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कल्याण सिंह के सहारे ‘कल्याण’ की आस में भाजपा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की बरसी पर 21 अगस्त को अलीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम भाजपा के लिए शक्तिप्रदर्शन का भी मौका था

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की बरसी पर 21 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की बरसी पर 21 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम
अपडेटेड 24 अगस्त , 2023

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जन्मदिन वैसे तो हमेशा राजधानी लखनऊ में मनाया जाता रहा है. कल्याण सिंह के देहांत के बाद पहली पुण्यतिथि भी लखनऊ में ही मनाई गई थी. मगर यह पहला मौका था जब कल्याण सिंह की स्मृति में कोई आयोजन लखनऊ से बाहर हो रहा था. 

कल्याण सिंह की दूसरी बरसी पर 21 अगस्त को अलीगढ़ के नुमाइश मैदान पर आयोजित कार्यक्रम एक तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शक्त‍ि प्रदर्शन में तब्दील हो गया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राजनीतिक नेताओं की भारी-भरकम टोली कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके गृह क्षेत्र, अलीगढ़ में पहुंची थी. 

भाजपा ने कल्याण सिंह की इस पुण्यतिथि‍ को 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मनाया. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने हिंदुत्व और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) एकजुटता का व्यापक संदेश देने के लिए इस आयोजन के पीछे अपनी संगठनात्मक ताकत झोंक दी. भारत माता की जय, जय श्री राम और रामभक्त कल्याण सिंह अमर रहें, जैसे नारों से अलीगढ़ के नुमाइश मैदान का पंडाल गूंज रहा था. 

मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद अमित शाह अपने संबोधन के दौरान कल्याण सिंह को याद करके भावुक भी दिखे. वे बोले, “कल्याण सिंह‍ ने रामभक्तों पर गोली चलाने के बजाय अपनी कुर्सी छोड़ दी थी. आज अयोध्या में कल्याण सिंह का सपना पूरा हो रहा है. मैं दिल्ली से केवल रामभक्त और पिछड़ों का कल्याण करने वाले बाबू जी कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने आया हूं.”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व वाले कार्यकाल को याद कर उन्हें एक कुशल प्रशासक के रूप में याद किया. इस तरह भाजपा के दिग्गज नेताओं ने मंच से अपने संबोधन में हिंदुत्व के तड़के के साथ प्रदेश की पिछड़ी जातियों को साधते हुए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सियासी जमीन मजबूत करने की भरसक कोशिश की.  भाजपा ने 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मनाने के लिए 50,000 से अधिक पार्टी समर्थकों को अलीगढ़ बुलाया, जो मुख्य रूप से ओबीसी समुदाय से थे और अलीगढ़ के आसपास के जिलों जैसे बुलंदशहर, एटा और हाथरस से आए थे. 

कल्याण सिंह के बहाने भाजपा ने लोध पिछड़ी जाति के मतदाताओं पर डोरे डालने की भरसक कोशि‍श की है. उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं. इनमें से 27 पश्च‍िमी उत्तर प्रदेश से आती हैं. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रदेश में कुल 16 लोकसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था जिसमें 7 सीटें पश्च‍िमी यूपी की हैं. पश्च‍िमी यूपी की ये सीटें अब भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई हैं.

कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि के आसपास भाजपा की बढ़ी हुई गतिविधि को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. अलीगढ़ निवासी और मेरठ विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्राफेसर देवेंद्र शर्मा बताते हैं, “सभी की नजर इन दिनों राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया जयंत चौधरी पर लगी हुई है. जयंत अगर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के साथ जाते हैं तो पश्च‍िमी उत्तर प्रदेश और खासकर ब्रज क्षेत्र में भाजपा की चुनौती बढ़ सकती है. विपक्ष की इसी घेराबंदी से बचने के लिए भाजपा ने कल्याण सिंह के सहारे हिंदुत्व में लिपटा ओबीसी कार्ड खेला है.” 

