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BJP ने दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को टिकट क्यों नहीं दिया?

मध्य प्रदेश BJP में पीढ़ीगत बदलाव से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की कथित असहजता तक, नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने के पीछे कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं

नरोत्तम मिश्रा मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ (फाइल फोटो)
अपडेटेड 14 जुलाई , 2026

30 जुलाई को होने वाले मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए BJP ने 10 जुलाई को बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया. पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया.

इस घोषणा के बाद दतिया में मिश्रा के समर्थकों ने विरोध किया. उन्होंने 10 जुलाई को कई घंटों तक झांसी-दतिया हाईवे जाम रखा. विरोध में BJP के दतिया जिला अध्यक्ष और पार्टी के कई पदाधिकारियों ने भी इस्तीफा दे दिया.

11 जुलाई को मिश्रा को भोपाल बुलाया गया जहां उनकी मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अजय जामवाल के साथ बैठक हुई. बैठक के बाद मिश्रा ने अपने समर्थकों से कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं करने की अपील की.

अगले दिन मिश्रा दिल्ली गए. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने BJP अध्यक्ष नितिन नवीन या गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है. हालांकि माना जाता है कि इनसे मिश्रा के करीबी संबंध हैं. 13 जुलाई को मिश्रा आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में शामिल होने के लिए दतिया पहुंचे. अपने भावुक संबोधन में उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और वे कभी भी पार्टी के खिलाफ नहीं जाएंगे.

दतिया उपचुनाव की घोषणा इसलिए हुई क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई. भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मिश्रा को करीब 7,500 वोटों से हराया था.

मिश्रा 2008 से दतिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. वे 2008, 2013 और 2018 में इस सीट से जीत चुके हैं. 2008 के परिसीमन के बाद पड़ोसी डबरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई थी, जिसके बाद मिश्रा दतिया चले गए थे. इससे पहले वे 1990, 1998 और 2003 में डबरा से विधायक चुने गए थे.

राजेंद्र भारती भी अब तक तीन बार दतिया से विधायक रहे हैं. वे 2013 और 2018 में मिश्रा से हार गए थे लेकिन 2023 में उन्होंने उन्हें हरा दिया. इस बीच मिश्रा लगातार क्षेत्र के लोगों के संपर्क में बने रहे. भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी. मिश्रा और उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि BJP उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी. यही वजह है कि आशुतोष तिवारी को टिकट मिलने से सभी हैरान रह गए.

तिवारी पहले मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. सूत्रों का दावा है कि वे मुख्यमंत्री मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल से नियमित रूप से मुलाकात करते रहे हैं.

BJP सूत्रों के मुताबिक, मिश्रा को टिकट नहीं देने का फैसला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने लिया. पार्टी मध्य प्रदेश में पीढ़ीगत बदलाव लाना चाहती है. दूसरी ओर, एक और चर्चा यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव किसी और वरिष्ठ BJP नेता को विधायक बनते नहीं देखना चाहते थे. यह किसी से छिपा नहीं है कि मुख्यमंत्री और उनके वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों, जैसे कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल और कुंवर विजय शाह के बीच संबंध बहुत सहज नहीं रहे हैं. मिश्रा को टिकट नहीं देकर मोहन यादव ने भविष्य में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के संभावित दबाव को भी टाल दिया है.

उधर, कांग्रेस ने पूर्व विधायक और पूर्व राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह को उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है. सिंह ने 13 जुलाई को नामांकन दाखिल किया. राजेंद्र भारती पहले ही कह चुके थे कि उनका परिवार यह चुनाव नहीं लड़ना चाहता.

इस बीच चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव के मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. यादव दलित-ओबीसी गठजोड़ के सहारे जीत हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं.

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