हो गई है. जब ये पेंगुइन पहली बार लोगों के सामने लाई गईं थी तब इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. आज भी ये चिड़ियाघर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं.
भायखला चिड़ियाघर को सेवरी से उसकी मौजूदा जगह पर लाया गया था और 1863 में इसे लोगों के लिए खोला गया था. इसके परिसर में डॉ. भाऊ दाजी लाड संग्रहालय भी है. यह मुंबई के सबसे पुराने सार्वजनिक उद्यानों में से एक है. शुरुआत में इसका नाम महारानी विक्टोरिया के नाम पर रखा गया था.
इस एक्वेरियम का निर्माण ऐसे समय में हो रहा है, जब मरीन ड्राइव पर बना मशहूर तारापोरवाला एक्वेरियम बंद है और इसे फिर से विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है. अगले साल भायखला एक्वेरियम शुरू होने के बाद यह शहर का एकमात्र चालू एक्वेरियम होगा.
1951 में शुरू हुए तारापोरवाला एक्वेरियम का नाम पारसी समाज के डी.बी. तारापोरवाला के नाम पर रखा गया था. यह कोविड 19 के समय से बंद है. वर्ली से मरीन ड्राइव तक कोस्टल रोड के निर्माण से इस इमारत की संरचनात्मक मजबूती पर असर पड़ा है. 4,369.05 वर्ग मीटर के इस भूखंड पर तीन इमारतें हैं. इनमें एक्वेरियम, मत्स्य विभाग के आयुक्त का कार्यालय और एक ऐसी इमारत शामिल है जहां पहले वॉटर फिल्टरेशन सिस्टम और कैंटीन थी.

