जयपुर संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाली सांगानेर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने भजन लाल शर्मा आज के ठीक तीन दिन बाद 15 दिसंबर को अपना जन्मदिन मनाएंगे. उस दिन वे 57 साल के हो जाएंगे. लेकिन भजन लाल शर्मा ने भी नहीं सोचा होगा कि 57वें जन्मदिन के पहले उन्हें इतना बड़ा उपहार मिल जाएगा और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बना देगी.
3 दिसंबर, 2023 को चुनावी नतीजे आने के बाद से राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में ऐसे-ऐसे नेता शामिल थे, जो कद और अनुभव के मामले में शर्मा से कोसों आगे थे. इस दौड़ में आज के 20 साल पहले 2003 में मुख्यमंत्री बनीं वसुंधरा राजे के अलावा आज के तकरीब चार दशक पहले विधायक बने 72 वर्षीय किरोड़ी लाल मीणा जैसे नेता शामिल थे.
लेकिन इन सब पर पहली बार के विधायक भजन लाल शर्मा भारी पड़ गए. वे उस राज्य के मुख्यमंत्री बन रहे हैं, जहां भाजपा का कमल खिलाने का काम पहली बार आज के तकरीबन 33 साल पहले 4 मार्च, 1990 को भैरो सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर किया था. शेखावत 1977 में भी राजस्थान के मुख्यमंत्री बने थे लेकिन उस समय वे जनता पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री बनाए गए थे.
1990 में बनी भैरो सिंह शेखावत सरकार का अंत 15 दिसंबर, 1992 को हो गया था और राजस्थान राष्ट्रपति शासन के हवाले कर दिया गया था. संयोग ऐसा कि उस दिन जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए की पढ़ाई कर रहे भजन लाल शर्मा का जन्मदिन था. इसके अगले साल 1993 में शर्मा ने राजनीति शास्त्र की पढ़ाई पूरी कर ली लेकिन असल दुनिया की राजनीति का उनका 'मास्टर्स' पूरा होने में 30 साल का वक्त लग गया और ठीक तीन दशक बाद 2023 में वे ठीक 15 दिसंबर के दिन ही शपथ लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.
मंगलवार को राजस्थान भाजपा विधायक दल की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाथों में पार्टी पर्यवेक्षक और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक पर्ची दी और इसके बाद राजे ने ब्राह्मण समाज से संबंध रखने वाले भजन लाल शर्मा का नाम विधायक दल के नेता के लिए प्रस्तावित किया. बाकी लोगों की सहमति की औपचारिकता पूरी होते ही शर्मा के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना महज औपचारिकता रह गई.
भजन लाल शर्मा का यह सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रास्ते भाजपा में आकर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा है. इस बीच वे रेलवे की कुछ समितियों के सदस्य भी रहे. हाल तक वे रेल मंत्रालय की यात्री सेवा समिति के सदस्य थे. विद्यार्थी परिषद, संघ और भाजपा, तीनों संगठनों में भजन लाल शर्मा की पहचान कुशल संगठनकर्ता की है. उनके बारे में कहा जाता है कि जो भी दायित्व उन्हें संगठन की ओर से दिया जाता है, उसे वे पूरे समर्पण के साथ पूरा करते हैं.
जिस जयपुर की सांगानेर सीट से भजन लाल शर्मा पहली बार विधायक बने हैं, वहां के भाजपा जिलाध्यक्ष राघव शर्मा इंडिया टुडे को बताते हैं, ''वे बहुत मेहनती हैं. भाजपा की ओर से पहले वे जोधपुर संभाग के प्रभारी थे. अभी छह महीने पहले तक हमारे जयपुर संभाग के प्रभारी थे. मैंने कई बार ऐसा देखा कि उन्हें सोने के लिए सिर्फ दो घंटे का वक्त मिला लेकिन वे पूरी तरोताजगी के साथ अपने काम में जुटे रहते थे. उनके चेहरे और काम पर थकान का असर नहीं दिखता था.''
भरतपुर के रहने वाले भजन लाल शर्मा को चुनाव लड़ाने के लिए जयपुर की सीट दी गई थी. अब यह कहा जा रहा है कि ऐसा करके पार्टी ने तब ही संकेत दे दिया था कि उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. क्योंकि सांगानेर सीट के जीते हुए भाजपा विधायक अशोक लौहाटी का टिकट काटकर उन्हें टिकट दिया गया था. यह सीट भाजपा के लिए सेफ सीट मानी जाती है. 2003 से भाजपा कभी यह सीट नहीं हारी है. इस सीट पर भजन लाल शर्मा ने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48,081 वोटों से हराया. हालांकि, कांग्रेस की तरफ से उन पर लगातार यह आरोप लगे कि वे बाहरी हैं.
आखिर भजन लाल शर्मा में ऐसा क्या है कि उनके लिए जीते हुए विधायक का भाजपा ने टिकट काटा? जवाब राघव शर्मा देते हैं, '' उनका संगठन कौशल जबर्दस्त रहा है. यही वजह है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की टीम में वे प्रदेश महामंत्री तो हैं ही लेकिन इसके पहले के तीन प्रदेश अध्यक्षों के साथ भी इस पद पर रहते हुए संगठन के दायित्वों का निर्वहन करते रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के आयोजन का दायित्व भी उन्हें मिला और उन्होंने इसे भी सफलतापूर्वक पूरा किया. कभी उन्होंने अपने सांगठनिक कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश नहीं कि बल्कि वे चुपचाप काम करने में यकीन करते हैं.''
हालांकि, जब विधायक दल की बैठक से पहले फोटो सेशन के लिए सारे विधायक बैठे तो भजन लाल शर्मा चौथी पंक्ति में बैठे थे. तब भी किसी को यह अंदाज नहीं था कि चौथी पंक्ति में बैठा पहली बार का यह विधायक कुछ ही मिनटों में इस पूरे आयोजन और राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ जाएगा. हालांकि, कुछ लोगों को हैरानी तब जरूर हुई थी कि बैठक शुरू होने से पहले केंद्रीय पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह उन्हें अलग कमरे में लेकर गए थे. पार्टी के एक नेता की मानें तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का फोन जब राजनाथ सिंह के पास आया तो उसके बाद वे भजन लाल शर्मा को अलग कमरे में लेकर गए.
मुख्यमंत्री बनने के बाद भजन लाल शर्मा की सबसे बड़ी चुनौती पूरे प्रदेश भाजपा को एक साथ लेकर चलने के अलावा चुनाव अभियान में भाजपा द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा करने की होगी.

