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आस्था कुंज गैंगरेप : दिल्ली पर लगा ‘रेप कैपिटल’ का दाग छूटता क्यों नहीं?

साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में हर दिन औसतन पांच से ज्यादा रेप के मामले दर्ज हुए. यह तब है जब लगातार दो साल तक मामलों में कमी आई है

J&K rape case
सितंबर के दौरान ही दिल्ली में गैंगरेप की दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं (सांकेतिक तस्वीर)
अपडेटेड 29 सितंबर , 2026

दो नाबालिग लड़कियों के साथ गैंगरेप की घटनाओं के बाद भारत की ‘रेप कैपिटल’ के तौर पर दिल्ली की बदनाम छवि एक बार फिर चर्चा में है. निर्भया गैंगरेप की घटना को करीब 14 साल हो चुके हैं और उसके बाद कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिनसे ‘अवसरों के शहर’ के रूप में दिल्ली की छवि को गहरा धक्का लगा. हाल की दोनों घटनाओं और आंकड़े से पता चलता है कि दिल्ली पर रेप की यह छाया अब भी क्यों बनी हुई है.

पहले मामले में बाहरी उत्तर दिल्ली में 16 साल की एक लड़की के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. उसका शव 13 सितंबर को स्वरूप नगर के एक खेत में सड़ी-गली हालत में मिला.

पुलिस के मुताबिक लड़की 17 साल के अपने एक दोस्त से मिलने गई थी. इसके बाद उसके दोस्त ने तीन और लोगों को बुलाया, जिन्होंने कथित तौर पर इस वारदात को अंजाम दिया. चार आरोपियों में से तीन नाबालिग हैं. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों का पता लगाया.

21 सितंबर को दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के नेहरू प्लेस के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की एक लड़की के साथ कथित तौर पर तीन लोगों ने गैंगरेप किया. उस दिन लड़की का जन्मदिन था और वह एक दोस्त के साथ पार्क गई थी. एफआईआर के मुताबिक, तीन लोग पुलिसकर्मी बनकर वहां पहुंचे. उन्होंने दोनों के माता-पिता के फोन नंबर मांगे. इसके बाद लड़के को पीटा और लड़की के साथ चाकू की नोक पर रेप किया. उसे डराने के लिए बंदूक का भी इस्तेमाल किया गया.

पुलिस ने आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया. इनमें से एक आरोपी आसिफ के पैर में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया. बताया जाता है कि वह पहले उसी जिले में पुलिस का मुखबिर था. दूसरा आरोपी हेमंत सिंह वकील है और तीसरा आरोपी मुकेश सिंह कॉलेज का छात्र है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आसिफ को पहले भी कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पकड़ा गया था, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत नहीं होने की वजह से उसे छोड़ दिया गया था. गवाहों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि आसिफ और हेमंत पहले भी पार्क में लोगों को परेशान करते थे. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्होंने पहले भी महिलाओं के साथ ऐसी वारदात की थी. पुलिस ने सुरक्षा गार्डों समेत 12 गवाहों से बात की है.

आस्था कुंज गैंग रेप के आरोपी; आसिफ (इनसेट में)
आस्था कुंज गैंग रेप के आरोपी; आसिफ (इनसेट में)

आस्था कुंज मामले से दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा में कई कमियों सामने आई हैं. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का यह पार्क 142 एकड़ में फैला है. पुलिस के मुताबिक, पार्क के अंदर CCTV कैमरों से निगरानी नहीं होती थी. वहीं प्रवेश द्वारों पर लगे ज्यादातर CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे. इसके अलावा, वारदात की जगह के पास बना गार्ड केबिन में बिजली सप्लाई नहीं थी.