पश्च‍िमी यूपी में एटा, इटावा, कासगंज, बुलंदशहर, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, मुरादाबाद, अमरोहा, बरेली समेत बुंदेलखंड में लोध समाज की अच्छी तादाद है. फि‍लहाल यूपी की कुल पिछड़ी जातियों में आठ प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले लोध समाज को सभी पार्टियां लुभाने में जुट चुकी हैं. 21 अगस्त को एक ओर जहां भाजपा ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि‍ को ‘हिंदू गौरव दिवस’ के रूप में मनाया वहीं समाजवादी पार्टी ने लोध समाज से आने वाली रानी अवंतीबाई की जयंती मनाकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की. 

लोध समाज के साथ ही हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े लोगों के बीच कल्याण सिंह की लोकप्रियता भुनाने की भरसक कोशि‍श भाजपा ने की है. 21 अगस्त 2021 को जब पूर्व मुख्यमंत्री का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी खुद उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने लखनऊ पहुंचे थे. बाद में, अमित शाह ने कल्याण सिंह के गृहनगर अतरौली का दौरा किया और श्रद्धांजलि अर्पित की थी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की अंतिम यात्रा में अलीगढ़ से लेकर बुलंदशहर के नरोरा तक 60 किलोमीटर तक यात्रा की थी. 

तब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ऐलान किया था कि छह सड़कों का नाम कल्याण के नाम पर रखा जाएगा. कल्याण सिंह के निधन के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजकीय मेडिकल कालेज, बुलंदशहर और लखनऊ के सीजी सिटी स्थ‍ित सुपरस्पेशि‍यलिटी संस्थान का नामकरण कल्याण सिंह के नाम पर करने का आदेश दिया था. 

राजनीतिक रुझान की बात करें तो भाजपा को लोध समाज का एकतरफा समर्थन मिलता रहा है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 22 लोध विधायक चुनाव जीते थे. इसमें से 18 भाजपा और 4 सपा के हैं. कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह अपने दादा की परंपरागत सीट अतरौली से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बने हैं. इस बार उन्‍हें राज्‍य मंत्री प्राथमिक शिक्षा (स्‍वतंत्र प्रभार) के तौर पर योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. संदीप के पिता राजवीर सिंह राजू भैया एटा से सांसद हैं. लोध जाति से आने वाले बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक धर्मपाल सिंह को भी योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है. 

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जुलाई, 2021 में बदायूं निवासी और राज्यसभा सदस्य बी. एल. वर्मा को केंद्र सरकार में मंत्री बनाने के पीछे रुहेलखंड इलाके में लोध जाति को भाजपा से जोड़े रखने की ही रणनीति थी. पिछले साल मई में रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने घनश्याम लोधी को उम्मीदवार बनाकर इसी रणनीति को विस्तार दिया था. धनश्याम ने सपा से रामपुर लोकसभा सीट छीनकर इस पर भगवा झंडा फहरा दिया था. 

लोध जाति पर पकड़ का एहसास कराने के लिए ही भाजपा ने इसी वर्ष अप्रैल में शाहजहांपुर में मेयर पद के चुनाव के दौरान सपा उम्मीदवार अर्चना वर्मा को पार्टी में शामिल कराया था. शाहजहांपुर के कद्दावर लोध नेता राममूर्ति वर्मा की बहू अर्चना वर्मा ने नवगठित शाहजहांपुर नगर निगम की पहली मेयर बनकर इतिहास रच दिया. देवेंद्र शर्मा बताते हैं, “भाजपा एक ओर कल्याण सिंह के नाम का सहारा ले रही है तो दूसरी ओर लोध बहुल इलाके में इस समुदाय के नेताओं को उचि‍त प्रतिनिधित्व देकर वोटबैंक से जुड़ाव भी जाहिर कर रही है. हालांकि भाजपा की इस रणनीति की असल परीक्षा तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ही होगी.”

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