scorecardresearch
डार्क मोड

मध्य प्रदेश में 20 साल बाद फिर चलेंगी सरकारी बसें, क्या है नया मॉडल?

मध्य प्रदेश में दो दशक बाद फिर शुरू होने जा रही सरकारी बस सेवा PPP मॉडल पर चलेगी. 2031 तक 15,000 बसें चलाने, हर दिन 30 लाख यात्रियों को सेवा देने और राज्य की दो-तिहाई ग्राम पंचायतों को बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है

BSRTC festive discount bus service Bihar
एमपी में 2005 के दौरान सरकारी बसें बंद हो गई थीं (फोटो : AI)
अपडेटेड 24 सितंबर , 2026

मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC) कभी राज्य सरकार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल था. लेकिन बस सौदों और परमिट में राजनीतिक दखल और भ्रष्टाचार के आरोपों ने इसे धीरे-धीरे कमजोर कर दिया. इसके बाद राज्य में कोई सार्वजनिक सड़क परिवहन संस्था नहीं बची और शहरी तथा अंतर-जिला बस परिवहन पूरी तरह निजी हाथों में चला गया.

करीब दो दशक बाद 25 सितंबर को एक नई शुरुआत होने जा रही है. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस दिन सीएम सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत करेंगे. यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत चलने वाली परिवहन सेवा होगी. 

इसके तहत 351 बसें शुरू की जाएंगी, जिन्हें सात शहरों से चलाया जाएगा. इनमें 120 बसें अंतर-शहरी सेवाओं के लिए होंगी, जबकि बाकी बसें शहरों के भीतर चलेंगी.

राज्य सरकार की योजना 2031 तक इस सेवा के तहत 15,000 बसें चलाने की है. इनसे हर दिन 30 लाख यात्रियों को सफर कराने का लक्ष्य है. इसके अलावा 180 आधुनिक बस स्टॉप बनाए जाएंगे. 

सरकार भविष्य के परिवहन को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक बसों को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है. 2031 तक राज्य की 20,000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में से दो-तिहाई को बस सेवा से जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है.

सीएम सुगम परिवहन सेवा का संचालन एक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा. इसके लिए एक होल्डिंग कंपनी, एमपी पैसेंजर ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट लिमिटेड और उससे जुड़ी सात कंपनियां बनाई गई हैं. 

इन सात कंपनियों का मुख्यालय भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, भिंड, कटनी और देवास में होगा. एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बसों के रूट, समय पर संचालन, लोकेशन और रफ्तार जैसी चीजों पर नजर रखी जाएगी. बसें निजी ऑपरेटर उपलब्ध कराएंगे. उन्हें विज्ञापन से कमाई करने का भी मौका मिलेगा.

अपने चरम दौर में MPSRTC के पास 2,700 बसों का बेड़ा था. यह सिर्फ राज्य के जिलों, तहसीलों और गांवों को ही नहीं जोड़ता था, बल्कि शहरों में स्कूलों के लिए भी बसें चलाता था. 2005 में जब निगम आधिकारिक तौर पर बंद हुआ तब तक उसके बेड़े में बसों की संख्या घटकर 850 रह गई थी.

ADVERTISEMENT
Advertisement