
कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के पास एक महिला के कथित तौर पर चाकू लेकर उनके पास पहुंचने की घटना ने तृतीया तिथि की शाम दुर्गा पूजा समारोहों में उनकी वापसी को फीका कर दिया. इसके बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संयुक्त महासचिव डोला सेन ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठाए.
13 अक्टूबर को कालीघाट थाने के प्रभारी अधिकारी को भेजे गए ईमेल में डोला सेन ने आरोप लगाया कि तन्निष्ठा साहा नाम की एक महिला, जो खुद को ममता बनर्जी की भतीजी बता रही थी, ने हिंसक तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री के पास जाने की कोशिश की और उन्हें गालियां दीं.
सेन ने यह भी कहा कि महिला के पास कथित तौर पर चाकू था और वह नशे में लग रही थी. खबरों के अनुसार इसके बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया. खबर लिखे जाने तक इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी लेकिन घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई. सेन ने सवाल उठाया कि Z प्लस सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति के पास कथित तौर पर हथियार लेकर कोई हमलावर कैसे पहुंच सकता है.
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी दुर्गा पूजा के उद्घाटनों के अपने नियमित दौर से दूर रही थीं. मंगलवार शाम वे अपने आवास के पास स्थित एक स्थानीय क्लब कालीघाट मिलन संघ में पूजा का उद्घाटन करने पहुंचीं. बनर्जी पंडाल का उद्घाटन करने की तैयारी कर रही थीं, तभी शाम करीब 6 बजे कथित तौर पर यह घटना हुई. सेन के ईमेल के मुताबिक, वे ममता बनर्जी गुट के नेता बैश्वानर चट्टोपाध्याय के साथ पूजा स्थल जा रही थीं तभी महिला बनर्जी के पास पहुंची और उन्हें 'पिशी' यानी बुआ कहकर संबोधित किया.

सेन ने आरोप लगाया कि महिला ने कथित तौर पर चाकू लेकर बनर्जी की ओर दौड़ने की कोशिश की. इसके बाद वह सड़क पर लेट गई और उन्हें गालियां देती रही. शिकायत के अनुसार, महिला इलाके में स्वयंसेवक के तौर पर जानी जाती है और कथित तौर पर नशे की आदी है.
शाम करीब 7 बजे भेजे गए ईमेल की सब्जेट लाइन थी, 'श्रीमती ममता बनर्जी के खिलाफ संज्ञेय अपराध होने की जानकारी देने के संबंध में BNSS की धारा 173 के तहत सूचना'. सबूत के तौर पर भेजे गए तीन वीडियो अटैचमेंट का हवाला देते हुए इसमें पुलिस से मामले का संज्ञान लेने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत जानकारी दर्ज करने का अनुरोध किया गया था. यह धारा संज्ञेय अपराधों से जुड़ी जानकारी से संबंधित है.
सेन ने कहा इस कथित घटना ने Z प्लस सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ईमेल में कहा गया, "यह चिंता की बात है कि हमलावर जैसा कोई व्यक्ति Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति के आवास के गेट तक पहुंच सकती है. इससे किसी बड़ी साजिश की आशंका को लेकर सवाल उठते हैं."
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
सेन ने मौके पर पुलिसकर्मियों की कथित मौजूदगी और उनकी प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए. सेन के अनुसार, उन्होंने पास में खड़े दो पुलिसकर्मियों को इस मामले की जानकारी दी. दोनों ने खुद को राज्य पुलिस का कर्मचारी बताया और कथित तौर पर कहा कि वे कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र वाले इलाके में दखल नहीं दे सकते. सेन ने यह भी दावा किया कि पुलिस महिला को अपने साथ ले गई और उसे चाय दी.
ममता बनर्जी की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सेन ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार पर राजनीतिक हमला किया. उन्होंने सवाल किया, "क्या मौजूदा मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि पूर्व मुख्यमंत्री जीवित रहें?"
इस बयान से मामला और राजनीतिक हो गया. TMC नेता ने बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में कथित तौर गंभीर चूक का आरोप लगाया. खबरों के अनुसार, पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया था लेकिन जांच और घटना की सटीक परिस्थितियों के बारे में तत्काल कोई और जानकारी उपलब्ध नहीं है.
तापस रॉय का तृणमूल पर पलटवार
राज्य के उद्योग मंत्री रॉय ने सत्ता में TMC के 15 साल के कार्यकाल का हवाला देते हुए आलोचना को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग हैं. पिछले 15 साल में क्या वे (बनर्जी) राज्य की माताओं-बहनों, आम लोगों और कारोबारियों को सुरक्षा दे पाई थीं? अब वे रो रही हैं. क्या वे अपना कार्यकाल भूल गई हैं?"
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अधिकारी इस घटना के संबंध में निश्चित रूप से कदम उठाएंगे. सरकार बदलने के बाद भी बनर्जी राज्य की सबसे प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से एक बनी हुई हैं. इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच उनकी सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है.
ममता की पूजा समारोहों में वापसी
यह घटना ऐसे समय हुई, जब महालया के दौरान दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के बाद बनर्जी ने अपने इलाके में दुर्गा पूजा समारोहों में नियमित रूप से शामिल होना फिर से शुरू किया. शुरुआती हंगामे पर काबू पाने के बाद कालीघाट मिलन संघ में उद्घाटन समारोह आखिरकार संपन्न हुआ. हालांकि उनके इलाके में पूजा स्थल के बाहर हुई कथित झड़प अब राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई है.
TMC के लिए इस घटना ने नई BJP सरकार के तहत अपनी नेता की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, BJP ने इस आलोचना का रुख ममता बनर्जी के अपने कार्यकाल की ओर मोड़ने की कोशिश की है. महिला के कथित तौर पर उनके पास पहुंचने की परिस्थितियां, उसके पास चाकू होने के दावे और पुलिस की प्रतिक्रिया पर उठ रहे सवाल अब इस मामले के केंद्र में हैं. सेन के ईमेल में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है.
इससे पहले दिन में ममता बनर्जी की पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने अभियान को कोलकाता की सड़कों तक ले जाने की कोशिश की. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में राजाबाजार से पार्क सर्कस तक विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट की छात्र और युवा विंग की ओर से आयोजित इस मार्च को पुलिस और केंद्रीय बलों ने शुरुआती स्थान पर ही रोक दिया. अधिकारियों ने इसके पीछे आधिकारिक अनुमति नहीं होने का हवाला दिया.
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मौके पर प्रदर्शन जारी रखते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की. तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने BJP नेतृत्व वाले प्रशासन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर रास्ते बंद कर दिए और समर्थकों को आयोजन स्थल तक पहुंचने से रोक दिया.

