
बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने 15 सितंबर को गया के विकास के लिए 3,516 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी. इस फैसले के तहत दो अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम होगा. पहला 2,520 करोड़ रुपए का है, जिसके तहत विष्णुपद मंदिर के आसपास के इलाके को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह विकसित किया जाएगा. वहीं, दूसरा प्रोजेक्ट 996.05 करोड़ रुपए का है, जिसके तहत सोन और फल्गु नदियों को जोड़ा जाएगा.
इन दोनों प्रोजेक्ट को एकसाथ देखें तो सरकार गया के विकास को लेकर एक बड़ी योजना पर काम कर रही है. गया बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक है जहां बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं इसलिए जरूरतों के हिसाब से सुविधाएं बढ़ाना जरूरी है. इसमें सिर्फ धार्मिक स्थलों के आसपास की सुविधाएं बेहतर करना ही नहीं बल्कि फल्गु नदी से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या को दूर करना भी शामिल है.
15 सितंबर को कैबिनेट की ओर से दी गई यह मंजूरी बिहार के धार्मिक पर्यटन स्थलों को बेहतर बनाने की सम्राट चौधरी सरकार की बड़ी योजना का हिस्सा है. सरकार इन जगहों पर आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाएं बेहतर करना चाहती है.
गया बिहार की उन जगहों में शामिल है, जहां देशभर से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और विदेशों से भी पर्यटक आते हैं. बिहार पर्यटन के जनवरी से जुलाई 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इन सात महीनों में गया में 11.4 लाख घरेलू पर्यटक और 96,465 विदेशी पर्यटक पहुंचे. वहीं, बोधगया में 14.6 लाख घरेलू और 1.34 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे. इस तरह जनवरी से जुलाई 2026 तक दोनों जगहों पर करीब 2.31 लाख विदेशी पर्यटक आए.

राजधानी पटना के आंकड़े देखें तो गया-बोधगया में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या का अंतर साफ दिखाई देता है. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच पटना में सिर्फ 6,429 विदेशी पर्यटक आए. वहीं, गया और बोधगया धार्मिक पर्यटन के दो बड़े केंद्र हैं. गया में हिंदू तीर्थयात्री आते हैं जबकि बोधगया में दुनिया भर से बौद्ध तीर्थयात्री पहुंचते हैं.
हालांकि, इन आंकड़ों से सालभर आने वाली भीड़ की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. जनवरी से जुलाई के आंकड़ों में सितंबर-अक्टूबर में होने वाला पितृपक्ष मेला शामिल नहीं है. इस मेले के दौरान विष्णुपद, फल्गु के घाटों और शहर में पिंडदान से जुड़ी जगहों पर साल की सबसे ज्यादा भीड़ होती है.
सरकार ने इसी भीड़ को ध्यान में रखते हुए विष्णुपद के विकास की योजना बनाई है. इस योजना में मल्टी-लेवल पार्किंग, पैदल चलने के लिए अलग रास्ते, घाट, पुल, रैंप, डॉरमेट्री, कैंटीन और लोगों के लिए दूसरी जरूरी सुविधाएं होंगी. इस प्रोजेक्ट को बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन पूरा करेगा.
हिंदुओं के लिए विष्णुपद मंदिर एक पवित्र जगह है. मान्यता है कि यहां एक चट्टान पर भगवान विष्णु के पैर के निशान हैं. यह मंदिर पिंडदान के लिए भी खास माना जाता है. पिंडदान में मृत पुरखों के लिए पूजा की जाती है और उन्हें भोग अर्पित किया जाता है.
पितृपक्ष के दौरान देशभर से परिवार गया आते हैं और अपने पुरखों के लिए पिंडदान करते हैं. इसलिए विष्णुपद मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं है. यह ऐसी तीर्थयात्रा का भी अहम केंद्र है जहां लोग अपने मृत परिजनों को याद करते हैं और उनके प्रति अपना कर्तव्य पूरा करते हैं.
इसी वजह से इसकी तुलना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से की जा रही है. बिहार में सिर्फ मंदिर को बेहतर बनाने की योजना नहीं है बल्कि विष्णुपद मंदिर के आसपास के पूरे इलाके को नए तरीके से तैयार किया जाएगा. इसका मकसद भीड़भाड़ वाले इस तीर्थ स्थल को लोगों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है, साथ ही इसकी धार्मिक पहचान और महत्व को बनाए रखना है.
दूसरा प्रोजेक्ट पानी की समस्या को दूर करने के लिए है. सोन-फल्गु लिंक प्रोजेक्ट के तहत इंद्रपुरी बैराज से करीब 23 किलोमीटर पहले सोन नदी में एक इंटेक वेल बनाया जाएगा. इंटेक वेल से सोन नदी का पानी करीब 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए नॉर्थ कोयल मेन कैनाल तक ले जाया जाएगा. यह पाइपलाइन कैनाल के 32.77 किलोमीटर वाले प्वाइंट तक पहुंचेगी.
इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है. सोन-फल्गु प्रोजेक्ट के जरिए शहर के आसपास पानी से जुड़ी बड़ी समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है. इसके तहत फल्गु नदी में पानी पहुंचाया जाएगा. फल्गु नदी का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है, लेकिन साल के कई महीनों में इसके कई हिस्से सूखे नजर आते हैं.
सम्राट चौधरी सरकार ने इन दोनों प्रोजेक्ट को एक साथ इसलिए जोड़ा है क्योंकि दोनों गया के विकास से जुड़े हैं. गया में पहले से ही बड़ी संख्या में लोग धार्मिक वजहों से आते हैं. यहां पूरे साल हिंदू तीर्थयात्री आते हैं, पास में बोधगया जैसा बड़ा बौद्ध तीर्थ स्थल है और पितृपक्ष के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. 3,516 करोड़ रुपए की इस रकम से गया में जरूरी सुविधाएं बेहतर करने की कोशिश की जाएगी ताकि यहां आने वाले धार्मिक पर्यटकों से पर्यटन को लंबे समय तक फायदा मिल सके.

