पश्चिम बंगाल BJP के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कोलकाता की प्रमुख दुर्गा पूजा समितियों पर राजनीतिक नियंत्रण से अपनी पार्टी को दूर रखने की कोशिश की है. कई लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के दौरान ये पूजा समितियां पार्टी की पहचान बन गई थीं. सरकार बदलने के बाद शहर की कुछ प्रसिद्ध दुर्गा पूजा समितियों में संगठनात्मक बदलावों में BJP की भूमिका दिख रही है. इसके बावजूद भट्टाचार्य ने साफ किया है कि पार्टी का इरादा दुर्गा पूजा का 'राजनीतिक कब्जा' करने का नहीं है.
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब अटकलें लगाई जा रही थीं कि सुरुचि संघ दुर्गा पूजा समिति में संगठनात्मक बदलाव के बाद भट्टाचार्य प्रतिष्ठित कॉलेज स्क्वायर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष बन सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक कॉलेज स्क्वायर समिति ने उन्हें अध्यक्ष पद स्वीकार करने का अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया.
भट्टाचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैं कॉलेज स्क्वायर दुर्गा पूजा का अध्यक्ष नहीं बन रहा हूं. सिर्फ कॉलेज स्क्वायर ही नहीं मैं पश्चिम बंगाल में किसी भी दुर्गा पूजा का अध्यक्ष नहीं बनूंगा और न ही किसी पूजा के संचालन की जिम्मेदारी लूंगा."
हालांकि भट्टाचार्य ने समिति का निमंत्रण स्वीकार किया और 16 जुलाई को उसके खूंटी पूजा समारोह में शामिल हुए. खूंटी पूजा दुर्गा पूजा की तैयारियों से जुड़ा एक धार्मिक अनुष्ठान है. उत्तर दमदम से BJP विधायक सौरव सिकदर भी कोलकाता की प्रसिद्ध सुरुचि संघ दुर्गा पूजा के ऐसे ही एक कार्यक्रम में शामिल हुए. BJP के कुछ अन्य नेता भी अलग-अलग पूजा समितियों के कार्यक्रमों में पहुंचे.
भट्टाचार्य ने पार्टी नेताओं को भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने लिखा, "कोई विधायक या मंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्र की किसी पूजा समिति का अध्यक्ष बनना चाहे तो यह उसका व्यक्तिगत फैसला है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राजनीतिक व्यक्ति, विधायक, सांसद या राजनीतिक दलों के नेता एक के बाद एक पूजा की जिम्मेदारी लेते फिरें."
भट्टाचार्य ने कहा कि पूजा समितियों की स्वायत्तता और उनकी अलग पहचान बनी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा, "दुर्गा पूजा सभी की है, किसी एक राजनीतिक दल की नहीं."
भट्टाचार्य की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि TMC शासन के दौरान कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों की दुर्गा पूजा समितियां धीरे-धीरे सत्तारूढ़ दल के प्रभाव में आ गई थीं. आयोजकों का अक्सर आरोप रहा कि यदि किसी पूजा समिति के साथ सत्तारूढ़ दल के किसी नेता या मंत्री का नाम नहीं जुड़ा हो तो सरकारी अनुमति लेना मुश्किल हो जाता था. जो लोग ऐसा करने से इनकार करते थे, उन्हें परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया गया. कई पूजा समितियां भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण जांच के दायरे में भी आईं.
सुरुचि संघ में संगठनात्मक फेरबदल के बाद सौरव सिकदर को सचिव बनाया गया है. पूर्व मंत्री अरूप विश्वास को क्लब के मुख्य सलाहकार पद से हटा दिया गया है. उनके भाई स्वरूप विश्वास, जो कई वर्षों तक सचिव रहे और फिलहाल कथित वसूली के एक मामले में गिरफ्तार हैं, उन्हें भी नई समिति से बाहर कर दिया गया है.
सिकदर ने कहा कि इन संगठनात्मक बदलावों को पूजा पर राजनीतिक कब्जे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "दुर्गा पूजा सभी की है और आगे भी सभी की रहेगी. पिछली समिति के वे विशेषज्ञ जो इतने वर्षों से पूजा का आयोजन करते आए हैं, हमारी समिति में भी बने रहेंगे."
सुरुचि संघ में हुए बदलावों के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि कॉलेज स्क्वायर अगली बड़ी दुर्गा पूजा होगी, जिसकी कमान सीधे BJP के हाथ में आ सकती है. लेकिन भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से समिति की अध्यक्षता स्वीकार करने से इनकार कर दिया. साथ ही उन्होंने BJP के विधायकों और सांसदों को भी संदेश दिया. इससे संकेत मिलता है कि राज्य में राजनीतिक सत्ता भले बदल गई हो लेकिन पार्टी चाहती है कि कोलकाता की दुर्गा पूजा अपनी स्वतंत्र, समुदाय-आधारित पहचान बनाए रखे और राजनीतिक दलों का विस्तार न बने.

