7 सितंबर को प्रदर्शन कर रहे मेडिकल इंटर्न की वजह से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शाम के ज्यादातर समय यातायात व्यवस्था चरमरा गई. इस आंदोलन का असर अब राज्य के सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर भी पड़ने का खतरा है. इंटर्न की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाया जाए.
उस दिन शाम के सबसे व्यस्त घंटों के दौरान भोपाल का बड़ा हिस्सा थम गया. इंटर्न शहर के पुराने और नए हिस्सों को जोड़ने वाली एक प्रमुख सड़क पर धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास का घेराव करना चाहते थे लेकिन उन्हें वहां से करीब एक किलोमीटर पहले सुरक्षा बैरिकेड पर रोक दिया गया. यादव इस समय संयुक्त अरब अमीरात के आधिकारिक दौरे पर हैं.
इंटर्न ने गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन शुरू किया था. वे अपने मासिक स्टाइपेंड को 14,000 रुपए से बढ़ाकर 30,000 रुपए करने की मांग कर रहे थे. पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए पानी की बौछार की. इसके बाद इंटर्न पैदल मुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़े. लेकिन पुलिस ने उन्हें किलोल पार्क में रोक दिया. इसके बाद छात्र वहीं धरने पर बैठ गए.
किलोल पार्क पुराने और नए भोपाल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है. शाम 5 बजे से दफ्तरों से लौटने वाले लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी तो धरना स्थल के आसपास जाम लगने लगा. एक समय जाम करीब 4 किलोमीटर तक फैल गया.
कई लोगों ने घर पहुंचने के लिए पुराने शहर में वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की कोशिश की. वे बुधवारा बाजार, लेडी अस्पताल और भारत टॉकीज होते हुए निकले, लेकिन वहां भी जाम में फंस गए. इसी तरह न्यू मार्केट को जहांगीराबाद और तलैया से जोड़ने वाली सड़क पर भी यातायात ठप हो गया.
भोपाल के जिलाधिकारी प्रियंक मिश्रा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और मेडिकल इंटर्न से बात की. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से सड़क खोलने और यातायात बहाल करने की अपील की.
मिश्रा ने इंटर्न से कहा कि उनकी मांगों पर स्वास्थ्य आयुक्त एस. धनराजू विचार करेंगे. लेकिन इससे कोई रास्ता नहीं निकला. मिश्रा ने इंटर्न से सड़क खाली करने की अपील भी की क्योंकि जाम में मेडिकल इमरजेंसी वाले लोग फंसे हुए थे. लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे. कई लोगों ने बताया कि उनकी फ्लाइट और ट्रेन छूट गई.
हाल के दिनों में भोपाल में ट्रैफिक की हालत लगातार खराब होती जा रही है. शहर में लगने वाले कई जाम अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शनों की वजह से हैं. जुलाई में किसानों ने नर्मदापुरम रोड को जाम कर दिया था जिससे लोगों को भारी परेशानी हुई थी. पिछले हफ्ते व्यापारियों ने टीटी नगर में चल रही सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया था. इससे आसपास के इलाकों में जाम लग गया था.
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बाद से BJP शासित सरकारों पर प्रदर्शनकारियों के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं. भोपाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन के बाद हर जगह पुलिस प्रशासन रक्षात्मक हो गया है और प्रदर्शनकारियों को काफी छूट देने लगा है."
8 सितंबर तक मेडिकल इंटर्न का प्रदर्शन जारी था हालांकि सड़क का एक हिस्सा यातायात के लिए खोल दिया गया था. इस बीच आंदोलन ने और गंभीर रूप ले लिया. डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी सेवाएं बंद करने का ऐलान किया. इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और बेहद गरीब लोगों पर पड़ेगा, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.

