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केरल में सत्ताधारी UDF के संयोजक ने मुख्यमंत्री के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?

केरल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और UDF के संयोजक अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया है

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन (फोटो : हार्दिक छाबड़ा)
अपडेटेड 5 अक्टूबर , 2026

केरल में सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और कांग्रेस इस समय अपने ही गठबंधन के भीतर उठे विवाद को संभालने में जुटे हैं. गठबंधन के संयोजक और लोकसभा सांसद अडूर प्रकाश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पर आरोप लगाया है कि वे सहयोगी दलों से सलाह किए बिना शासन से जुड़े अहम फैसले ले रहे हैं.

74 वर्षीय प्रकाश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी रणनीतिकार हैं. वे 2019 से अटिंगल लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. प्रकाश कोन्नी से पांच बार विधानसभा के लिए चुने गए और पहले ओमन चांडी के नेतृत्व वाली UDF सरकारों में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं.

प्रकाश ने पिछले सप्ताह सतीशन सरकार के एक फैसले पर सवाल उठाए थे. सरकार ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता डॉ. एम.के. मुनीर को केरल प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष और फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव जी. देवराजन को नई दिल्ली में केरल का राज्य विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया था. IUML और फॉरवर्ड ब्लॉक, दोनों UDF के घटक दल हैं. इन दोनों पदों पर कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है.

प्रकाश अपने इस दावे पर कायम हैं कि इन नियुक्तियों के बारे में मुख्यमंत्री ने UDF से सलाह नहीं की थी. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, "मैं रिकॉर्ड पर कही गई अपनी बात पर कायम हूं और पार्टी (कांग्रेस) के उन ज्यादातर कार्यकर्ताओं की भावनाओं को व्यक्त कर रहा हूं जिन्होंने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काम किया."

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि UDF की बैठकें नहीं बुलाई जा रही हैं और गठबंधन के नेताओं को अहम घटनाक्रमों की जानकारी सिर्फ मीडिया के जरिए मिल रही है.

प्रकाश की टिप्पणियों को UDF के आलोचक राज्य में सत्ता संभालने के कुछ ही महीनों बाद गठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव के स्पष्ट संकेत के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि कुछ लोग इससे सहमत नहीं हैं. कासरगोड से कांग्रेस सांसद और पार्टी नेता राजमोहन उन्नीथन ने प्रकाश की आलोचना करते हुए कहा कि UDF संयोजक होने के नाते उन्हें अपनी शिकायतें सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थीं.

उन्नीथन ने कहा, "अडूर प्रकाश की जिम्मेदारी सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन का बचाव करना है. वे अपनी शिकायतें पार्टी के उचित मंचों पर उठा सकते थे."

इस खींचतान ने विपक्ष को स्वाभाविक रूप से सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है. CPI(M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने 3 अक्टूबर को कहा कि UDF के बिखरने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं. 

गोविंदन ने इंडिया टुडे से कहा, "UDF के संयोजक ने खुद कहा है कि उन्हें सरकार के फैसलों की जानकारी नहीं थी. बिना सलाह-मशविरा किए कोई सरकार लोकतांत्रिक तरीके से कैसे काम कर सकती है? वी.डी. सतीशन IUML के समर्थन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उन्हें हमारे कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा."

राजनीतिक टिप्पणीकार और पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. सेबेस्टियन पॉल ने UDF में इतनी तेजी से बढ़ते तनाव पर हैरानी जताई. वे कहते हैं, "वी.डी. सतीशन को जनता के भारी जनादेश और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के समर्थन के साथ सत्ता मिली थी लेकिन सत्ता में आने के थोड़े ही समय में लगता है कि उनका प्रभाव कम हो गया है. ऐसा लगता है कि गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री के कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने के तरीके को लेकर असंतोष बढ़ रहा है."

मुख्यमंत्री के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के बाद प्रकाश ने 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में केरल की प्रभारी AICC महासचिव दीपा दासमुंशी से मुलाकात की और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी.

इस बीच, AICC महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, जो सतीशन और प्रकाश के बीच चल रही खींचतान से दूरी बनाए हुए हैं, ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व घटनाक्रम से अवगत है और जरूरत के मुताबिक दखल देगा. 

यह संकेत मिल रहे हैं कि यह विवाद लंबा खिंच सकता है. सतीशन 5 अक्टूबर की देर शाम नई दिल्ली पहुंचे जहां वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और AICC के अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखेंगे.

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