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जेन ज़ी आंदोलन ने हेमंत सोरेन को किस मुश्किल में फंसा दिया?

JPSC परीक्षा में गड़बड़ी, पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी और OMR शीट में हेरफेर के आरोपों के बीच छात्र CBI जांच पर अड़े हैं जिससे सोरेन सरकार की मुश्किल बढ़ती जा रही है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
अपडेटेड 14 अगस्त , 2026

10 अगस्त को हेमंत सोरेन 51 साल के हो रहे थे और रांची ने झारखंड के मुख्यमंत्री को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा संस्थागत संकट दे दिया. आंदोलनकारी छात्र इसे अपने विरोध का नतीजा बताते हुए विधानसभा के घेराव की ओर बढ़े, जिसका उन्होंने पहले ही ऐलान कर रखा था. 

विरोध का यह दृश्य करीब 20 दिन पहले जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की याद दिला रहा था. उस दिन आंसू गैस, पानी की बौछारें और लाठियां से सामना होने के बावजूद Gen Z किसी भी कीमत पर 'न' सुनने को तैयार नहीं थी.  

10 अगस्त की शाम तक राज्य CID ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया. यह एक बड़ी गिरफ्तारी थी. इससे पहले भी राज्य सरकार कह रही थी कि उसने छात्रों की ओर से रखी गई मांगों में से '98 फीसदी' मान ली हैं. लेकिन एक मांग पर वह अब भी टालमटोल कर रही थी. यह मांग थी CBI जांच की.

JPSC को अपने इतिहास के सबसे अभूतपूर्व संस्थागत संकट का सामना करना पड़ा. 9 अगस्त को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आयोग के बचे हुए तीन सदस्यों- अजीता भट्टाचार्य, अनीमा हांसदा और जमाल अहमद- के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. 

यह खियांग्ते के 22 जुलाई को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के कुछ ही हफ्तों बाद हुआ. उन्होंने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं के बढ़ते आरोपों के बीच पद छोड़ा था. संवैधानिक संस्था ऐसे समय में अपने पूरे नेतृत्व से वंचित हो गई जब उसकी विश्वसनीयता सबसे कड़ी जांच के घेरे में थी.

JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते तो सीआईडी गिरफ्तार चुकी है
JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते तो सीआईडी गिरफ्तार चुकी है

11 अगस्त को सोरेन ने विधानसभा में ऐलान किया कि विवादित 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द कर दी गई है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निजी एजेंसी TDPL की ओर से कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच होगी. 

CID पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी थी. इनमें इस एजेंसी का एक अकाउंटेंट भी शामिल था, जिसने कथित तौर पर खुद ही 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में फर्जी तरीके से सफलता हासिल की थी.

मिजोरम में जन्मे और झारखंड कैडर के IAS अधिकारी खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 2025 की शुरुआत में JPSC के अध्यक्ष बनाए गए थे. उनकी जिम्मेदारी राज्य की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की निगरानी करना थी. 

इनमें सबसे अहम 14वीं सिविल सेवा परीक्षा थी. इससे पहले 2024 में हुई परीक्षा भी विवादों में रही थी. प्रश्नपत्रों को संभालने और उनके उत्तरों को लेकर सवाल उठे थे, प्रदर्शन हुए थे, मुकदमे चले थे और नतीजे आने में देरी हुई थी. अगली परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए थी. इसके बजाय हालात और ज्यादा बिगड़ गए.

19 अप्रैल को परीक्षा हुई. ऐसा माना गया कि इसे बहुत जल्दबाजी में कराया गया. छात्रों के पास लंबे-चौड़े सिलेबस की तैयारी के लिए मुश्किल से 40 दिन थे. यह सामान्य तैयारी अवधि का करीब एक-तिहाई था. 

इसके बाद 2 जुलाई की रात नतीजे आए. 2,204 उम्मीदवार पास हुए थे और उनके पास 103 पदों के लिए मुख्य परीक्षा की तैयारी करने के लिए सिर्फ 17 दिन थे.

रांची में छात्र आंदोलन के बीच अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो
रांची में छात्र आंदोलन के बीच अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो

कुछ ही दिनों में अभ्यर्थियों ने कई अजीब बातें देखीं. JPSC ने श्रेणीवार कट-ऑफ जारी नहीं की थी. इसलिए किसी को पता नहीं था कि न्यूनतम कितने अंक जरूरी थे. कुछ शीट पर JPSC के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे.

इसके बाद एक सफल उम्मीदवार की लीक हुई OMR शीट वायरल हो गई. इसमें 200 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए गए थे फिर भी उम्मीदवार परीक्षा पास कर गया था.

इसके बाद हंगामा मच गया. 21 जुलाई को CID ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें एक उप परीक्षा नियंत्रक और लखनऊ स्थित TDPL के कर्मचारी शामिल थे. परीक्षा के अहम बैकएंड काम इसी एजेंसी को आउटसोर्स किए गए थे.

इनमें OMR शीट की जांच से लेकर नतीजे तैयार करना तक शामिल था. अगले दिन खियांग्ते ने पद से इस्तीफा दे दिया और अगले दो हफ्ते तक उन्हें खुद भी कड़े सवालों का सामना करना पड़ा.

