महाराष्ट्र में हाल ही में लागू हुए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली कार्रवाई करते हुए पुणे पुलिस ने कथित धर्मांतरण के आरोप में उत्तर प्रदेश के 22 वर्षीय युवक और भारतीय मूल के ब्रिटेन निवासी व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया है.
ये मामले 5 और 9 अगस्त को महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता कानून, 2026 के तहत दर्ज किए गए. पुणे पुलिस की विशेष शाखा के उपायुक्त प्रशांत अमृतकर ने दोनों मामलों की पुष्टि की और कहा कि जांच चल रही है.
पहले मामले में पुलिस ने 22 वर्षीय युवक के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) कानून, 2012 और धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया है. पंजाब के लुधियाना निवासी एक व्यक्ति, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी पिछले साल इस युवक के साथ घर से चली गई थी.
परिवार ने उसे पुणे में ढूंढ लिया. आरोप है कि उसके साथ यौन शोषण किया गया और उसे युवक के धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश की जा रही थी.
दूसरे मामले में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक बिशप पंकज देवनूर के खिलाफ खड़क पुलिस थाने में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया गया है. आरोप है कि वे उपदेशों के जरिए लोगों को अपने धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहे थे. देवनूर ने 7 अगस्त को पुणे के गुरुवार पेठ स्थित एक चर्च में उपदेश दिया था. वे मैनचेस्टर में रहते हैं, लेकिन मूल रूप से सतारा जिले के वाई के रहने वाले हैं.
इस मामले में शिकायतकर्ता पुणे के भवानी पेठ का एक रिक्शा चालक है. उसका कहना है कि सोशल मीडिया पर देवनूर की शिक्षाओं के बारे में देखने के बाद उसने चर्च में उनका उपदेश सुनने का फैसला किया.
शिकायतकर्ता के मुताबिक वह इस सोच के साथ वहां गया था कि यह ‘हिंदुओं का धार्मिक प्रवचन’ है. उसका आरोप है कि देवनूर ने वहां मौजूद हिंदुओं को यीशु का मार्ग अपनाने की बात समझाने के लिए हिंदू धर्म के संदर्भों का इस्तेमाल किया. उसने आरोप लगाया कि इस सभा का उद्देश्य ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराना था.
अमृतकर ने कहा कि बिशप को देश से बाहर भेजने जैसे कानूनी कदम उठाए जाएंगे. हालांकि, देवनूर की ओर से पैरवी कर रहे वकील विजय सिंह थोंबरे ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया.
थोंबरे ने कहा, "यह चर्च की 142वीं वर्षगांठ थी और बिशप को इसके लिए बुलाया गया था. वे आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. उनके भाषण में ईसाई धर्म से जुड़े विषयों का जिक्र था. कुछ लोग आए और उन्होंने कार्यक्रम रोक दिया. पुलिस ने भी दखल दिया और उन्हें नोटिस जारी किया."
थोंबरे ने कहा कि शिकायत धर्मांतरण विरोधी कानून के प्रावधानों के खिलाफ है. कानून के मुताबिक शिकायत सिर्फ वही व्यक्ति या उसका रिश्तेदार दर्ज करा सकता है जिसका धर्मांतरण हुआ हो. इसके अलावा शिकायत में धर्मांतरण की कोशिश का कोई जिक्र भी नहीं है.
'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता कानून, 2026' में व्यक्ति, संगठन या संस्थान की ओर से कानून का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान है. इसमें अधिकतम 10 साल की जेल और 7 लाख रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कानून के कारण अल्पसंख्यकों के खिलाफ इसके गलत इस्तेमाल और पसंद, निजता और समानता जैसे अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका पैदा हुई है. उनका यह भी आरोप है कि कानून का मकसद अंतरधार्मिक विवाहों को रोकना है.
हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप है कि मुस्लिम पुरुष 'लव जिहाद' में शामिल हैं. यह एक आपत्तिजनक शब्द है, जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण के मकसद से शादी के लिए किया जाता है. ऐसे आरोपों से सांप्रदायिक तनाव भी पैदा हुआ है. फरवरी में पुणे के पास भीगवन में एक 21 वर्षीय व्यक्ति को कथित तौर पर दूसरे समुदाय के दो लोगों ने अगवा कर लिया था. महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने वाला देश का 13वां राज्य है.

