
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दानराशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की सार्वजनिक बहस की चुनौती पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल तय समय पर प्रेस क्लब पहुंचे लेकिन उनका आरोप है कि द्विवेदी वहां नहीं आए.
प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गोदियाल ने कहा, "कांग्रेस तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक बहस के लिए मौजूद रही लेकिन दूसरी कुर्सी खाली रही. इससे साफ है कि BJP और BKTC के पास बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी प्रकरण पर जनता के सवालों के जवाब नहीं हैं." उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर तय समय पर उपस्थित नहीं होता, वह अपनी विश्वसनीयता खुद कमजोर करता है."
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यों के आधार पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और BKTC के पदाधिकारी जानबूझकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
कांग्रेस नेता के मुताबिक, " वैयक्ति सहायक (निजी सचिव) के पद पर प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति 2003 में हुई थी. 2010 में BJP सरकार के समय उनके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और 2014 में उसे मंजूरी मिली इसलिए नियुक्ति और नियमितीकरण को लेकर कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं."

गोदियाल ने कहा, "वास्तविक सवाल यह नहीं है कि किसी कर्मचारी की नियुक्ति कब हुई. सवाल यह है कि बद्रीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताएं किसके कार्यकाल में हुईं. यदि सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियां गायब होने और दानराशि की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी जवाबदेही वर्तमान सरकार और मौजूदा BKTC प्रबंधन की बनती है."
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP हर बड़े विवाद में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाती है. गोदियाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों से BJP की सरकार है. यदि किसी मामले में पहले से अनियमितता थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला मंदिर समिति की आंतरिक जांच से आगे बढ़कर पुलिस और राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच तक पहुंच गया है. मामला सामने आने के बाद चढ़ावे के प्रबंधन और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.
मामले की शुरुआत कैसे हुई
2 जुलाई को मंदिर में थाली भेंट की गणना के दौरान कथित अनियमितता की सूचना सामने आई. अगले दिन भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत भेजी. शिकायत में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई.
शिकायत मिलने के बाद मंदिर समिति ने चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की. संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया. प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत मिलने पर अध्यक्ष कार्यालय में तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया.
BKTC ने कहा कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद 8 जुलाई को BKTC के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306 और 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया.
एफआईआर के अनुसार, मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल पर आरोप है कि उन्होंने थाली भेंट की गणना के दौरान धनराशि और अन्य भेंट सामग्री कथित रूप से निजी तौर पर ले ली थी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. एसआईटी ने कर्मचारियों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए तथा 2 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया.
पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में प्रमोद नौटियाल कई बार गणना कक्ष से नकदी और अन्य भेंट सामग्री मोबाइल फोन के नीचे छिपाकर तथा अपनी जेब में रखकर बाहर ले जाते दिखाई दिए. पुलिस के अनुसार, इनमें 500 रुपये के नोट, सोना-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला और केसर के पैकेट भी शामिल थे.
इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने 12 जुलाई की रात प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उन्हें गोपेश्वर न्यायालय में पेश किया, जहां से 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया.
हालांकि प्रमोद नौटियाल पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है.
मामला सुर्खियों में आने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा, "यदि प्रमोद नौटियाल को मंदिर में चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी दी गई थी तो इसकी जवाबदेही केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं हो सकती. मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. मंदिर समिति के अध्यक्ष की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए."
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी मामले की व्यापक जांच की मांग की. उन्होंने कहा, "यदि प्रमोद नौटियाल अध्यक्ष के निजी सचिव थे तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें बद्रीनाथ धाम में क्या जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और क्या वे अकेले यह काम कर रहे थे. इसलिए मंदिर समिति के शीर्ष स्तर की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए."
वहीं BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा, "प्रमोद नौटियाल मेरे निजी सचिव नहीं हैं. वे मंदिर समिति के कर्मचारी हैं और पहले भी कई अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में काम कर चुके हैं."
द्विवेदी ने आरोप लगाया कि प्रमोद नौटियाल को वर्ष 2014 में तत्कालीन BKTC अध्यक्ष और वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर स्थाई नियुक्ति मिली थी. बाद में उन्हें वैयक्तिक सहायक के पद पर समायोजित किया गया.
उन्होंने कहा, "मौजूदा मामले में संदिग्ध कर्मचारी के खिलाफ निलंबन, एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई हो चुकी है. विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच भी जारी है."
हेमंत द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि गणेश गोदियाल के BKTC अध्यक्ष रहने के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे थे. उन्होंने कांग्रेस पर इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, "गणेश गोदियाल का बद्री-केदार मंदिर समिति में सबसे लंबा कार्यकाल रहा. कांग्रेस जिस प्रमोद नौटियाल को मेरा निजी सचिव बता रही है, उन्हें गोदियाल के कार्यकाल में ही वैयक्तिक सहायक के पद पर नियुक्ति मिली थी. वह समिति के स्थाई कर्मचारी हैं, निजी सचिव नहीं."
चढ़ावा प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए. इसके बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की.
गढ़वाल मंडल आयुक्त को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है. समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है.
फिलहाल इस मामले की जांच दो स्तरों पर चल रही है. एक ओर पुलिस की एसआईटी आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति प्रशासनिक और प्रक्रियागत पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
अब सबकी नजर इन दोनों जांचों की रिपोर्ट पर है. इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर यह तय होगा कि मामले में किसकी जवाबदेही बनती है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है.

