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झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच क्यों चाहते हैं बाबूलाल मरांडी?

झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के बीच बाबूलाल मरांडी अदालत की निगरानी में CBI जांच की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह युवाओं के भरोसे और पारदर्शिता का सवाल है

बाबूलाल मरांडी (बाएं) ने परीक्षा प्रणाली के बहाने हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर हमला बोला
बाबूलाल मरांडी (बाएं) ने परीक्षा प्रणाली के बहाने हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर हमला बोला
अपडेटेड 4 अगस्त , 2026

करीब एक महीने से बाबूलाल मरांडी लगातार एक ही मांग उठा रहे हैं. उनकी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए.

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे पर कई प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसके अलावा, मरांडी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मुद्दे पर पत्र भी लिखा है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हेमंत सरकार CID जांच के जरिए गड़बड़ा चुकी भर्ती प्रक्रिया को बचाने की कोशिश कर रही है. वहीं, हेमंत सोरेन सरकार ने मरांडी के आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि CID जांच सही दिशा में चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. हालांकि विपक्ष इस कार्रवाई को काफी नहीं मानता है.

रांची में हो रहे छात्र आंदोलन की तस्वीर

BJP नेता मरांडी का कहना है कि मामला सिर्फ एक परीक्षा भर का नहीं है. यह योग्यता के आधार पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने और युवाओं की उम्मीदों की रक्षा करने का सवाल है. JPSC विवाद जैसे-जैसे बढ़ा, यह केवल परीक्षा का विवाद नहीं रहा बल्कि राज्य के सबसे बड़े संस्थागत संकटों में से एक बन गया है.

JPSC ने 2 जुलाई की देर रात 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया. आयोग ने 103 सिविल सेवा पदों के लिए 2,204 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया. इसके बाद अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी फैल गई. उन्हें मुख्य परीक्षा यानी मेन्स की तैयारी के लिए केवल 17 दिन का समय मिला.

इससे भी बड़ा विवाद यह रहा कि आयोग ने अलग-अलग श्रेणियों (कैटेगरी) के कट-ऑफ अंक जारी नहीं किए, जबकि किसी भी प्रतियोगी भर्ती प्रक्रिया में यह पारदर्शिता की सामान्य आवश्यकता मानी जाती है. यह दावा भी किया गया कि आयोग के कुछ सदस्यों ने भी परिणाम घोषित करने के तरीके पर आपत्ति जताई थी. इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया.

21 जुलाई को इस मामले ने नया मोड़ लिया. CID ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें परीक्षा नियंत्रक (डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर) श्वेता कुमारी गुप्ता, TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के दो निदेशक और आउटसोर्सिंग एजेंसी के कई कर्मचारी शामिल थे. जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा से जुड़े डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं हुईं हैं.

यह खुलासा सरकार के लिए इसलिए भी असहज था क्योंकि लखनऊ की कंपनी TDPL को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने मई 2025 में प्रक्रिया में गड़बड़ी और गोपनीयता के उल्लंघन के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इसके बावजूद आरोप है कि कंपनी JPSC के लिए परीक्षा से जुड़ा संवेदनशील काम करती रही. कुछ दिन बाद JPSC के अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते ने निष्पक्ष जांच में सहयोग देने की बात कहते हुए इस्तीफा दे दिया.

मरांडी का कहना है कि इन घटनाओं ने उनके आरोपों को सही साबित किया है. उनके मुताबिक यह कोई साधारण प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि राज्य की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है. उन्होंने CID जांच को स्वीकार करने से इनकार किया है.

नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि जिस सरकार के संस्थानों पर सवाल उठ रहे हों, उसके अधीन होने वाली जांच से छात्रों का भरोसा नहीं बन सकता. इसलिए उन्होंने JPSC ही नहीं, बल्कि JPSC और JSSC दोनों की भर्ती प्रक्रियाओं की अदालत की निगरानी में CBI जांच की मांग की है.

मरांडी ने इंडिया टुडे से कहा, "जब NEET परीक्षा में गड़बड़ी सामने आई तो केंद्र की NDA सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी, दोबारा परीक्षा कराई और CBI को जांच सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की. जबकि झारखंड में JSSC और JPSC की परीक्षाओं में कथित तौर पर सीटें खुलेआम बेची जा रही हैं लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद हेमंत सोरेन सरकार जवाबदेही से बच रही है. झारखंड के युवाओं को न्याय मिलना चाहिए."

रांची में छात्र JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्र

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इन आरोपों का जवाब दिया. पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा, "JPSC मामले की आड़ में सरकार की छवि खराब करने और छात्रों के भविष्य से खेलने की साजिश में शामिल बड़े चेहरे जल्द सामने आएंगे. जैसे ही अनियमितताओं की शिकायत मिली, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लिया और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए."

उन्होंने आगे कहा, "सरकार केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रही. FIR दर्ज कराई गई, जांच एजेंसी को JPSC कार्यालय भेजा गया और अध्यक्ष समेत संबंधित अधिकारियों से पूछताछ शुरू की गई. कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इस बात का सबूत है कि हेमंत सोरेन सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है."

मरांडी ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि परीक्षा के अलग-अलग चरणों में नौकरी दिलाने के लिए उम्मीदवारों से भारी रकम मांगी गई. मरांडी की इस मुहिम की खास बात सिर्फ CBI जांच की मांग नहीं, बल्कि इस मुद्दे को लगातार उठाते रहना है. वे लगातार प्रदर्शन कर रहे छात्रों के संपर्क में रहे, मीडिया के सामने बार-बार यह मामला उठाया और इसे केवल राजनीतिक टकराव नहीं बल्कि संस्थागत जवाबदेही की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की.

इस अभियान से BJP को शासन, पारदर्शिता और युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ा एक अहम राजनीतिक मुद्दा भी मिला है. NEET विवाद के बाद पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर जो बहस शुरू हुई थी, JPSC विवाद ने उसे और मजबूत किया है. झारखंड में मरांडी इस मुद्दे को सबसे प्रमुखता से उठाने वाले विपक्षी नेता बनकर उभरे हैं.

फिलहाल यह साफ नहीं है कि CBI जांच की मांग मानी जाएगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि JPSC विवाद अब सिर्फ परीक्षा का मामला नहीं रह गया है. यह झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक पर जनता के भरोसे की परीक्षा बन गया है.

इस लड़ाई में बाबूलाल मरांडी खुद को केंद्र में ले आए हैं. CBI जांच की मांग अब उनके विपक्षी राजनीति के सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन गई है और हाल के वर्षों में झारखंड की भर्ती प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर चल रहे सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में शामिल हो गई है.

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