उन्नाव के अरोड़ा रिसॉर्ट में 17 मार्च विधानसभा-165 उन्नाव सदर के बूथ अध्यक्षों की बैठक बोर्ड परीक्षा सरीखी थी. सुबह 10 बजे से उन्नाव विधानसभा के 300 से अधिक बूथ अध्यक्ष एक-एक करके पहुंचने लगे थे. इनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि हॉल में पड़ी कुर्सियों में सब पर बूथ नंबर चस्पा था. सभी बूथ अध्यक्षों को अपने बूथ नंबर वाली कुर्सी पर ही बैठना था.
यह कुछ वैसा ही नजारा था जैसा कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थी अपने रोल नंबर वाली सीट को परीक्षा हॉल में तलाशता है. लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा ने बूथ पर संगठन को दुरुस्त करने के लिए इस बार नई रणनीति अपनाई. इस रणनीति के सूत्रधार भाजपा के यूपी संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने स्वयं पहली बैठक उन्नाव में की.
इसमें पहली बार बूथ अध्यक्षों के बैठने के लिए निर्धारित सीटिंग प्लान था. किसी भी बूथ अध्यक्ष को अपने लिए निर्धारित सीटिंग प्लान से इतर बैठना मना था. पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे जब बैठक शुरू हुई तो धर्मपाल सिंह बूथ नंबर के हिसाब से बूथ अध्यक्षों से रूबरू हुए.
संगठन महामंत्री के पास मौजूद कागज में प्रत्येक बूथ नंबर के आगे उसके बूथ अध्यक्ष का नाम, क्षेत्र और संबंधित अध्यक्ष के दायित्व का जिक्र था. करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में धर्मपाल सिंह ने एक-एक करके सभी बूथ अध्यक्षों से उनके इलाके में भाजपा की योजनाओं की प्रगति पूछी और कमजोर कार्य करने वाले अध्यक्षों पर नाराजगी भी व्यक्त की.
संगठन महामंत्री के रूप में धर्मपाल संघ और भाजपा के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उन्हें पार्टी के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पर्दे के पीछे से अधिकांश योजना बनाने की जिम्मेदारी है. भाजपा ने यूपी में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मिले वोटों में वर्ष 2014 के चुनाव में दस फीसदी इजाफा करने का लक्ष्य तय किया है. इसे पूरा करने के लिए प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने यूपी के सभी बूथ अध्यक्षों को 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में प्रत्येक बूथ पर वोटों की संख्या 370 तक बढ़ाने का काम सौंपा है.
इस बूथ केंद्रित तैयारियों की निगरानी सीधे धर्मपाल सिंह ने अपने स्तर से शुरू की हे. इसके लिए धर्मपाल सिंह ने उन्नाव से बूथ स्तरीय बैठकों की शुरुआत की. यूपी के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी बैठकें आयोजित की जाएंगी. उन्नाव की बैठक में संगठन महामंत्री द्वारा शुरू की गई 'बूथ अध्यक्ष (प्रमुखों)' के लिए बैठने की निर्धारित व्यवस्था अपनी तरह की पहली योजना है और अब आगामी बूथ-स्तरीय बैठकों में भी इसी तरह की बैठने की व्यवस्था होगी. यानी अब पार्टी की बैठकों में शामिल होने वाले सभी बूथ प्रमुखों के लिए एक निर्धारित स्थान होगा.
सीटिंग प्लान के महत्व को समझाते हुए यूपी भाजपा के मीडिया सह प्रभारी हिमांशु दुबे बताते हैं, "भाजपा का ध्यान बूथ-स्तरीय गतिविधि पर है और सीटिंग प्लान बूथ-स्तर पर फोकस को मजबूत करेगा और साथ ही प्रत्येक बूथ पर कैडर को दिए गए महत्व को समझने में मदद करेगा." हालांकि सीटिंग प्लान का उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि भाजपा का प्रत्येक बूथ अध्यक्ष बैठकों में स्वयं मौजूद रहे.
पिछले वर्षों में हुई बूथ स्तरीय बैठकों से कई बूथ अध्यक्षों के गायब रहने की शिकायतें कई जिलों से भाजपा नेतृत्व को मिली थीं. इससे न केवल पार्टी की जमीनी तैयारियों पर असर पड़ रहा था बल्कि फीडबैंक तंत्र की व्यापकता भी प्रभावित हो रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए धर्मपाल सिंह ने बूथ अध्यक्षों की बैठक में सीटिंग प्लान की योजना पेश की. इसमें बैठक से बिना बताए, अकारण गायब रहने वाले बूथ अध्यक्ष पर कार्रवाई का भी प्रावधान है.
प्रत्येक बूथ पर 370 अतिरिक्त वोट जोड़ने के लिए कैडर को धर्मपाल का संदेश विशेष अर्थ रखता है क्योंकि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एनडीए के समर्थन के साथ भाजपा के लिए 370 सीटों और कुल मिलाकर '400 पार' यानी 400 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है.
भाजपा की संरचना में प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है. उन्नाव में बैठक के दौरान बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए, धर्मपाल ने यह भी कहा कि सभी बूथ कार्यकर्ता घर का बना खाना लाएंगे और दोपहर के भोजन के दौरान सब साथ बैठकर खाएंगे.
धर्मपाल ने कहा, "एक साथ दोपहर का भोजन करने से लेकर प्रत्येक बूथ में मतदाताओं को बुलाने तक, प्रत्येक बूथ में सूचीबद्ध लाभार्थियों से जुड़ना नियमित अभ्यास का हिस्सा होगा." पिछले वर्ष धर्मपाल सिंह ने भाजपा की बूथ संरचना में भी परिवर्तन करके इन्हें और प्रभावी बनाने की कोशिश की थी. यूपी में करीब 1.64 लाख बूथों में अध्यक्ष और पदाधिकारियों के साथ सदस्यों की संख्या कम कर दी गई थी. अभी तक बूथ कमेटी में अध्यक्ष को मिलाकर सदस्यों की संख्या 21 होती थी जिसे घटाकर 11 कर दिया गया.
बूथ पर प्रभावी जाति के कार्यकर्ता को बूथ अध्यक्ष और बाकी सदस्य अलग-अलग जातियों के बनाने का प्रावधान किया गया. बूथ कमेटी में सभी मोर्चों की भी भागीदारी तय की गई. बूथ कमेटियों के गठन के बाद भाजपा ने बूथ सशक्तीकरण अभियान भी शुरू किया था. पूरे प्रदेश में चले अभियान में युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित करके उन्हें भाजपा से जोड़ा गया.
इसके अलावा हर बूथ पर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने के साथ हर बूथ पर 'मोदी के राजदूत' जैसी योजनाओं से भी भाजपा ने बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया. बूथ पर भाजपा की तैयारी पार्टी के 'मिशन-80' को पूरा करने में कितना कामयाब होती है यह तो 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे वाले दिन ही पता चलेगा.

