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कूनो के बाहर चीते का शिकार, सुरक्षा में कहां हुई चूक?

कूनो नेशनल पार्क के बाहर 19 महीने के चीते को गोली मार दी गई. शरीर में पांच छर्रे मिले, लेकिन हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है

चीत प्रोजेक्ट कूनो से ही शुरू हुआ है (सांकेतिक फोटो)
अपडेटेड 28 अक्टूबर , 2026

चंबल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति की कुख्यात छवि एक बार फिर सामने आई है, हालांकि इस बार मामला इंसानों से अलग है. मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट 748 के पास गोली लगने से 19 महीने के एक चीते की मौत हो गई. 

चार साल पहले भारत में इस जंगली बिल्ली को फिर से बसाने की परियोजना शुरू होने के बाद यह पहली घटना है जब इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव में किसी चीते की जान गई है. फिलहाल गोली मारने वालों की पहचान नहीं हो पाई है और वे फरार हैं.

‘KNG 22’ नाम का यह नर चीता निर्वा की संतान था. निर्वा को फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था. 25 अक्टूबर को निगरानी के लिए तैनात एक टीम ने इस चीते को गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया. उसे कूनो नेशनल पार्क के पास के जंगलों से बचाकर इलाज के लिए जबलपुर स्थित राज्य पशु चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया, जहां 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई.

25 अक्टूबर की शाम चीते की निगरानी के लिए तैनात टीम ने बताया कि वह हिल-डुल नहीं रहा था. यह चीता तीन चीतों के एक समूह का हिस्सा था. रात होने तक उसे वहां से कुछ दूरी पर स्थित कूनो नेशनल पार्क में ले जाया गया.

जहां घायल चीता मिला, कुछ महीने पहले उस इलाके में दो तेंदुओं का शिकार किया गया था. मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक समिता राजोरा ने कहा, "हमने घटना की जांच के लिए 26 अक्टूबर को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स को कूनो भेजा था."

चीते को इलाज के लिए कूनो से जबलपुर ले जाया गया. वहां सीटी स्कैन में पांच छर्रे मिले, जिससे पता चला कि उसे गोली मारी गई थी. छर्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया. लेकिन गोली लगने से चीते के अंदरूनी अंगों को चोट पहुंची थी. इलाज के दौरान 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई.

चंबल क्षेत्र में अपराध दर औसत से अधिक रहने की छवि रही है. यह इलाका बड़ी संख्या में वैध और अवैध हथियारों के लिए भी जाना जाता है. चीते की सुरक्षा में नाकामी प्रोजेक्ट चीता के लिए बड़ा झटका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2022 में कूनो नेशनल पार्क में इस परियोजना की शुरुआत की थी.

इस चीते की मौत के बाद परियोजना के तहत पाले गए चीतों की कुल संख्या 58 रह गई है. इनमें अफ्रीका से अलग-अलग जत्थों में लाए गए वयस्क चीते और भारत में जन्मे शावक शामिल हैं. कूनो नेशनल पार्क में 54 चीते हैं. 

हाल ही में चीते के रहने के क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश के तहत दो-दो चीतों को राज्य के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी छोड़ा गया है.

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