जांच में पता चला कि TDPL को पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था फिर भी उसे बिना प्रतिस्पर्धी टेंडर के यह काम दिया गया. जांचकर्ताओं का आरोप है कि पसंदीदा उम्मीदवारों के अंक बढ़ाने के लिए एजेंसी की ओर से डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव किया गया. 

TDPL के कर्मचारी रक्षक सिंह पर आरोप है कि उसने खुद को परीक्षा में पास कराने के लिए अपनी उत्तर पुस्तिका में हेरफेर किया. वह 5 अगस्त को गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में शामिल था.

यह आरोप बेहद गंभीर था. जिस एजेंसी को परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम सौंपे गए थे, उसी के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर अपनी OMR शीट में हेरफेर कर परीक्षा पास कर ली. 

इसके बाद मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहा. इसमें परीक्षा अधिकारियों, आउटसोर्स एजेंसी और उम्मीदवारों के बीच कथित संगठित साजिश के आरोप भी जुड़ गए.

इसके बाद CID ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. इसमें सफल उम्मीदवारों की ओर से जमा की गई OMR शीट की कार्बन कॉपी की भी जांच की जा रही है ताकि कथित हेरफेर की सीमा का पता लगाया जा सके.

9 अगस्त को सोरेन सरकार ने 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के साथ 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाएं भी रद्द कर दीं. ये परीक्षाएं अगस्त की शुरुआत में होनी थीं. यह फैसला मंत्री समूह और छात्र प्रतिनिधियों के बीच छह घंटे चली मैराथन बैठक के बाद हुआ. 

समिति ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच, फास्ट-ट्रैक अदालत और भर्ती सुधारों के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने पर सहमति जताई.

लेकिन छात्र इससे आगे की मांग कर रहे थे. वे CBI जांच चाहते थे. खासकर भर्ती की पूरी व्यवस्था और उन परीक्षाओं की जांच, जिनमें उन्हें गड़बड़ी की आशंका है.

इस पूरे विवाद से JPSC की साख को भारी झटका लगा है
इस पूरे विवाद से JPSC की साख को भारी झटका लगा है

11 अगस्त को भी उनका आंदोलन जारी था. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से शुरू किए गए अनशन पर कायम थे. शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के वीडियो कॉल पर उन्हें अपनी जान जोखिम में न डालने की सलाह मिली, जिसके बाद उन्होंने पानी पीने के साथ अनशन जारी रखा. 

10 अगस्त को महतो ने विधानसभा मार्च में एंबुलेंस से ले जाए जाने पर जोर दिया. उनकी हालत बिगड़ने बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद दो अन्य अभ्यर्थियों ने भी अनशन शुरू कर दिया.

लेकिन राजनीति से यह मामला बहुत दूर नहीं है. विपक्षी दल के शासन वाले राज्य में इस आंदोलन को अलग तरह से देखा जा रहा है. जंतर-मंतर के उलट BJP खुलकर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है. पार्टी के नेता बाबूलाल मरांडी ने तो सोरेन के आवास के बाहर धरने पर बैठकर राहुल गांधी के विरोध के अंदाज को भी दोहराया.

सोरेन के लिए CBI जांच की मांग राजनीतिक रूप से भी मुश्किल स्थिति पैदा करती है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद वह खुद पांच महीने बिरसा मुंडा जेल में रह चुके हैं. 

विपक्ष लगातार इस घटनाक्रम को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताता रहा है. इसलिए मुख्यमंत्री के पास केंद्रीय एजेंसियों को लेकर सतर्क रहने की वजह है. वहीं छात्र लगातार कह रहे हैं कि राज्य की मशीनरी से बाहर की किसी एजेंसी की जांच ही जनता का भरोसा बहाल कर सकती है.

फिलहाल Gen Z आंदोलन का एक्ट I, सीन II इसी गतिरोध में अटका हुआ है. भर्ती व्यवस्था संस्थागत अव्यवस्था में है. सरकार ने प्रदर्शनकारियों की लगभग हर मांग मान ली है, लेकिन उस एक मांग को नहीं माना है जिसे वे सबसे बुनियादी मानते हैं. 

और यह ऐसी पीढ़ी है जो यह मानने को तैयार नहीं है कि उनके भविष्य का फैसला करने वाली संस्थाओं पर सिर्फ इसलिए भरोसा कर लिया जाए क्योंकि वे खुद ऐसा कहती हैं.

JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी, महत्वपूर्ण परीक्षा कार्यों को दागी TDPL को सौंपे जाने पर उठे सवाल, OMR शीट में हेरफेर के सामने आ रहे आरोप और JPSC के पहले के इंटरव्यू में अंकों के कथित मनमाने बंटवारे से जुड़े इनपुट ने मिलकर आयोग की विश्वसनीयता को बड़ा झटका दिया है. 

संस्था अब भरोसे के बड़े संकट से जूझ रही है. उसकी प्रक्रियाएं और सुरक्षा उपाय संदेह के घेरे में हैं. हजारों अभ्यर्थियों का करियर इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर निर्भर है. ऐसे में उनका गुस्सा और निराशा सिर्फ समझ में आने वाली बात नहीं है बल्कि पूरी तरह जायज है.

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