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महाराष्ट्र में आर्केस्ट्रा बार के नाम पर डांस बार चलाने पर कैसे लगेगी रोक?

डांस बार पर लागू पाबंदियों से बचने के लिए लाइव म्यूजिक और ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस के इस्तेमाल की शिकायतें मिली थीं. अब महाराष्ट्र सरकार कानून से जुड़ी ये खामियां दूर करेगी

डांस बार कल्चर पर शिकंजा कसने के लिए महाराष्ट्र ने 2016 में एक कानून बनाया था
अपडेटेड 14 जुलाई , 2026

महाराष्ट्र विधानसभा ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद उन कानूनी खामियों को दूर करना है जिनकी वजह से 'लाइव म्यूजिक' या ऑर्केस्ट्रा के लाइसेंस का इस्तेमाल कर डांस बार गैरकानूनी तरीके से चलाए जा रहे थे.

साल 2005 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने डांस बार पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस फैसले को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री रहे दिवंगत आर.आर. पाटिल की पहल माना गया था.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 में इस प्रतिबंध को रद्द कर दिया था. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने बार डांसरों के अपने पेशे को जारी रखने के अधिकार को बरकरार रखते हुए महाराष्ट्र सरकार को इन प्रतिष्ठानों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया. हालांकि, राज्य सरकार ने डांस बार खोलने की अनुमति देने से पहले 26 सख्त शर्तें लगा दीं. इसे उनके संगठन ने अदालत में चुनौती दी.

2016 में राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से 'महाराष्ट्र होटल, रेस्तरां और बार रूम में अश्लील नृत्य निषेध तथा वहां कार्यरत महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम, 2016' को मंजूरी दी. इस विधेयक के मसौदे की जांच सभी दलों के विधायकों की एक समिति ने की थी.

नए कानून की सख्त शर्तों में यह शामिल था कि डांस बार शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों से कम से कम 1 किलोमीटर दूर हों. वे रिहायशी इलाकों में संचालित नहीं हो सकते. उनका संचालन केवल शाम 6 बजे से रात 11.30 बजे तक ही हो सकेगा. साथ ही स्मोकिंग पर भी प्रतिबंध रहेगा.

महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और 'महाराष्ट्र होटल, रेस्तरां और बार रूम में अश्लील नृत्य निषेध तथा वहां कार्यरत महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम' में संशोधन के लिए यह विधेयक गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) पंकज भोयर ने पेश किया.

भोयर ने कहा कि 2016 के बाद डांस बार की संख्या में कमी आई है. हालांकि, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत ऑर्केस्ट्रा और लाइव म्यूजिक के लाइसेंस से जुड़े प्रावधानों का दुरुपयोग किया गया. इस संबंध में राज्य सरकार को शिकायतें मिली थीं. उन्होंने कहा कि इस कानून के मौजूदा प्रावधान इतने प्रभावी नहीं थे कि उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई की जा सके.

भोयर ने कहा कि अब ऑर्केस्ट्रा के लाइसेंस 'होटल, रेस्तरां और बार रूम में अश्लील नृत्य निषेध तथा वहां कार्यरत महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम' के तहत दिए जाएंगे. इससे अश्लील नृत्य और अन्य उल्लंघनों के मामलों में कार्रवाई की जा सकेगी. उदाहरण के तौर पर, अश्लील डांस करने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना और/या पांच साल तक की कैद हो सकती है.

नए विधेयक के उद्देश्य और कारण संबंधी विवरण में कहा गया है कि यह देखा गया है कि 2016 के अधिनियम के तहत होटल, रेस्तरां और बार रूम में डांस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत दिए जाने वाले लाइव म्यूजिक (ऑर्केस्ट्रा) के लाइसेंस का इस्तेमाल किया जा रहा था.

इस पर रोक लगाने के लिए सरकार का मानना है कि लाइव म्यूजिक कार्यक्रमों को 2016 के अधिनियम के दायरे में लाना जरूरी है. साथ ही होटल, रेस्तरां और बार रूम में लाइव म्यूजिक (ऑर्केस्ट्रा) के लाइसेंस को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए. इसी उद्देश्य से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और अश्लील नृत्य निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है.

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