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BJP नेताओं को कॉलेज चलाने के नियम क्यों समझा रही बंगाल सरकार?

BJP नेताओं को कॉलेज गवर्निंग बॉडी की कमान देने के बाद नए अध्यक्षों के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं. उनसे राजनीतिक दखल से दूर रहकर प्रशासन और वित्तीय नियमों के मुताबिक कॉलेज चलाने को कहा गया है

पश्चिम बंगाल BJP की संगठनात्मक बैठक में समिक भट्टाचार्य और सुनील बंसल
अपडेटेड 24 सितंबर , 2026

पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई BJP अपने नए नियुक्त कॉलेज गवर्निंग बॉडी अध्यक्षों को प्रशासन, वित्त और नियुक्तियों को लेकर सख्त नियमों का पालन करने को कह रही है. यह सलाह ऐसे समय में आई है, जब पार्टी ने राज्यभर के कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के पदों पर अपने नेताओं की नियुक्ति को लेकर आलोचना का सामना किया है.

इन गाइडलाइंस पर 22 सितंबर को हुई BJP की संगठनात्मक बैठक में चर्चा हुई. बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और बंगाल प्रभारी सुनील बंसल भी मौजूद थे. इसमें जिला अध्यक्ष और विधायक भी शामिल हुए. बैठक में आने वाले नगर निकाय चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई, लेकिन बातचीत का एक बड़ा हिस्सा कॉलेज गवर्निंग बॉडी के कामकाज पर रहा.

BJP नेतृत्व का संदेश साफ था. गवर्निंग बॉडी के अध्यक्षों को प्रशासन और वित्त से जुड़े नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी और उन्हें अपने पद को राजनीतिक दबदबे वाले इलाके की तरह चलाने की इजाजत नहीं होगी.

ये निर्देश पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच आए हैं. इनमें खातों में गड़बड़ी और ऑडिट रिपोर्ट जमा करने में देरी जैसे मामले शामिल हैं. BJP नेतृत्व ने अपने नियुक्त अध्यक्षों से कहा है कि ऐसी गलतियां दोबारा न हों.

अध्यक्षों से कहा गया है कि वे अपने-अपने विश्वविद्यालयों के अध्यादेशों और लागू हुए सभी सरकारी नियमों को पढ़ें और उन्हें अच्छी तरह समझें. गवर्निंग बॉडी की बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए और बैठक का एजेंडा पहले ही सभी सदस्यों को भेजा जाना चाहिए. बैठक की कार्यवाही को सही तरीके से दर्ज किया जाए, उस पर हस्ताक्षर हों और उसे सुरक्षित रखा जाए. साथ ही अध्यक्षों को यह भी देखना होगा कि गवर्निंग बॉडी में लिए गए फैसलों को लागू किया जा रहा है या नहीं.

गाइडलाइंस में वित्तीय प्रबंधन पर खास जोर दिया गया है. अध्यक्षों से कहा गया है कि वे सालाना बजट तैयार करवाएं, समय पर ऑडिट कराएं और सुनिश्चित करें कि कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड में जमा होने वाली रकम नियमित रूप से जमा हो. कॉलेज सर्विस कमीशन की सिफारिश के बिना स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकती. कर्मचारियों की सालाना कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (ACR), प्रमोशन, छुट्टी, पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों को भी समय पर निपटाने की उम्मीद की गई है.

यह निर्देश सिर्फ कागजी काम तक सीमित नहीं हैं. अध्यक्षों से कहा गया है कि वे हॉस्टल और मेस का नियमित निरीक्षण करें, छात्रों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खेल और नेशनल कैडेट कोर (NCC) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दें.

इसके साथ ही उन कामों की भी लंबी सूची दी गई है, जिन्हें अध्यक्षों को नहीं करना है. अध्यक्षों को निजी फायदे के लिए खाली चेक पर हस्ताक्षर करने या कॉलेज के पैसे का मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है. कोरम के बिना कोई बैठक नहीं हो सकती और कोई बड़ा फैसला अकेले नहीं लिया जा सकता.

अवैध नियुक्तियों, ऑडिट या प्रोविडेंट फंड की रकम जमा करने में देरी और सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने जैसे मामलों को खास तौर पर गलत बताया गया है. अध्यक्षों को अकादमिक और पढ़ाई से जुड़े मामलों में दखल देने या छात्रों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने से भी बचने को कहा गया है. सरकार की मंजूरी के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जा सकेगा.

नियमों का पालन करने पर यह जोर BJP सरकार के लिए ऐसे समय में आया है, जब यह उसके लिए कुछ असहज स्थिति पैदा करता है. मई में सत्ता में आने के बाद से शुभेंदु अधिकारी सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के विधायकों और सांसदों की अध्यक्षता वाली गवर्निंग बॉडी को बदल दिया है. अगस्त में सरकार ने 247 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष के तौर पर BJP विधायकों और सांसदों की नियुक्ति की. सितंबर में 171 और कॉलेजों को शामिल करते हुए दूसरी सूची जारी की गई. इसमें भी BJP के कई पदाधिकारियों और पार्टी से जुड़े लोगों को जगह दी गई.

नई नियुक्तियों में BJP उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष तमोघ्न घोष को सुरेंद्रनाथ कॉलेज, BJP की पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी को सम्मिलानी महाविद्यालय, शिशिर बाजोरिया को आचार्य जगदीश चंद्र बोस कॉलेज और 2026 के विधानसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार रहीं प्रियंका टिबरेवाल को सुरेंद्रनाथ कॉलेज फॉर वुमेन का अध्यक्ष बनाया गया है.

इसको लेकर शिक्षाविदों और विपक्षी दलों ने आलोचना की है. खास तौर पर इसलिए क्योंकि BJP ने विपक्ष में रहते हुए तृणमूल सरकार पर कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में राजनीतिक नेताओं के दखल की इजाजत देने का आरोप लगाया था.

शिक्षा क्षेत्र से भी इस पर सवाल उठे हैं. ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के तरुण कांति नास्कर ने कहा कि इन नियुक्तियों से पता चलता है कि सरकार “शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता बचाने में नाकाम रही है.”

वहीं, उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इन नियुक्तियों को अस्थाई व्यवस्था बताया है. नियुक्तियों के राजनीतिक होने के सवाल पर उन्होंने बताया, “पार्टी ने जो भी फैसले लिए हैं, उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें लागू किया है.”

ऐसे में BJP के नए निर्देशों के बाद उसके कॉलेज गवर्निंग बॉडी अध्यक्षों की भी परीक्षा होगी. उन्हें राजनीतिक तौर पर चुना गया है लेकिन अब उनसे यह साबित करने की उम्मीद की जा रही है कि वे कॉलेजों को इस तरह चला सकते हैं कि उनकी राजनीतिक पहचान रोजमर्रा के कामकाज पर हावी न हो.

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