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बिहार : क्या सच में कांग्रेस और राजद को लोकसभा चुनाव के कैंडिडेट नहीं मिल रहे?

कांग्रेस को बिहार में नौ सीटें मिली हैं, इनमें से पार्टी ने आधिकारिक रूप से अब तक सिर्फ तीन उम्मीदवारों की घोषणा की है, वहीं राजद अपने खाते की 26 में से सिर्फ छह सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर पाया है

लालू प्रसाद यादव (बाएं) और मल्लिकार्जुन खड़गे
लालू प्रसाद यादव (बाएं) और मल्लिकार्जुन खड़गे
अपडेटेड 8 अप्रैल , 2024

अभी हाल ही में जनता दल- यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने ‘एक्स’ पर पोस्ट डाली. इसमें कुछ लोकसभा सीटों के नाम के साथ कहा गया था कि कुर्ता पायजामा पहनकर इन क्षेत्रों में न जाएं, वरना महागठबंधन (कांग्रेस और राजद) के लोग आपको पकड़ौआ उम्मीदवार बना सकते हैं. 

तंज में कही गई इस बात को वैसे तो हंसी में उड़ा दिया गया. मगर यह सच है कि तीसरे चरण का नॉमिनेशन शुरू होने वाला है, लेकिन अब तक कांग्रेस और राजद की ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा तक नहीं हुई है.

कांग्रेस को बिहार में नौ सीटें मिली हैं, इनमें पार्टी ने आधिकारिक रूप से अब तक सिर्फ तीन उम्मीदवारों की घोषणा की है. कटिहार से तारिक अनवर, किशनगंज से मोहम्मद जावेद और भागलपुर से अजीत शर्मा. बाकी छह सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा यह अब तक साफ नहीं है. हालांकि मुजफ्फरपुर से बीजेपी से कांग्रेस में आए अजय निषाद और समस्तीपुर से जदयू नेता महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी की चर्चा है जो हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं. मगर उनका टिकट अभी फाइनल नहीं हुआ है.

राज्य में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी राजद में सीटों के बंटवारे का हाल तो और भी बुरा है. पार्टी ने आधिकारिक रूप से अपने खाते की 26 में से सिर्फ छह सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं. इनमें से जमुई, गया, औरंगाबाद, नवादा, पूर्णिया और बांका सीट के प्रत्याशी हैं, जिन्हें पहले और दूसरे चरण के चुनाव में भाग लेना है.

इनके अलावा लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की दोनों बेटियां मीसा भारती और रोहिणी आचार्य, उजियारपुर से आलोक मेहता, दरभंगा से ललित यादव आदि के नाम तय माने जा रहे हैं, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है. इनमें से कई लोग चुनाव प्रचार में भी उतर चुके हैं. इनके अलावा ज्यादातर सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा यह तय नहीं.

जबकि भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन के सभी सीटों के उम्मीदवार काफी पहले घोषित हो चुके हैं और वे अपनी सीटों पर चुनाव अभियान चला रहे हैं. भाजपा और जदयू ने 24 मार्च को ही अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे. जीतनराम मांझी की ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के उम्मीदवार घोषित ही थे. कुछ ही दिन बाद चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने भी अपने पांचों उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.

वहीं 5 अप्रैल को राजद ने अपने कोटे की तीन सीटें मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को देकर उन्हें इंडिया गठबंधन का हिस्सा बना लिया. ये सीटें गोपालगंज, झंझारपुर और मोतिहारी थीं. इन सीटों पर कुछ राजद नेता अपना दावा मानकर चुनावी तैयारी कर रहे थे. खासकर झंझारपुर की सीट पर राजद के पुराने और चर्चित नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव का नाम लगभग तय माना जा रहा था.

इस घोषणा के बाद देवेंद्र यादव काफी नाराज हो गए और उन्होंने पार्टी पर टिकट बेचे जाने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने पार्टी सुप्रीमो लालू यादव को पत्र लिखकर कहा, “ऐसा लगता है जैसे पार्टी चुनाव लड़ने की औपचारिकता निभा रही है. टिकट वितरण का व्यवसायीकरण हो गया है. आंतरिक सर्वे में जिन उम्मीदवारों के जीत की संभावना जताई जा रही थी उन्हें भी टिकट से वंचित किया जा रहा है. यह एक तरह से पार्टी के युवा नेता तेजस्वी यादव के साथ भी अन्याय है जो राज्य की राजनीति में मजबूती से स्थापित हो गए थे.”

देवेंद्र यादव के इस पत्र ने राजद के बारे में चल रही उस अफवाह को हवा दे दी है जिसके तहत लालू पर ED के दबाव में अनमने ढंग से लोकसभा चुनाव लड़ने और टिकट बेचने जैसे आरोप हैं. लोगों के बीच इस तरह के आरोपों की चर्चा देवेंद्र यादव ने भी अपने पत्र में की थी.

दरअसल तेजस्वी यादव की जनविश्वास यात्रा और जनविश्वास रैली की सफलता के बाद ऐसा लगने लगा था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन बिहार में एनडीए को कड़ी टक्कर देगा. कई सर्वेक्षणों में भी गठबंधन को पांच से दस सीटें तक मिलती बताई गईं. मगर उसके बाद से अचानक लालू यादव ने टिकट वितरण का जिम्मा संभाल लिया और परिस्थितियां गड़बड़ाने लगीं. 

सहयोगी दल कांग्रेस भी लालू यादव के दबाव में बताई जा रही है और ऐसा कहा जा रहा है कि इस पार्टी के लिए उम्मीदवारों के चयन में लालू हस्तक्षेप कर रहे हैं. इसमें पप्पू यादव का मामला पहले ही चर्चित हो चुका है. कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह राजद सुप्रीमो लालू यादव के काफी करीबी बताए जाते हैं, इसलिए पार्टी की सीटें और उम्मीदवार लालू यादव की सहमति से तय हो रहे हैं. इस बात को लेकर कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं में नाराजगी है.

नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कहते हैं, “पहले तो हमें ऐसे सीटें चुन कर दी गईं, जिन पर राजद खुद लड़ना नहीं चाहती थी और अब उम्मीदवारों का मसला अटका है. हम यह देख रहे हैं कि राजद अमूमन भाजपा से सीधी लड़ाई वाली सीटों से बचना चाह रहा है. इसका मतलब आप समझ ही सकते हैं.”

बहरहाल प्रत्याशी की घोषणा में हो रही देरी पर राजद के वरिष्ठ प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते हैं, “हम चरणबद्ध तरीके से प्रत्याशियों की घोषणा कर रहे हैं. अभी पहले दो चरणों के उम्मीदवार घोषित हुए हैं, बाकी भी समय से घोषित हो जाएंगे.”

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