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साल दर साल फर्जी भर्ती परीक्षाओं का शिकार होते गुजरात के युवा

साल 2014 के बाद से 11 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका दिया है. व्हिसलब्लोअर का दावा है कि यह भ्रष्टाचार नहीं बल्कि एक संगठित कारोबार है.

सांकेतिक AI तस्वीर
सांकेतिक AI तस्वीर
अपडेटेड 27 जुलाई , 2026

साल 2014 से 2024 के बीच गुजरात में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के कम-से-कम 11 पेपर लीक हुए. ये परीक्षाएं गुजरात सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (GSSSB), गुजरात पब्लिक सर्विस कमीशन (GPSC) और अन्य राज्य भर्ती संस्थाओं ने आयोजित की थीं.

पेपर लीक की ने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका दिया. साथ ही, स्कूल शिक्षकों जैसे अहम सरकारी पद लंबे समय तक खाली पड़े रहे, जिससे सरकारी कामकाज भी प्रभावित हुआ. इस बीच 201 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा भी किया गया लेकिन आज तक किसी भी आरोपी को सजा नहीं मिली है. अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं.

पिछले पांच वर्षों में राज्य के लगभग हर बड़े पेपर लीक मामले का खुलासा करने वाले व्हिसलब्लोअर कार्यकर्ता युवराज सिंह जडेजा आरोप लगाते हैं, "वे छोटे मोहरों को गिरफ्तार करते हैं और फिर उन्हें जमानत पर छोड़ देते हैं. असल मास्टरमाइंड जो इसे भ्रष्टाचार की तरह नहीं बल्कि एक कारोबार की तरह चला रहे हैं, वे आज भी खुले घूम रहे हैं."

साल बीतते गए और पेपर लीक की सूची लगातार लंबी होती गई. कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं-

2017: टीएटी (टीचर एप्टीट्यूड टेस्ट) का पेपर सोशल मीडिया पर लीक हो गया. इस परीक्षा में 1,47,000 उम्मीदवार शामिल होने वाले थे. परीक्षा रद्द कर दी गई.

2021: हेड क्लर्क परीक्षा में लगभग 88,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे. आरोप था कि अहमदाबाद के एक प्रिंटिंग प्रेस से पेपर 10 से 15 लाख रुपए में बेचा गया. परीक्षा रद्द कर दी गई और 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया.

2021: डीजीवीसीएल विद्युत सहायक (इलेक्ट्रिकल असिस्टेंट) की परीक्षा रद्द कर दी गई.

2022: फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा में व्हाट्सऐप पर आंसर लीक हो गए. पुलिस ने मामले दर्ज किए लेकिन परीक्षा रद्द नहीं की गई.

2023: जूनियर क्लर्क परीक्षा में 1181 पदों के लिए लगभग 9,50,000 लोगों ने आवेदन किया. परीक्षा शुरू होने से सिर्फ पांच घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक हो गया. व्हिसलब्लोअर युवराज सिंह जडेजा ने सबूतों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई.

2023: जडेजा ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया जो भावनगर में कई सालों से सक्रिय था. यह गिरोह पैसे लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह 'डमी' उम्मीदवारों को सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बैठाता था.

हर बार लाखों उम्मीदवार अनिश्चितता में फंस गए. उन्हें परीक्षा की नई तारीख का इंतजार करना पड़ा जो कई मामलों में वर्षों बाद आई.

फरवरी 2023 में गुजरात विधानसभा ने गुजरात पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) बिल, 2023 पारित किया. यह कानून जनवरी 2023 में जूनियर क्लर्क परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद लाया गया था.

हालांकि, इसे पहले से रोकथाम करने वाला नहीं बल्कि घटना के बाद की प्रक्रिया वाला कानून माना गया. इसके अलावा, यह कानून पेपर लीक होने के बाद सजा देने पर ज्यादा जोर देता है. इसमें प्रश्नपत्रों की छपाई, उसके ट्रांसपोर्ट और सुरक्षित रख-रखाव के लिए जरूरी रोकथाम से जुड़ी व्यवस्था नहीं है. जब तक पुलिस जांच शुरू करती है तब तक उम्मीदवार अपना अवसर गंवा चुके होते हैं. कानून लागू होने के तीन साल बाद भी पेपर लीक की घटनाएं जारी रहीं.

2024 में विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2,38,000 से अधिक शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने सरकारी नौकरी के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था. विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में इनमें से केवल 32 लोगों को सरकारी नौकरी मिली.

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी लगातार इस परीक्षा संकट से युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाते रहे हैं. वे कहते हैं कि शिक्षित बेरोजगार युवाओं की यह संख्या वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाती क्योंकि इसमें केवल वही लोग शामिल हैं जिन्होंने सरकार के पास पंजीकरण कराया है.

वे कहते हैं, "हजारों बेरोजगार युवाओं को बार-बार परीक्षा देने में पैसा खर्च करना पड़ा, समय बर्बाद हुआ और मानसिक तनाव झेलना पड़ा. बेरोजगार युवाओं के लिए प्रभावी योजनाएं और नीतियां बनाने की जगह पेपर लीक रोकने और दोषियों को राजनीतिक जवाबदेही के साथ सजा दिलाने में राज्य सरकार की विफलता बेहद निंदनीय है."

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