घटना के बाद पुलिस ने पहले की तरह कुछ कदम उठाए. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शहर में ऐसे इलाकों की पहचान करें, जहां अंधेरा रहता है या रोशनी कम है, CCTV कैमरे काम नहीं करते, पार्क असुरक्षित हैं, सड़कें और सुनसान जगहें जोखिम वाली हैं. इन जगहों की जानकारी संबंधित स्थानीय एजेंसियों को देने को कहा गया. साथ ही, पार्कों, सब-वे, फुटओवरब्रिज और दूसरी संवेदनशील जगहों के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई.

सितंबर में हुई इन दोनों घटनाओं को दिल्ली जैसे शहर में अलग-अलग घटनाओं के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, जहां हर साल रेप और यौन हमले के बड़ी संख्या में मामले दर्ज होते हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 2025 में रेप के 1,901 मामले दर्ज हुए. 2024 में यह संख्या 2,076 और 2023 में 2,141 थी.

2025 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में हर दिन औसतन पांच से ज्यादा रेप के मामले दर्ज हुए. यह तब है जब लगातार दो साल तक मामलों में कमी आई है. दिसंबर 2012 में निर्भया गैंगरेप से पहले दिल्ली की स्थिति इससे काफी अलग थी. दिल्ली में 2009 में रेप के 469 मामले, 2010 में 507 और 2011 में 572 मामले दर्ज हुए थे. इन तीन सालों में कुल 1,548 मामले दर्ज हुए थे. यह संख्या 2023, 2024 और 2025 में दर्ज हुए कुल 6,118 मामलों की करीब एक चौथाई है.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि रेप की असली घटनाएं चार गुना बढ़ गई हैं. ये आंकड़े सिर्फ उन मामलों को दिखाते हैं, जो पुलिस में दर्ज हुए. इनमें वे घटनाएं शामिल नहीं हैं, जो पुलिस तक पहुंची ही नहीं. निर्भया मामले के बाद कानून और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव हुए हैं. 2013 में यौन अपराधों से जुड़े कानूनों को सख्त किया गया. पुलिस पर शिकायत दर्ज करने और उन पर कार्रवाई करने का दबाव भी बढ़ा. इससे यौन अपराधों की शिकायत दर्ज होने का तरीका भी बदल गया.

लेकिन 13 साल बाद भी ये आंकड़े चिंता की वजह हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2024 में 19 बड़े शहरों में दिल्ली में रेप के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए. इसी दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले भी दिल्ली में सबसे ज्यादा 13,396 रहे. बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले भी सबसे ज्यादा 7,662 रहे. ये सभी आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब भी बनी हुई है.

आस्था कुंज मामले का एक और पहलू है. दिल्ली में दर्ज होने वाले ज्यादातर रेप के मामलों में आरोपी, पीड़िता को पहले से जानता होता है. लेकिन इस मामले में पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों ने दोनों किशोरों को रास्ते में देखा और पुलिस बनकर उस अधिकार का इस्तेमाल डराने के लिए किया. उन्होंने कथित तौर पर पुलिस की भाषा का इस्तेमाल किया और लड़के को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) कानून के तहत मामला दर्ज करने की धमकी दी. इसके बाद दोनों नाबालिगों को लगा कि वे पुलिसकर्मियों के सामने हैं.

यह हमला ऐसे पार्क में हुआ, जहां सुरक्षा के लिए ठीक से निगरानी नहीं थी. दिल्ली के दूसरे सार्वजनिक इलाकों में भी ऐसी सुरक्षा की कमी है. ऐसे में असुरक्षित जगहों की पहचान कर वहां सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है.

आंकड़े इस मुश्किल समस्या को साफ दिखाते हैं. 2012 यानी निर्भया मामले से ठीक पहले के तीन साल के दौरान दिल्ली में हर साल औसतन 516 रेप के मामले दर्ज हुए थे. वहीं, 2023 से 2025 के बीच हर साल औसतन 2,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए. इस बढ़ोतरी की कुछ वजह बेहतर रिपोर्टिंग और मामलों का ज्यादा दर्ज होना है. इसके बावजूद एक साल में रेप के 1,901 मामले दर्ज होना चिंता की बात है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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